blogid : 9922 postid : 51

दुख के काँटे (कविता)

Posted On: 19 May, 2012 Others में

Contemporary ThoughtsContemporary Thoughts

Punita Jain

15 Posts

175 Comments

दुख में सुख की बहुत याद आती है,

धैर्य और साहस की परीक्षा हो जाती है ।

आग में तपकर ही सोने में चमक आती है,

दुख को सहकर ही किस्मत को चुनौती दी जाती है ।


दुख सुख का महत्व समझा जाता है,

दूसरों के दर्द का भी हसास करा जाता है ।

दुख शत्रु और मित्र की पहचान करा देता है,

अपने और पराये की परख बता देता है ।


सुख छिनने का हमेशा डर लगा रहता है,

दुख में व्यक्ति इस बात से निर्भय बना रहता है ।

सुख जाता है तो दुख दे जाता है,

दुख जाता है तो सुख दे जाता है ।


पतझड़ के बाद बसन्त की बहार भी आती है,

तपती गर्मी के बाद मानसून की बौछार भी आती है ।

अँधेरी रात के बाद उजाले की भोर भी आती है,

दुख और कष्टों के बाद सुख की झंकार भी आती है ।


उजाले के बिना जीवन में अँधेरा हो जाता है,

पर अँधेरा ही उजाले का महत्व समझाता है ।

सुख  दुख जीवन के साथ चलते हैं,

फूलों के साथ कांटे भी मिलते हैं ।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग