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देश की बर्बादी का जिम्मेदार कौन ?

Posted On: 4 Apr, 2014 Others में

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rachnarastogi

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आजादी के समय भारत की जनसँख्या कुल 36 करोड़ थी और आज 125 करोड़ है लेकिन अपना यह 125 करोड़ आबादी वाला पूरा देश आज कमरतोड़ महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी,बेबस भूख, बीमारी, लाचारी और सियासी गद्दारी से त्रस्त और दुखी है और इसके लिए जिम्मेदार और कोई नही केवल यूपीए सरकार है जिसमे कांग्रेस सपा बसपा जदयू राजद एनसीपी टीएमसी डीएमके एआईडीएमके आप रालोद आदि सब बराबर के जिम्मेदार हैं/ कांग्रेस का तो सन 1947 से लेकर 1977 तक एक छत्र राज रहा और नेहरू वंशज राजाओं की तरह पूजे गए और स्वयंभू क्रांतिकारी केजरीवाल भी चाहकर अपने को इस भ्रष्ट गठबंधन से अलग नही कर सकता क्योंकि दिल्ली में उसकी सरकार को जदयू और कांग्रेस का बिना शर्त पूरा समर्थन था और किसी ने भी समर्थन वापिस नही लिया था और जैसे बन्दर मदारी के इशारों पर नाचता है ठीक वैसे ही केजरीवाल सोनिया का बन्दर है जिसका काम केवल मोदी को गाली देना भर है /इसमें कोई शक नही कि मुसलमानों की वोटें ही इस बार भारत का पीएम और भारत की दिशा और दशा दोनों तय करेंगी इसलिए यूपीए के सारे घटक मुसलमानों को रिझाने ही नही बल्कि मोदी की खिलाफत करने के लिए उकसा रहे हैं लेकिन क्या मुसलमानों ने यह कभी सोचा है कि अगर मोदी सत्ता में आये तो पेट्रोल डीजल सब्जियां अनाज सस्ता होना ही है तो क्या मुसलमानों को यह सब सस्ता नही मिलेगा ? अगर रोजगार के अवसर बढ़ते हैं तो क्या मुसलमानों को रोजगार नही मिलेगा ?क्या मुसलमानों या कांग्रेसियों या यूपीए के समर्थकों के लिए अलग से कोई रिटेल स्टोर खुला हुआ है जहाँ इनको सस्ता सामान मिलता है ?आजमखान और इनके जैसे जितने भी खान जो आज अपने को मुसलमानों का ठेकेदार बता रहे हैं उनसे मुसलमानों को सावधान रहने की जरुरत है क्योंकि देश की बर्बादी के लिए इन मुस्लिम ठेकेदारों का भी बराबर का योगदान रहा है /भारत में नातो इस्लाम को कोई ख़तरा है और नाहीं मुसलमानों को ही लेकिन मोदी का डर दिखाकर ये खुद को सेकुलर बताने वाले नेता भारत को अमरीका और चीन के हाथों गिरवीं रखना चाहते हैं /जितने भी इस यूपीए कुल और कुलगोत्र के वोटर हैं क्या उनको डीजल पेट्रोल गैस अनाज केरोसिन सस्ता मिलता है जो इन भ्रष्ट नेताओं की रैलियों में जाकर अपना कीमती वक़्त बर्बाद करते हैं /केजरीवाल अन्ना सोनिया मनमोहन ये सब के सब अमेरिका के एजेंट हैं जिनका काम केवल मोदी को रोकना भर है और इनके इस अभियान में सपा बसपा जदयू राजद रालोद आप टीएमसी एनसीपी जैसे दल अपना अपना हिस्सा खाकर यूपीए से रिश्तेदारी बखूबी निभा रहे हैं ?यह अंतिम अवसर है और इस बार अगर चूके तो देश बर्बाद हो जायेगा क्योंकि भारतीय सेना भले ही विश्व की सबसे बड़ी सेना हो लेकिन है अंदर से खोखली क्योंकि थल सेना का साहस भी बॉर्डर पर देखने को मिलता ही रहता है ,पनडुब्बियां खुद ही डूब रही हैं और वायु सेना के लड़ाकू विमान उड़ते कम गिरते ज्यादा हैं ?सेना का भ्रष्टाचार भी अब छुआ नही है क्योंकि सेना के जवानों के राशन आदि में ही नही बल्कि हथियार खरीद फरोख्त तक में भारी भरकम कमीशन चलता है जिसके कारनामे मीडिया में आये दिन की सुर्खियां बनते रहे हैं और राशन खाना की खरीद का सत्य खुद जनता प्रतिदिन थोक सब्जी मंडी या मांस विक्रेताओं के यहाँ जाकर अपनी आँखों से बिना चश्मे के भी देख सकती है/सीडीए में कमीशनबाजी खुले आम है और सेना केंटीन का सामान खुदरा बाजार में बिकता है /भारत की अर्थव्यवस्था न्यायव्यवस्था कानून व्यवस्था लगभग चौपट ही चुकी है और किसी न किसी शहर में आये दिन होते जातीय एवं कौमी दंगे फसाद आने वाले गृहयुद्ध का संकेत दे रहे हैं / पांच साल पहले चिदंबरम पर वोटिंग फर्जीवाड़ा पर मुकदमा शुरू हुआ था और अब नया चुनाव भी शुरू हो चूका है इन पांच सालों में चिदंबरम में खूब मौज काटी – किसके खर्चे पर ?इसपर केजरीवाल आजमखान मनमोहन सोनिया राहुल मुलायम मायावती नीतीश लालू अजीतसिंह क्यों नही बोलते ? हालत यह हो गयी है कि बेरोजगारी से परेशान युवक जरायम अपराध को ही वैकल्पिक रोजगार बना रहे हैं क्योंकि अब जितने भी अपराधी पकडे जा रहे हैं उनमे अधिकांशतः शिक्षित वर्ग का तबका जुड़ा है /यूपी में चलती ट्रेन में लूटखसोट की ख़बरें आये दिन का किस्सा हो गयी हैं जिसके लिए यूपी की सपा सरकार रेल मंत्रालय को दोषी ठहराती हैं लेकिन गोधरा रेल काण्ड के लिए मोदी जिम्मेदार हो जाते हैं /कुम्भ के मेले के समय पिछले वर्ष इलाहाबाद में स्टेशन पर मची भगदड़ में मरे हिंदुओं को कोई सांत्वना देने नही पहुंचा और नहीं कोई मुआवजा लेकिन इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कौन ” यूपी सरकार या रेल मंत्रालय” – इसपर केजरीवाल मौन ?उत्तराखंड त्रासदी में उत्तराखंड पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार ने 1000 करोड़ का पैकेज दिया और भी बहुत से पूरे भारत के हिंदुओं ने इससे भी ज्यादा नगद धन राशि दान में दी लेकिन वहाँ उस पैसे से क्या हुआ ,किसका और कितनों का पुनर्वास हुआ किसको कुछ पता नही लेकिन मानवीय संवेदनशील मुद्दे पर अन्ना ,केजरीवाल,योगेन्द्र यादव ,मुलायम मायावती राहुल सोनिया चुप क्यों है क्योंकि उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार है और मरने वाले हिन्दू थे / वाराणसी में केजरीवाल की साथी शाज़िया इल्मी को शिव मंदिर में शिव लिंग पर जल चढ़ाने पर मुस्लिम धर्म गुरुओं ने उसका बहिष्कार किया लेकिन हिन्दू बेशर्मी से अपने सिर पर मुस्लिम टोपी पहनकर अपने को मुस्लिम बताने में गर्व करते हैं इसपर शंकरचार्य स्वरूपानंद चुप हो जाता है ?नवरात्रे चल रहे हैं क्या किसी मुस्लिम नेता को किसी हिन्दू के घर में शाम को दुर्गा पूजा में शामिल होते देखा है यानि सेकुलरिज्म के ठेकदार केवल यूपीए के हिन्दू घटक साथी ही हैं? भारत का लोकतंत्र अब केवल मुस्लिम वर्ग की ही राजनीति तक सीमित होकर रह गया है / सपा का घोषणापत्र तो मुस्लिम तुष्टिकरण का ही शपथनामा है / बसपा का घोषणापत्र कभी आता ही नही और अन्य राजनीतिक दलों का घोषणापत्र कोई पढ़ता ही नही क्योंकि जिस वोटर को वोट देनी होती है यह घोषणापत्र बजाय उस वोटर को देने के मीडिया को दिया जाता है /जबकि कानून यह कहता है कि वोटर को किसी भी प्रकार का प्रलोभन नही दिया सकता तो फिर यह घोषणापत्र क्या है?क्या यह आवश्यक नही होना चाहिए कि अपने क्षेत्र का प्रत्येक उम्मीदवार अपनी पार्टी का घोषणापत्र अपने क्षेत्र के प्रत्येक वोटर को चुनाव मतदान तिथि से पहले उपलब्ध कराये ताकि मतदाता गहनता से उसकी वास्तविकता जाँच सके ?लेकिन जांचकर भी क्या करेगा क्योंकि देश के 25 प्रतिशत मतदाता तो अनपढ़ हैं और 70 प्रतिशत अति गरीब और भूखे हैं जिनको एक वक्त की रोटी और पांच रूपया देकर अपने पक्ष में वोट डलवाई जा सकती है यानि इससे बड़ा मजाक इस लोकतंत्र का और क्या होगा ?चाहकर भी भारत की राजनीति क्षेत्र जाति धर्म संप्रदाय के आंकड़ों से बाहर नही आ सकती तो फिर विकास के दावे करना क्या तर्कसंगत न्यायसंगत है ? किसका विकास होना है -सामान्य जनता का या विशिष्ट वोट बैंक का या फिर राजनेताओं की आर्थिक स्थिति का विकास होना है और हुआ है और हो चूका है ?इसलिए चुनावी रणक्षेत्र में मतदाता को क्या करना है इसपर कोई बहस नही होती ,बहस होती है तो इस बात की कि अटल बिहारी अच्छे वक्ता थे और मोदी नही ,बहस होती है इस बात की गांधी को आरएसएस ने मारा या गांधी खुद की गलतियों से मरा ,बहस होती है इस बात की कि सोनिया गांधी त्याग की मूर्ती हैं और मनेका स्वार्थ की ?बहस का मुद्दा यह बना हुआ है कि मुस्लिम मजबूरी हैं या जरुरी लेकिन कोई यह नही पूछता कि देश आज विश्व पटल पर किस स्थिति में है / आर्यभट्ट ,भाभा,रमन ,खुराना जैसे विश्वस्तरीय वैज्ञानिक पैदा करने वाला देश आज अनपढ़ मूर्ख अपराधी व्यक्तियों को माननीय बनाकर देश का कानून निर्माता पैदा कर रहा और ये माननीय अपनी इच्छा से संविधान संशोधन कर सकने में भी समर्थ हैं बस दो तिहाई बहुमत चाहिये /
रचना रस्तोगी

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