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क्या इस्तीफा ही समस्या का समाधान है ?

Posted On: 13 May, 2013 Others में

सीधी बातसुलझी सोच, समग्र विकास

Rachna Varma

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भ्रष्ट्राचार से जुड़े मुद्दे को ले कर जिस तरह से दो केन्द्रीय मंत्रियों की कुर्सी गयी आज के दौर में यह मुद्दा मात्र शर्मनाक ही नहीं वरन उस यक्ष प्रश्न की तरह उपस्थित है कि मंत्री जैसे पद पर रहते हुए जबकि पूरा मौका रहता है कि उस मंत्रालय से जुड़े पूरी व्यवस्था को ठीक किया जाये हर कोई बस अपने भाई -भतीजे तथा खानदान को लूटने कि खुली अनुमति दे देता है ! और ऐसा नहीं की यह पहली बार हुआ है घपले तथा घोटाले की एक लंबी फेरहिस्त है जो भी मंत्री इस भ्रष्ट्राचार की वैतरणी में डुबकियाँ खा रहे है उनमे से जो कुछ भी नाम सामने आ जाता है उसके पीछे मात्र यही कारण है कि मनमाना काम न होने के कारण जिस शख्स ने करोडो रूपये का लालच दे कर अपना कुछ भी काम करवाया है उसी ने किसी मसले पर आपसी सहमति न होने पर करोडो का वारा – न्यारा करने वाले मंत्री महोदय के रिश्तेदार को किसी मामले में लपेटने में भी देर नहीं लगाया ! यह मामले उसी तरह के होते है जब की हर कोई मिल -बाँट कर खा रहा हो मगर सभी को जब तक बराबरी का हिस्सा मिलता रहे तब तक तो यह बंदर -बाँट चलता रहता है मगर जैसे चोरो के गिरोह में होता है कि उनके अपने ही गिरोह में धर -पकड शुरू हो जाती है जबकि किसी एक चोर को उसके मनमुताबिक हिस्सा न मिले !
यह पूरी व्यवस्था ही अंदर -अंदर इस कदर चरमरा चुकी है कि यह बस कुछ दिनों के लिए अखबारों कि सुर्खियाँ तथा टीवी चैनल्स कि सनसनी बन कर रह जाती है बहुत हुआ तो एक -दो लोगो के इस्तीफे के साथ जनता के गुस्से को थोडा बहुत पानी के छींटे डाल कर ठंडा कर दिया जाता है | मगर “मधुमखी के छत्ते” वाले इस देश में ततैया पाल कर जिस कांग्रेस पार्टी ने रखा उसके डंक से भला किसे चुभन हो रही है !! एक दूसरे को दोष देने से ही समस्या का समाधान नहीं होने वाला और इस्तीफा दे देने मात्र से भ्रष्ट्राचार का किस्सा खत्म नहीं होने वाला अब थोडा बहुत कानून में भी बदलाव हो टैक्स का बोझ हम आम जनता पर क्यों बढे ? इन भ्रष्ट्राचारियो कि संपत्ति को क्यों न कुर्क किया जाये और इनकी पाप कि कमाई को तथा मंत्रालय कि मलाई को उसी मंत्रालय के विकास में लगाया जाये अगर इस तरह का कोई कानून बन जाये तो शायद व्यवस्था में थोडा बहुत सुधार हो |
अंत में लोकल बॉडी टैक्स (L B T ) से जुड़ा एक मुद्दा पूरे महाराष्ट्र में जिस तरह से इस टैक्स को ले कर बंद चल रहा है | उस पर विचार करने कि आवश्यकता है कि इस तरह के टैक्स से इंस्पेक्टर राज बढेगा आखिर किस आधार पर इस तरह के टैक्स की अवधारणा बनायीं जा रही है यह तो उसी तरह से होगा की लोग मनमाना टैक्स वसूलेंगे और अभी भी छोटे दुकानदारो को कितने तरह का टैक्स देना पड़ता है उन पर टैक्स का बोझ बढेगा तो इसकी भरपाई हर प्राडक्ट की कीमत बढ़ा कर आम आदमी से ही लिया जायेगा इसलिए इस टैक्स को लागू करने के पहले महाराष्ट्र सरकार एक दफा जरुर सोचे |

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