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UP Nagar Palika Election 2017

Posted On: 6 Dec, 2017 Others में

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उत्तर प्रदेश में आये UP Nagar Palika Election 2017 परिणाम कई मायनो में अलग है.दोनों स्थानीय पार्टियों ने पहली बार नगर निगम के चुनावों में हाथ आजमाया है.इससे पहले पार्टी के निशान पर दोनों पार्टियों ने कभी भी अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे.दोनों पार्टियों के पार्टी समर्थित उम्मीदवार जरूर उतरते रहे है.भाजपा हमेशा से इन चुनावों में पुरे डैम ख़म से उतरती रही है.
भाजपा के लिए बेहद प्रभावशाली जीत रही है.भाजपा को पहले से ही शहरी पार्टी माना जाता है.उसका प्रर्दशन हमेशा से शहरी चुनावों में अच्छा रहा है.दिल्ली में भी पिछले १७ साल से सत्ता में ना होने के बावजूद स्थानीय निगमों में भाजपा ही १७ साल से सत्ता में है.उत्तर प्रदेश में भी विपक्ष में रहते हुवे भाजपा ने स्थानीय निकाय चुनाव कई बार जीते है.इस बार के चुनाव में भले ही भाजपा जीत गयी है लेकिन मुख्यमंत्री जी के वार्ड में ही भाजपा का उम्मीदवार हार गया है.उपमुख्यमंत्री जी के क्षेत्र में भी भाजपा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पायी है.
यँहा ध्यान देने वाली बात यह है कि इन दोनों के क्षेत्र में कुछ ही समय में लोकसभा चुनाव भी होने वाले है.ऐसे में इन दोनों को अपने चुनाव क्षेत्र में ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है.भाजपा शासन में जिस तरह से अपराधियों को प्रदेश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है उससे आम जनता काफी राहत महसूस कर रही है.
अखिलेश सरकार के नियुक्ति घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट जैसे बड़े भ्रष्टाचार के मामलो की जाँच करवाने जैसे निर्णयों से सरकार की विश्वसनीयता जनता के बीच बढ़ी है.सरकार द्वारा जाति और धर्म से ऊपर उठ कर फैसले लेने से सभी जातियों का वोट भाजपा को मिला है.८ महीने की भाजपा सरकार को जनता ने पूर्ण समर्थन बरकरार रखा है.
UP Nagar Palika Election 2017 से सबसे ज्यादा फायदा मायावती जी की पार्टी बसपा को हुवा है.पहले लोकसभा चुनाव फिर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में अत्यंत दयनीय प्रदर्शन के बाद मायावती जी राजनीतिक भविष्य पर कई लोगो ने सवाल उठाने शुरू कर दिए थे.
इनके कई विश्वसनीय साथी दूसरे दलों में चले गए थे.मायावती जी ने इस बीच अपनी राज्यसभा की सीट से भी त्यागपत्र दे दिया था.भीम आर्मी के उभार के साथ मायावती और बसपा की चुनौतियां काफी बढ़ गयी थी.इन सभी चुनौतियों की वजह से अब बसपा को अपनी राजनीतिक ताक़त दिखाना बहुत जरुरी हो गया था.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा को प्रासंगिक रखने के लिए यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण था.इस चुनाव में विपक्ष में केवल बसपा ही भाजपा को टक्कर देती नजर आयी.जबकि इस चुनाव में मायावती जी ने कंही भी बसपा के लिए कोई जनसभा या रैली नहीं की थी.
इस चुनाव में दलित वोटो के साथ मुसलमान वोट भी बड़ी संख्या में बसपा को मिले है.मुसलमान वोट पिछले विधानसभा चुनावो में बिखर गए थे और बसपा के हिस्से में बहुत कम आये थे.सपा और कांग्रेस के गठबंधन की वजह से अधिसंख्यक मुस्लिम वोट इस गठबंधन को पड़े थे.सपा के अंदुरुनी लड़ाई और कांग्रेस का हिन्दू वोटो की तरफ झुकाव ने मुस्लिम मतदातावो के सामने केवल अब बसपा का विकल्प ही छोड़ा था.
सपा और कांग्रेस के लिए यह चुनाव और भी भयानक रहा है.सपा का प्रदर्शन अखिलेश यादव के नेतृत्व में और खराब होता जा रहा है.मुलायम सिंह यादव ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान अपने द्वारा करवाए गए गोलीकांड का बार-बार उल्लेख करना भी मुस्लिम वोटो को सपा से बिदकने से रोक नहीं सका.शिवपाल यादव ने अपने क्षेत्र में अपने समर्थित उम्मीदवार को जीता कर अपनी ताक़त दिखा दी है.
मुलायम सिंह यादव के लाख प्रयासों के के बावजूद दोनों पक्ष सुलह करने को तैयार नहीं है.सपा से अब केवल यदुवंशी वोटर ही मजबूती से जुड़े है.मुस्लिम वोटो का बड़ा हिस्सा इस चुनाव में बसपा के साथ चला गया है.मुस्लिम वोटो को फिर से सपा से जोड़ना अखिलेश के बड़ी मुश्किल का काम होगा.
२०१९ के लोकसभा चुनावों तक अगर सपा की आपसी रार नहीं सुलझी तो अखिलेश यादव के राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान लग जायेगा.भविष्य में अखिलेश यादव की हालत अजित सिंह जैसी भी हो सकती है.
कांग्रेस के लिए तो समय बाद से बदतर होता जा रहा है.समाज के सभी वर्गों का विश्वास पार्टी पहले ही खो चुकी है.कांग्रेस के टिकट पर अब जो भी चुनाव जीत रहा है वह केवल अपने सामर्थ्य से ही जीत रहा है.UP Nagar Palika Election 2017 चुनाव राहुल गाँधी के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है क्योकि गाँधी परिवार और कांग्रेस के मजबूत गढ़ अमेठी और रायबरेली दोनों जगह सभी सीट पर हार हुई है.
यह राहुल गाँधी के लिए निजी नुकसान भी है.अगर हालात ऐसे ही रहे तो २०१९ के चुनावों में राहुल गाँधी अमेठी से चुनाव हार भी सकते है.रायबरेली में भी सोनिया गाँधी के लिए अगले चुनाव में जीतना आसान नहीं होगा.हो सकता है कि सोनिया गाँधी स्वास्थ्य कारणों से वँहा से चुनाव ही न लड़े.
UP Nagar Palika Election 2017 चुनावों के बाद भी विपक्ष का EVM मशीन हैक का पुराना राग अलापना जारी रहा.अब मायावती के साथ-साथ अखिलेश यादव भी इसमें शामिल हो गए है.अफ़सोस की बात है की यह दोनों नेता यह नहीं बता पा रहे है कि जनता ने दोनों को राज करने का पर्याप्त मौका दिया लेकिन इन्होने जनता को क्या दिया?
ये दोनों नेता अपनी जाति से आगे बढ़ ही नहीं पाए.भ्रष्टाचार का कोई मौका दोनों ने नहीं छोड़ा फिर भी इन्हे लगता है कि जनता का इन पर आज भी उतना विशवास है जितना इन्हे सत्ता सौपते वक़्त थी.
भाजपा के लिए यह चुनाव काफी उत्साह जनक रहा है.इस चुनाव में जीत गुजरात चुनाव पर भी प्रभाव डालेगी.भाजपा के लिए यह चुनाव २०१९ के लिए भी उत्साह दिलाने वाला है.मायावती जी के लिए भी यह चुनाव कई अच्छे संकेत दे गया है.सपा के लिए यह चुनाव भी बुरे सपने की तरह रहा.अब मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को जल्द ही घरेलु झगड़े से किसी भी तरह निपटना होगा.सपा और अखिलेश यादव की २०१९ के चुनाव की सम्भावनाये अब इसी बात पर निर्भर है.
कांग्रेस के लिए UP Nagar Palika Election 2017 चुनाव एक और दुखस्वप्न रहा.इसने कांग्रेस की गुजरात चुनावों में कुछ अच्छा करने की संभावना पर भी असर डाल दिया है.अमेठी और रायबरेली की हार बड़ा सन्देश दे रही है.भाजपा निश्चित तौर पर ही इस हार का पूरा फायदा उठाएगी.
उत्तर प्रदेश में आये UP Nagar Palika Election 2017 परिणाम कई मायनो में अलग है.दोनों स्थानीय पार्टियों ने पहली बार नगर निगम के चुनावों में हाथ आजमाया है.इससे पहले पार्टी के निशान पर दोनों पार्टियों ने कभी भी अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे.दोनों पार्टियों के पार्टी समर्थित उम्मीदवार जरूर उतरते रहे है.भाजपा हमेशा से इन चुनावों में पूरे दम ख़म से उतरती रही है.
इन चुनावों में सबसे ज्यादा फायदा बसपा और बहन मायावती जी को हुवा है.
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जय हिन्द
उत्तर प्रदेश में आये UP Nagar Palika Election 2017 परिणाम कई मायनो में अलग है.दोनों स्थानीय पार्टियों ने पहली बार नगर निगम के चुनावों में हाथ आजमाया है.इससे पहले पार्टी के निशान पर दोनों पार्टियों ने कभी भी अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे.दोनों पार्टियों के पार्टी समर्थित उम्मीदवार जरूर उतरते रहे है.भाजपा हमेशा से इन चुनावों में पुरे डैम ख़म से उतरती रही है.
भाजपा के लिए बेहद प्रभावशाली जीत रही है.भाजपा को पहले से ही शहरी पार्टी माना जाता है.उसका प्रर्दशन हमेशा से शहरी चुनावों में अच्छा रहा है.दिल्ली में भी पिछले १७ साल से सत्ता में ना होने के बावजूद स्थानीय निगमों में भाजपा ही १७ साल से सत्ता में है.उत्तर प्रदेश में भी विपक्ष में रहते हुवे भाजपा ने स्थानीय निकाय चुनाव कई बार जीते है.इस बार के चुनाव में भले ही भाजपा जीत गयी है लेकिन मुख्यमंत्री जी के वार्ड में ही भाजपा का उम्मीदवार हार गया है.उपमुख्यमंत्री जी के क्षेत्र में भी भाजपा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पायी है.
यँहा ध्यान देने वाली बात यह है कि इन दोनों के क्षेत्र में कुछ ही समय में लोकसभा चुनाव भी होने वाले है.ऐसे में इन दोनों को अपने चुनाव क्षेत्र में ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है.भाजपा शासन में जिस तरह से अपराधियों को प्रदेश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है उससे आम जनता काफी राहत महसूस कर रही है.
अखिलेश सरकार के नियुक्ति घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट जैसे बड़े भ्रष्टाचार के मामलो की जाँच करवाने जैसे निर्णयों से सरकार की विश्वसनीयता जनता के बीच बढ़ी है.सरकार द्वारा जाति और धर्म से ऊपर उठ कर फैसले लेने से सभी जातियों का वोट भाजपा को मिला है.८ महीने की भाजपा सरकार को जनता ने पूर्ण समर्थन बरकरार रखा है.
UP Nagar Palika Election 2017 से सबसे ज्यादा फायदा मायावती जी की पार्टी बसपा को हुवा है.पहले लोकसभा चुनाव फिर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में अत्यंत दयनीय प्रदर्शन के बाद मायावती जी राजनीतिक भविष्य पर कई लोगो ने सवाल उठाने शुरू कर दिए थे.
इनके कई विश्वसनीय साथी दूसरे दलों में चले गए थे.मायावती जी ने इस बीच अपनी राज्यसभा की सीट से भी त्यागपत्र दे दिया था.भीम आर्मी के उभार के साथ मायावती और बसपा की चुनौतियां काफी बढ़ गयी थी.इन सभी चुनौतियों की वजह से अब बसपा को अपनी राजनीतिक ताक़त दिखाना बहुत जरुरी हो गया था.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा को प्रासंगिक रखने के लिए यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण था.इस चुनाव में विपक्ष में केवल बसपा ही भाजपा को टक्कर देती नजर आयी.जबकि इस चुनाव में मायावती जी ने कंही भी बसपा के लिए कोई जनसभा या रैली नहीं की थी.
इस चुनाव में दलित वोटो के साथ मुसलमान वोट भी बड़ी संख्या में बसपा को मिले है.मुसलमान वोट पिछले विधानसभा चुनावो में बिखर गए थे और बसपा के हिस्से में बहुत कम आये थे.सपा और कांग्रेस के गठबंधन की वजह से अधिसंख्यक मुस्लिम वोट इस गठबंधन को पड़े थे.सपा के अंदुरुनी लड़ाई और कांग्रेस का हिन्दू वोटो की तरफ झुकाव ने मुस्लिम मतदातावो के सामने केवल अब बसपा का विकल्प ही छोड़ा था.
सपा और कांग्रेस के लिए यह चुनाव और भी भयानक रहा है.सपा का प्रदर्शन अखिलेश यादव के नेतृत्व में और खराब होता जा रहा है.मुलायम सिंह यादव ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान अपने द्वारा करवाए गए गोलीकांड का बार-बार उल्लेख करना भी मुस्लिम वोटो को सपा से बिदकने से रोक नहीं सका.शिवपाल यादव ने अपने क्षेत्र में अपने समर्थित उम्मीदवार को जीता कर अपनी ताक़त दिखा दी है.
मुलायम सिंह यादव के लाख प्रयासों के के बावजूद दोनों पक्ष सुलह करने को तैयार नहीं है.सपा से अब केवल यदुवंशी वोटर ही मजबूती से जुड़े है.मुस्लिम वोटो का बड़ा हिस्सा इस चुनाव में बसपा के साथ चला गया है.मुस्लिम वोटो को फिर से सपा से जोड़ना अखिलेश के बड़ी मुश्किल का काम होगा.
२०१९ के लोकसभा चुनावों तक अगर सपा की आपसी रार नहीं सुलझी तो अखिलेश यादव के राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान लग जायेगा.भविष्य में अखिलेश यादव की हालत अजित सिंह जैसी भी हो सकती है.
कांग्रेस के लिए तो समय बाद से बदतर होता जा रहा है.समाज के सभी वर्गों का विश्वास पार्टी पहले ही खो चुकी है.कांग्रेस के टिकट पर अब जो भी चुनाव जीत रहा है वह केवल अपने सामर्थ्य से ही जीत रहा है.UP Nagar Palika Election 2017 चुनाव राहुल गाँधी के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है क्योकि गाँधी परिवार और कांग्रेस के मजबूत गढ़ अमेठी और रायबरेली दोनों जगह सभी सीट पर हार हुई है.
यह राहुल गाँधी के लिए निजी नुकसान भी है.अगर हालात ऐसे ही रहे तो २०१९ के चुनावों में राहुल गाँधी अमेठी से चुनाव हार भी सकते है.रायबरेली में भी सोनिया गाँधी के लिए अगले चुनाव में जीतना आसान नहीं होगा.हो सकता है कि सोनिया गाँधी स्वास्थ्य कारणों से वँहा से चुनाव ही न लड़े.
UP Nagar Palika Election 2017 चुनावों के बाद भी विपक्ष का EVM मशीन हैक का पुराना राग अलापना जारी रहा.अब मायावती के साथ-साथ अखिलेश यादव भी इसमें शामिल हो गए है.अफ़सोस की बात है की यह दोनों नेता यह नहीं बता पा रहे है कि जनता ने दोनों को राज करने का पर्याप्त मौका दिया लेकिन इन्होने जनता को क्या दिया?ये दोनों नेता अपनी जाति से आगे बढ़ ही नहीं पाए.भ्रष्टाचार का कोई मौका दोनों ने नहीं छोड़ा फिर भी इन्हे लगता है कि जनता का इन पर आज भी उतना विशवास है जितना इन्हे सत्ता सौपते वक़्त थी.
भाजपा के लिए यह चुनाव काफी उत्साह जनक रहा है.इस चुनाव में जीत गुजरात चुनाव पर भी प्रभाव डालेगी.भाजपा के लिए यह चुनाव २०१९ के लिए भी उत्साह दिलाने वाला है.मायावती जी के लिए भी यह चुनाव कई अच्छे संकेत दे गया है.सपा के लिए यह चुनाव भी बुरे सपने की तरह रहा.अब मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को जल्द ही घरेलु झगड़े से किसी भी तरह निपटना होगा.सपा और अखिलेश यादव की २०१९ के चुनाव की सम्भावनाये अब इसी बात पर निर्भर है.
कांग्रेस के लिए UP Nagar Palika Election 2017 चुनाव एक और दुखस्वप्न रहा.इसने कांग्रेस की गुजरात चुनावों में कुछ अच्छा करने की संभावना पर भी असर डाल दिया है.अमेठी और रायबरेली की हार बड़ा सन्देश दे रही है.भाजपा निश्चित तौर पर ही इस हार का पूरा फायदा उठाएगी.
जय हिन्द

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