blogid : 4642 postid : 628651

चुनावी सर्वेक्षण या किसी पार्टी विशेष की हवा बनाने का फंडा

Posted On: 19 Oct, 2013 Others में

anuragJust another weblog

Anurag

70 Posts

60 Comments

desh_ka_mijaz-300x221हाल ही में एक न्यूज चैनल द्वारा किये गयें चुनावी सर्वेक्षण में यह कहा गया है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृतव में एनडीए सबसे बडे राजनैतिक दल के रूप में उभरेगा। सर्वेक्षण में बताया गया है कि यूपी और बिहार में भाजपा के पीएम इन वेटिंग नरेन्द्र मोदी का जादू चलेगा साथ ही भाजपा के लिए दिल्ली अभी दूर है इसके साथ ही सर्वेक्षण में कहा गया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए का कद घटेगा। सर्वक्षण के मुताबिक इस बार सत्ता की चाभी क्षेत्रीय दलो के हाथ में होगी। यानि साधारण शब्दों में कहा जाये ंतो इस रिपोर्ट का सार यही है कि इस बार दिल्ली की सत्ता कागे्रंस के हाथों से गयी।

हालाकि पिछलें दो तीन चुनावों में मीडिया सर्वेक्षणों के इतिहास को देखा जायें जो तस्वीर कुछ और ही नजर आती है। सबसें पहले बात करते है लोकसभा चुनाव 2009 की।
ये वो दौर था जब भाजपा के दिग्गज नेता लाल कृष्णा आडवाणी के नेतृत्व में पूरी भाजपा पार्टी दिल्ली की सत्ता पर आसीन होने के लिए बेताब थीं। उस दौरान आने वाले लगभग हर मीडिया सर्वेक्षण में यह बात कही जा रही थी कि काग्रेंस शासित यूपीए का ग्राफ गिर रहा है और सत्ता के शीर्ष तक पहुँचने की डगर काफी कठिन है। यह बात अलग है कि उस समय कोई भी मीडिया हाउस यह खुलकर नही बोल रहा था कि भाजपा सत्ता में आयेगी पर हर रिपोर्ट का निष्कर्ष लगभग में यही होता था कि भाजपा सतत में आ रही है। पर जब लोकसभा चुनाव 2009 के परिणाम आयें तो वह अप्रत्याशित थें। काग्रेंस शाािसत यूपीए दुगनी ताकत के साथ सत्ता में आया।
अब बात करतें है यूपी विधानसभा चुनाव 2012 की। लोकसभा चुनावों के लिहाज सें अत्यन्त महत्वपूर्ण इस विधान सभा चुनाव में जो चुनावी सर्वेक्षण परिणाम आ रहें थें उनमें सपा को लीडिंग दल के रूप में तो दिखाया जा रहा था पर साथ यह भी कहा जा रहा था कि यूपी विधानसभा चुनाव 2012 के परिणाम त्रिशुंक होगें किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नही मिलेगा। पर जब परिणाम तो सारें मीडिया सर्वेक्षण धरें के धरे रह गयें ओर सपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आयी। ऐसे तमाम चुनाव परिणाम है जहाँ मीडिया सर्वेक्षण की हर रिपोर्ट झूठी साबित हुयी। ऐसे में बेहद अहम सवाल यह खडा होता है कि आखिर ऐसे चुनावी सर्वेक्षण होते क्यों है ?
वास्तव में ऐसे सर्वेक्षण मीडिया टीआरपी के खेल को बढाने और एक दल विशेष को अनुग्रहित करनें का फंडा है। जहाँ सर्वक्षण रिर्पोट के माध्यम सें उस राजनैतिक दल को यह दिखाया जाता है कि हम आपके साथ है साथ ही यह भी अहसास कराया जाता है कि सबसें ज्यादा दर्शक सर्वेक्षण रिपोर्ट को ही देख रहें है परिणाम स्वरूप उस राजनैतिक दल सें चैनल को आपार धनलाभ प्रापत होता है।
लोकसभा चुनाव 2014 के लिहाज सें चैनलो के लिए आपार धन वर्षा करनें वाला राजनैतिक दल भाजपा ही है जो अपनें पीएम इन वेटिंग नरेंनद्र मोदी के नेतृत्व में र्वचुअल दुनिया व टेक्नालोजी के प्रभाव पर यकीन करनें लगा है। लिहाजा वह हर मीडिया हाउस पर अपने नेता के मार्फत आपार धन वर्षा कर रहा है परिणाम स्वरूप हर मीडिया हाउस मोदी और भाजपा की बढत लोकसभा चुनाव 2014 में दिखा रहा है।
आज यूपी में नरेंन्द्र मोदी की पहली विजय शंखनाद रैली है। इस रैली को जितना भाजपा और मोदी सफल नही बनायेंगे उससें ज्यादा मीडिया घरानें इसें सफल बनायेंगें। हर चैनल पर मोदी चालीसा का पाठ पूरी तल्लीनता के साथ किया जायेगा।
मोदी को दिखाना मीडिया वालो के लिए इसलिए भी जरूरी है क्योकि वर्चुवल दुनिया में मोदी एक ब्रंाड नेम है जिसके साथ असंख्य संख्या में युवा जुडा हुआ है। पर वास्तविकता के धरातल पर यह संख्या कितनी होगी यह तो लोकसभा चुनाव 2014 ही बतायेगा। वैसे भी चुनाव अनिश्चिताओं को खेल है जहाँ हर पल हवा का रूख बदलता रहता है।
जहाँ तक बात नरेंन्द्र मोदी की है तो फिलहाल उनके लिए अभी सिर्फ इतना ही कह सकता हूँ कि अभी तो हैं इम्तिहान बाकी कि आप रहबर हैं या राहजन हैं, जम्हूरियत का चिराग हैं या इसी सियासत के एक फन हैं।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग