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सबित हो गया बीजेपी के कथनी और करनी में अंतर है

Posted On: 29 Mar, 2014 Others में

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Anurag

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कोई हाथ भी न मिलायेगा जो गले मिलोगें तपाक से
ये नये मिजाज का शहर जरा फासले से मिला करो।
मशहूर शायर बशीर बद्र की ये लाइने मौजूदा दौर में बीजेपी पर बिलकुल सटीक बैठती है। लोकसभा चुनावों की गूंज और सत्ता की लालच में बीजेपी ने इन दिनो उनको गले लगा लिया है जिनसे न तो कभी बीजेपी का दिल मिला है और न ही उनका जिनको बीजेपी ने गले लगाया। लेकिन कहते है न कि सत्ता की लालच बडें से बडें विचारवान व्यकित या दल की विचारधारा को एक सिरे से कुठित कर देती है। कुछ ऐसी ही तस्वीर बीजेपी में बन रही है।
पार्टी विद डिफरेंस का नारा देने वाली बीजेपी और उसकें कार्यकर्ता हमेशा से ये दावा करते आये है कि बीजेपी पूर्ण रूप से लोकतांत्रिक पार्टी है और इस पार्टी में कभी भी व्यक्ति विशेष की आराधना नही की गयी है। स्वंय बीजेपी अध्यक्ष व लखनऊ संसदीय सीट से पार्टी प्रत्याशी राजनाथ सिंह ने पिछलें दिनों लखनऊ में आयोजित एक सवांददाता सम्मेलन में कहा था कि लोकसभा चुनाव से सम्बधित हर निर्णय सेन्ट्रल इलेक्शन कमेंटी, स्टेट इलेक्शन कमेटी की सिफारिशों पर करती है। उनके इस दावे की पोल तभी खुल गयी जब अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में राजनाथ ने लखनऊ के मौजूदा सासंद व पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल जी टंडन की हुकारी भराने की कोशिश की और टंडन ने बडी मुश्किल से हाँ में अपने सर का हिलाया।
कहने का तातपर्य यह कि बीजेपी में ये कैसा लोकतंत्र है जहाँ वरिष्ठो का दरकिनार कर तानाशाह की भांति उन लोगों कों जगह दी जा रही है जिनका न तो पार्टी से और न ही उसकी विचारधारा सें कोई लेना देना है। ऐसे मौकापरस्त लोग हमेंशा से ही ऐसे चुनावी महौल की प्रतीक्षा करतें आयें है जब वो अपने हिसाब से सौदेंबाजी करकें किसी भी दल में अपनी जगह बना ले ।
यहाँ जो सबसें गौर करने योग्य बात है वो यह कि बीजेपी और उसके नेता अच्छी तरीकें से ये जानते है कि मौजूदा समय में पार्टी में आने वाले ज्यादातर नेता मौकमापरस्त राजनीति के माहिर खिलाडी है औंर ये सब इसलिए बीजेपी आ रहें क्योंकि हो सकता हो आने वाले समय बीजेपी के माध्यम से ही इन्हें सत्ता की मलाई चाटने का आसीम मौाका हाथ लग जायें।
लेकिन इस तथ्य से अवगत होने के बाद भी बीजेपी निष्ठावान कार्यकर्ताओं और नेताओं की बलिवेदी पर इन मौकापरस्त नेताओं को पार्टी में शामिल कर रही है, जो बीजेपी के कथनी और करनी में अन्तर होने का सबसें बडा उदाहरण है।
बीजेपी और उसकें नेता कहतें है कि हमें सत्ता नही चाहिए बल्कि इस देश की जनता से देश की सेवा करने का एक मौका चाहिए। ये कैसी सेवा है भाई, जहाँ जिम्मेंदारी मिलने से पहले ही आपने देशद्रोही, भ्रष्टाचारी, और अपराधीयों का एक ऐसा नेटवर्क तैयार कर दिया है जो आपके सत्ता में आने के बाद, सेवा के रूप में इस हिन्दुस्तान में फिरकापरस्त ताकतो को मजबूती प्रदान करने का काम करेगा ।
अभी वक्त है सभल जाईयें और ऐसे लोगों को पार्टी से तुरंत बाहर निकालियें जिनके दामन पर जरा सा भी कोई दाग हों। आप स्वंय को इस देश का सबसे निष्ठावान देशभक्त कहतें है। इसलिए आपकी ये प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है कि आप ऐसे लोगों को सर उठाने से रोकें जिनका उद्देश्य सिंर्फ फिरकापरस्ती को मजबूत करना है।
एक बात और अगर 2014 के चुनाव के बाद कांग्रेस या कोई भी अन्य दल इस देश की सत्ता पर बैठता है तो ये उस दल की जीत न होकर आपकी नैकित हार होगी।
अनुराग मिश्र
स्वतंत्र पत्रकार
लखनऊ

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