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सलमान की सजा और बॉलीवुड की भूमिका

Posted On: 6 May, 2015 Others में

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Anurag

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salman_hitrun06सलमान खान के हिट एंड रन केस में बहु-प्रतीक्षित फैसला आ गया है। मुंबई की सेशन कोर्ट ने इस मामले में सलमान को दोषी मानते हुए उन्हें 5 साल की सजा सुनाई है। सलमान पर इस आये इस फैसले पर बॉलीवुड ने जमकर अपना दुःख व्यक्त किया है।

बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी भी कोर्ट के इस फैसले से काफी दुखी है। हेमा ने कहा कि मैं प्रार्थना करूंगी की उन्हें कम से कम सजा हो। वही भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार और बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने भी इस फैसले पर खेद जताया है। उन्होंने कहा कि सलमान यारों के यार हैं और मुझे ये खबर सुनकर बेहद अफसोस हो रहा है। मैं प्रार्थना करूंगा कि उन्हें कम से कम सजा मिले।

सलमान की फिल्म दबंग से अपना फिल्मी करियर शुरू करने वाली सोनाक्षी सिन्हा भी सलमान  को दोषी करार दिए जाने से बेहद निराश हैं। सोनाक्षी ने ट्वीट कर अपना दुखा जताया। उन्होंने ट्वीटर पर लिखा है कि ये बेहद दुख देने वाला फैसला है मैं हार हाल में सलमान के साथ हूं।

बॉलीवुड अभिनेत्री दिया मिर्जा ने ट्वीट किया है कि सलमान ने मेरी मां को जिंदगी दी थी मैं उनका एहसान कभी नहीं भूल सकती हूं। (यहाँ ये गौर करने योग्य बात है कि ये सभी ट्वीट सलमान की सजा की घोषणा से पहले आये है, यानि सलमान के दोषी घोषित होते ही बॉलीवुड में जमकर बेचैनी देखनी को मिली)।

हालाँकि इंसाफ से सजा के बीच अभी लम्बी दूरी है क्योकि ये तय है कि सेशन कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सलमान मुंबई हाई कोर्ट जायेंगे जहाँ सेशन कोर्ट के आदेश के खिलाफ उन्हें स्टेट ऑर्डर या फिर जमानत मिलने की पूरी-पूरी सम्भावना है और सिर्फ इतना ही नहीं सेशन कोर्ट की तरह यहाँ भी कम से कम 10  साल तक ये मुकदमा चलेगा और तब जाकर कहीं फैसला आयेगा।

अगर हाई कोर्ट के फैसले में भी सलमान दोषी साबित हुए तो वे सुप्रीम कोर्ट जायेगे जहाँ कम से कम 10  नहीं तो 5 साल तक तो मुकदमा चलेगा ही। यानि इन्साफ से सजा के बीच की दूरी लगभग 15 से 20 साल होगी। पर इन सबके बीच बॉलीवुड की भूमिका जरुर संदेह के घेरे में आ जाती है।

संदेह इस बात का कि सिल्वर स्क्रीन पर आम आदमी के हितों की बात करने वाल बॉलीवुड आखिर सलमान के मामले में चुप क्यों था? संवेदना के ये स्वर उस वक़्त क्यों नहीं फूटें जब सलमान की बेस-कीमती कार के नीचे आकर वो चंद आम आदमी काल का ग्रास बन बैठे जो रात की रोटी का इंतजाम दिन की मेहनत से करते थे ? क्या ये मान लिया जाये की बॉलीवुड की चिंता सिर्फ बॉलीवुड के सितारों तक होती है? या फिर ये माना जाये कि सलमान की डर से बॉलीवुड खामोश रहा? दोनी हो परिस्थतियों में विषय चिंताजनक जरुर है।

चिंताजनक इसलिए है क्योकि रील लाइफ का सिनेमा आज रियल लाइफ के सैकड़ों युवाओं की धड़कन है। आज एक-एक बॉलीवुड सितारे के लाखो-करोडो फैन्स है ऐसे में सितरों दवारा बोला या किया गया एक-एक कृत्य उन फलोवार्स के लिए पथ प्रदर्शक का काम करता है जो उनका अनुसरण करते है। ये माना जाता है कि सितारें अपनी रील से लेकर रियल लाइफ में जो कुछ भी करतें है युवा उनका अनुसरण अपनी लाइफ में करते है।

ऐसे में सलामन के हिट एंड रन जैसे महतवपूर्ण केस में बॉलीवुड का एक तरफ़ा रुख क्या समाज को गलत सन्देश नहीं देगा? क्या बॉलीवुड का ये रुख मानवीय संवेदना के दृष्टिकोण को क्षीण नहीं करता है?

बेहतर होगा की बॉलीवुड के सितारें खुद में आत्ममंथन करें और ये समझे की सार्वजानिक जीवन में व्यक्तिगत रिश्तों की बलि देनी होती है। रहा सवाल सलमान खान तो सलामन पे आया आज का फैसला हर दृष्टिकोण से न्याय सांगत है।

हालाँकि कुछ लोग इसे सलमान खान की प्रसिद्द से भी जोड़ है। उनका मानना है कि सलमान का प्रसिद्ध शख्सियत होना उनके लिए सजा का आधार बन गया है। उनका इशारा मीडिया ट्रायल की तरफ है जो काफी हद तक न्याय की मूल भावना को प्रभवित करता है और यह भी सत्य है कि अगर आज सलमान खान निर्दोष साबित होते तो जमकर अदालत के आदेश का विश्लेषण होता।

लेकिन सिर्फ मीडिया ट्रायल के आधार पर हम न्याय की उस मूल भावना को नजरअंदाज नहीं कर सकते जिसमे सम्मानित न्यापलिका साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर व्यक्ति को दोषी अथवा निर्दोष घोषित करती है। इसलिए सलमान की मिली सजा को मीडिया ट्रायल के परिणाम के रूप में देखना विधिसंगत नहीं होगा।

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