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अम्मा - महिला की शान

Posted On: 6 Dec, 2016 Others में

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rajanidurgesh

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jayalalithaa 1महिला शक्ति की पर्यायवाची थी अम्मा . इससे बड़ा सशक्तिकरण का उदहारण और कौन हो सकता है! आज एक महिला के मुख से यह कहना – देवी मारी अम्मा ! यह सुनकर वास्तव में जयललिता के पीछे उनका अथक परिश्रम ही था. बाल्याकाल से ही मेधावी जयललिता को अध्ययन में बहुत रूचि भी थी, वह कुशाग्र भी थी. वह वकील बनना चाहती थीं, लेकिन माँ की इच्छा को पूर्ण करने के लिए अपनी इच्छाओं को त्याग कर मात्र १५ वर्ष की उम्र में १९६१ में अभिनेत्री बनना स्वीकार करना उनका बहुत ही कठिन निर्णय था . पर वो एक आज्ञाकारी पुत्री की भूमिका निभाने में सफल हुईं. इतनी अल्पायु में इतना त्याग , इतनी जीजीविषा , धैर्य शायद ही अन्य बालिका में हो. यह बात अक्षरशः सत्य प्रतीत होती है -होनहार बिरवान के होत चिकने पात. यदि मानव में क्षमता हो तो कोई भी क्षेत्र हो उसकी प्रतिभा उभरती ही है. यह जयललिता ने प्रमाणित कर दिया था. अलप वयस में अपनी अभिनय से सबको विस्मित करती सर्वश्रेष्ठ अदाकारा बन गयीं.
अपने सहकलाकार एम् जी रामचंद्रन की चहेती होने कारण उनके आग्रह से राजनीति में आ गयीं. वे अपना गुरु मानाने के कारण राजनीति में प्रवेश कीं. अपनी अतुलनीय क्षमता से पग-पग पर आगे बढाती गयी. और अमिट छाप छोडती चली गयीं. जीवन उतार-चढ़ाव का ही नाम है. एम् जी रामचंद्रन के निधन से उनके जीवन में खालीपन आ गया. उत्तराधिकारी केलिए थोड़ी परेशानी तो हुई लेकिन पुनः अपनी प्रतिभा का परिचय दे कर ‘ए आई ए डी एम् के’ की उत्तराधिकारी के रूप में उभरकर आयीं. अपनी अद्भुत प्रतिभा से आगे बढ़ती ही चली गयीं. पक्ष -विपक्ष में तो मतभेद होता ही है लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए. डी एम् के सुप्रीम करुणा निधि ने मनभेद ही नहीं शत्रुता की पराकाष्ठा पर utar आये थे. शायद महाभारत का अध्ययन उन्होंने आवश्यकता से अधिक किया था. तमिलनाडु को अपना जागीर ही समझ लिए. डी एम् के की सर्कार थी. विपक्ष में थी जयललिता , उनके दत्तक पुत्र का विवाह था . साधारण जन भी अपनी क्षमता से अधिक खर्च करता है. वह तो एक हस्ती थी. यह विवाह ही उनके विपक्ष को अवसर दे दिया . उनके घर में छापा पड़ा. और सोना-चाँदी, कपडे ,चप्पलें पता नहीं क्या-क्या , आवश्यकता से अधिक मिला . इस कारण उन्हें अपमानित भी किया गया . कहा जाता है बदतमीजी के कारण उनकी साडी भी फट गयी थी. उन्होंने भाव-विह्वल हो कर मीडिया से कहा था ki करूणानिधि को पराजित कर के ही मैं पूर्ण बहुमत से अंदर आऊँगी. और उनका यह प्रण सफल हुआ. विपक्षी ये भूल गए थे ki वो एक अभिनेत्री भी थी, इसलिए धन होना स्वाभाविक ही था. लेकिन अपमानित करना यहाँ तक जेल भी जाना पड़ा लेकिन दृढ निश्चयी नेता जयललिता अपनी भीष्म प्रतिज्ञा को पूर्ण की. और पुनः सम्मान के साथ सत्ता प्राप्त कीं. महिला सशक्तिकरण का इससे बड़ा मिसाल और क्या होगा. सहनशीलता में सीता के समकक्ष ही थीं.
Jayalalithaa. उन्होंने क्रेडल बेबी स्किम की सुरुआत की जिससे राज्य में लिंगानुपात में सुधार हुआ. उन्होंने तमिलनाडु में साल्ट कारपोरेशन के जरिये सस्ता नमक उपलब्ध कराया जिसकी प्रसिद्धि अम्मा नमक से हुई. करीब डेढ़ दशक पहले चेन्नई में पानी की समस्या से लोग जूझ रहे थे, उसी समय अम्मा के सरकार ने सभी के लिए वर्षा जल संचयन अनिवार्य बने फलतः इससे न सिर्फ चेन्नई बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी भूमिगत जल का स्तर बढ़ गया. अम्मा साधारण जनों में उपहारों से जनता को सदा लाभान्वित कराती थीं. साइकिल हो , या लैपटॉप हो या घरेलु ने उपकरण. यदि वे चुनाव के समय वोटरों को कुछ आश्वासन देती थी तो उसे पूर्ण जरूर करती थी. उनके इस परोपकारी भावना के कारण उनके प्रशंसक या वहां की जनता उन्हें भगवन सदृश मानते थे. उनके प्रति अपर श्रद्धा रखते थे. वह भी अपने राज्य की हर नागरिक को संतान सदृश स्नेह देती थी. जन जन की अम्मा थी वह. जनप्रिय थी . तमिलनाडु आज उनके नहीं रहने से बिलख रहा है. जनसमूह के दर्द को देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे उनकी खुद की माँ हो. वह गरीबों की मसीहा थी. वह हर महिला की मार्गदर्शिका थीं. सशक्त थीं . राजनीति में अपना कोई नहीं होने के बाद भी इतना ऊपर पहुँचाना आश्रय ही है. तमिलनाडु की सबसे काम उम्र की मुख्य मंत्री थीं. हम सब महिला केलिए गर्व की बात है . ऐसी महिला अब दूसरी नहीं हो सकती. हर महिला की वह मेंटर थीं. उनका सम्पूर्ण जीवन संघर्षपूर्ण ही था. दृढ़निश्चयी ऐसी थीं की दत्तक पुत्र की शादी में आभूषण को लेकर आलोचना के कारण आभूषण पहनना ही छोड़ डी थीं.
आज जयललिता हम सब के बीच नहीं रहीं. लेकिन अपने पीछे उत्कृष्ट सोच छोड़ गयीं हैं. उनकी तरह ममतामयी शांतिप्रिय संघर्षमयी , दृढ़निश्चयी , उदारहृदया, परोपकारिणी अन्य महिला हो ही नहीं सकती . हर महिला की प्रेरणाश्रोत थीं. वह मात्र शरीर का ही त्याग की हैं. लेकिन उनकी आत्मा भारत में सदा रहेगा. उनकी कीर्ति-पताका यशोगान जब तक ये धरा है , रहेगी ही. हर भारतीय विशेष कर तमिलनाडु के हर जनता के ह्रदय में सदा जीवित रहेंगी, अमर रहेंगी.

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