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मानवीयता का ह्रास

Posted On: 8 Oct, 2015 Others में

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rajanidurgesh

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हत्या तो हत्या ही है . गुनाह तो है ही भले मनुष्य की हत्या हो या किसी और जीव की . लेकिन पृथ्वी मनुष्य शासित होने के कारण मनुष्य सर्वोपरि है. शासक मनुष्य है, शासन मनुष्य करता है तो कानून भी मनुष्य के अपने हिसाब से बनाया हुआ है और वस्तुतः शासक अपने हित की रक्षा करते हुए ही कानून भी बनाता है.
फिर भी कुछ जंतु ऐसा है जिस पर श्रद्धा का छाप लगा हुआ है और कुछ जंतु ऐसे भी हैं जिनके लुप्त होने का भय है तो उसे भी विशेष दर्जा प्राप्त है.
भारत कुछ ऐसा है कि यहाँ दिन दहाड़े महिलाओं का अपमान हो जाये, राहगीरों को कोई फर्क नहीं पड़ता , मनुष्य की हत्या हो जाये तो लोग नहीं भड़कते , क्योंकि वह महिला या मनुष्य किसी से जुड़ा होता है. न वे राष्ट्रीय जंतु हैं, न विलुप्त होते हुए जंतु, न किसी वर्ग विशेष से, न किसी धर्म का. एक महिला किसी एक की माँ हो सकती है, किसी एक की बहन , मनुष्य किसी का पिता हो सकता है. लेकिन अगर वह मनुष्य कड़ोरों का बाप या माँ हो तो भी ख़ास फर्क शायद नहीं पड़ता है.

राजनीति की बात अलग , इसकी गुत्थी तो बड़े -बड़े लोग नहीं सुलझा सकते. अपनी रोटी सेंकने हेतु मनुष्य और जानवर में उन्हें खास फर्क नहीं दीखता है. जरूरत पड़ने पर मनुष्य या जानवर सभी की हत्या भी कर सकते हैं और जरूरत के हिसाब से दोनों का पालन भी.
सर्दियों में मनुष्य को ठण्ड से कांपते देख उनका मन नहीं तड़पता पर सार्वजनिक सभाओं में उन्हें कम्बल बांटते हुए तस्वीर अख़बारों में निकलवाना हो तो लाखों ख़र्च कर सकते हैं. पुनः कोई कोई तो वही बांटी हुयी कम्बल अपने गुर्गों के द्वारा आधे पैसों में उनसे खरीद कर दूसरा आयोजन में प्रयोग कर लेते हैं, ठीक उसी तरह जैसे मंदिरों के आगे बैठे फूलवाला, पुजारी से फूल खरीद कर पुनः-पुनः उपयोग के लिए बेचते रहते हैं. यूज़, री-यूज़ एंड रीसायकल का सही उपयोग.

अभी दादरी काण्ड से संपूर्ण देश में हलचल मची हुई है , बवाल मचा है ,नेता लोग सियासत कर रहे हैं .सब अपनी अपनी रोटी सेकने में लगे हुए हैं. हम सब एक हैं ,फिर यह हल्ला गुल्ला क्यों ? एक पुजारी की घोषणा से जबकि उसका कहना है कि जबर्दस्ती उससे घोषणा करवाई गयी है .सच्चाई तो ईश्वर को ही ज्ञात होगा !
एख़लाक़ नाम का आदमी बछड़ा को काटकर खा गया .इतना सुनना था कि लोग बिना तथ्य जाने उसके घर गए और पीटपीट कर जान ले ली .साथ में उसके छोटे बेटे की भी पिटाई की जिससे ,सर पर चोट लगने की कारण उसकी स्मरण शक्ति लुप्त हो रही है .ऐसी बर्बरता ,इतना बड़ा अन्याय ! इख़लाक़ का बड़ा बेटा इंडियन एयर फ़ोर्स में कार्यरत है .उससे जब पूछा गया तो वह कहा -दुर्भाग्यपूर्ण है , सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा .परिवार में इतनी बड़ी हादसा होने की बाद भी उत्कृष्ट मानसिकता हैं ,कितना संस्कारवान है वह .
सियासी दौर शुरू है ,नेता लोग को कुछ मसाला मिलनी चाहिए .सब जुट गए अपना अपना ज्ञान बाँटने ,अपनी रोटी सेकने .राहुल गांधी ,केजरीवाल , संगीत सोम (जिनका नाम मुज़फ्फरनगर दंगे में है ) , ओवेसी ,महेश शर्मा इत्यादि गणमान्य नेता सब पहुंचे .पहुंचना तो सही ही है ,देश में इतनी बड़ी बात हो गयी ,विपदा हो गयी है ,इतनी बड़ी घटना हो गयी .आना तो लाजमी है .विडंबना तो यह है कि इन नेताओं की आने के कारण वहाँ सड़के बनी ,नेताओं को प्रसन्न करने के लिए या यह दिखाने के लिए कि हमारे यहाँ की सड़कें टूटी फूटी नहीं ,सही है ,यह शान बढ़ाने के लिए .कैसी विडंबना है यह .पुनः मानवता हार गयी .
इस हत्या से पुनः गौ हत्या प्रकाश में आ गया ,भूली बिसरी बातें हो गयी थी ,ध्यान से हट गया था .फेस बुक पर कुछ लोगों की चाहत भी दिखी की गाय को राष्ट्र पशु घोषित कर दिया जाय.किसी ने विरोध भी नहीं किया था कि यह विभत्स घटना पुनः दिशा ही परिवर्तित कर दी .कुछ कट्टरपंथी या पूर्वाग्रह पीड़ित ने दिशा ही मोड़ दी .पुनः स्थिति भीषण कगार पर है .बिना कारण निरपराध को सजा मिल गयी .हर प्राणी अनमोल है ,पशु पक्षी का जीवन भी मूल्यवान है .एक दूसरे के बिना एक पग नहीं चल सकते .प्रकृति पुरुष की तरह अन्योन्याश्रय सम्बन्ध है .यदि बछड़े की हत्या हुई है ,तो यह घोर अपराध है . जिस मानव की हत्या हुई है ,वह परिवार का मुखिया था .सदस्य परिवार के उसी पर आश्रित थे .उसकी मौत ने परिवार का निवाला छीन गया ,छोटे बेटे की स्मृति लुप्त हो रही है क्या होगा उस निर्दोष बालक का ,पिता की साया से भी वंचित हो गया .कितनी दयनीय स्थिति हो गयी है परिवार की .उस परिवार का दर्द बांटने के बदले कुछ लोगों को धर्म की पड़ी है .सांत्वना देने के बदले सियासी की गन्दी राजनीति कर रहे हैं ,दांव खेल रहे हैं .हिन्दू मुस्लिम के फालतू मुद्दे उठाकर बाँटने का प्रयत्न कर रहे हैं .किस ओर जा रहा है हमारा समाज और हम .पुजारी की बातों को बिना परखे इतनी विभत्स घटना का रूप दे दिया .पशु की हत्या के शक में मानव की हत्या .हम सभी भाई भाई हैं ,इसको भूल गए .
एक परिवार में दो बच्चे हम उम्र थे . दोनों की माँ सगी बहनें थीं. एक बच्चा दूसरे से कहता था हम तुम्हारा नाक ले लिए बस दूसरा नाक नहीं टटोलता था रोना चिल्लाना आरम्भ कर देता था. मेरा नाक लेलिया ,कान लेलिया हम कैसे सांस लेंगे कैसे सुनेंगे यह उसकी चिंता की विषय हो जाता था. खैर वे तो बच्चे थे.
वही बात बछड़ा को मारा की नहीं, बिना जाँचे परखे इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे दिया गया. इतनी बड़ी साजिस रच दी गयी. एक मानव को सदा सर्वदा के लिए सुला दिया गया. कानून को ठेंगा दिखा दिया गया. वह न्यायधीश बन गया. औय मृत्युदंड सुना दिया, जल्लाद भी बन गया और मृत्युदंड भी दे दिया.
हमारे प्रधान मंत्री सदा की तरह मौन हैं. व्यापम घोटाले, ललित मोदी कांड, घर वापसी या यह दादरी की दुखद घटना . सदा की तरह मौन. प्रधान मंत्री हैं देश विदेश में बड़ी बड़ी बातें करेंगे इन छोटी – छोटी बातों के लिए या तो उनके पास समय नहीं है या इन छोटी बातों के लिए उनके पास महेश शर्मा हैं, संबित पत्र हैं और भी बहुत लोग हैं . वे तो बोल ही रहें हैं. हाँ साक्षी महाराज से लेकर साध्वीजी तक सब तो बोल ही रहे हैं. साथ-साथ आजम भी बोले, लालू भी बोले और मिडिया तो बोल ही रहा है. ट्विटर बोला, फेसबुक बोला और कितने लोग बोलेंगे?
जो हो गया सो हो गया , उसे लौटाया नहीं जा सकता . सभी भारत वासियों से आग्रह करती हूँ – कृपा करके इसे सियासी चाल के रूप में प्रयोग न करें. क्योंकि ऐसा करने से गलत करने वाले का उत्साह ही बढ़ेगा और जनता दुखी होती रहेगी. उस परिवार के दुःख में ,संकट के घडी में साथ खड़े हों न कि अनर्गल प्रलाप कर उनके दुःख को और बढ़ाएं. उनके दुःख को अनुभव करें . उस परिवार के और सदस्य भी हैं जिनसे शिक्षा लें. वे विवेकशील हैं. पिता की हत्या एवं भाई की स्मरण शक्ति विलुप्त होते देख कर भी , परिवार की त्रासदी का अनुभव होने पर भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण कहकर नारा लगता है – ” सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा”. देशभक्ति है उनमे. उस परिवार को नमन जिसने ऐसा पुत्र दिया देश को. आईये हम शपथ लें कि उस परिवार का साथ देंगे. साथ ही प्रण लें की ईश्वर न करे ऐसी घटना पुनः घटित हो. यदि दुर्भाग्य वश ऐसा होता है तो हम सब भाई-भाई की तरह साथ -साथ खड़े रहें. हिन्दू-मुस्लिम का प्रपंच न करें.
सभी को ध्यान देना चाहिए की हम ऐसा कोई कदम न लें जिससे किसी दूसरे के भावनाओं को ठेस पहुँचती हो. गाय को जहाँ माता माना जाता है और बहुतायत लोगों का विश्वास ऐसा है तो वहाँ गौ वध अच्छा नहीं है. इसी तरह सूअर को जहाँ अच्छा नहीं माना जाता हो वहाँ सूअर का प्रकोप न हो. बहुत कठिन नहीं है. मिल-जुल कर रहने केलिए इतना तो सभी कर सकते हैं.
अगर देश की रक्षा करनी है और सदभाव कायम रखना है तो थोड़ी बहुत दिक्कतों को नज़र अंदाज करना सभी केलिए नामुमकिन तो नहीं होगा.

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