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राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कुख्याति

Posted On: 31 Dec, 2016 Others में

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rajanidurgesh

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Balatkarकुछ दिन पूर्व राजस्थान में बलात्कार ,कनाट प्लेस में विदेशी सैलानी के संग सामूहिक बलात्कार ,बुलंद शहर , बरेली, मध्यप्रदेश,बिहार , यू .पी .और तो और राजधानी दिल्ली ने भी बलात्कार के मामले में कुख्याति अर्जित की है. क्या यही है महिला सुरक्षा? यही है सरकार की खोखली दावा? नारी को मृत्यु सदृश पीड़ा क्यों भोगनी पड़ती है. प्रतिदिन अख़बार में खबर रहती है कि अमुक स्थान पर अमुक महिला बलात्कार की शिकार हुईं. कुछ तो काल कवलित हो जाती हैं, कुछ मर्मान्तक पीड़ा झेलती रही हैं ,कुछ जीवित लाश बन कर रह रही हैं. नारी कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं. घर हो ,कार्यालय हो, गली-मोहल्ला हो या आस-पड़ोस कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं. इसके चपेट में शहरी हो या ग्रामीण सभी महिला आ जाती हैं. न सत्तर साल की उम्र न दो महीने की बच्ची , अर्थात हर वयस की नारी असुरक्षित हैं.
क्या यही भारत है? जहाँ नारी पूजित होती थी – यत्र नार्यस्तु पूज्यंते , रमन्ते तत्र देवता !!!? जहाँ नारी का मान होता है वहां देवता रहते है. तब तो शायद भारत से देवता पलायन कर चुके होंगे. इसलिए पहले की तरह नारी की नर से अधिक सम्मान नहीं मिलता. इसीलिए ही नारी को पूजा भाव और सम्पूर्ण सम्मान नहीं प्रदान किया जाता है.
क्या यहीं (भारत) पुरुष से पहले नारी का नाम लेने की परंपरा थी? हर परम-पुरुष के साथ एक नारी की भी सम्मान माता या देवी के रूप में होता था. शंकर से पहले पार्वती, राम से पहले सीता, कृष्ण से पहले राधा का उल्लेख होता था.इतिहास इस बात का साक्षी है कि नारी भी हर तरह के त्याग और बलिदान के मार्ग पर चलकर अपने आदर्श रूप और अपने प्रति अपनाये गए पूजा – भाव की रक्षा कीं, क्या इसी दिन के लिए? कोई भी क्षेत्र हो नारी हर क्षेत्र में अपने कुशाग्र बुद्धि का परिचय दे कर हर प्रकार से घर ,परिवार,समाज तथा देश की सेवा में अपने अथक परिश्रम से योगदान दिया है. क्या इसी दिन के लिए कि कोई भी दुराचारी मानव असमय मृत्यु सदृश जीवन दे. उसके त्याग-तपस्या का यही प्रतिफल है कि वह कहीं भी सुरक्षित न रहे? हर पल उसे भय के साये में जीना है? कभी दहेज़ के लिए प्रताड़ित होना तो नर-पिशाचों के हवस का शिकार होना और कभी-कभी तीन-तलाकों द्वारा अवहेलित होना उसकी नियति है?
यौन-कुण्ठा से ग्रसित हो चूका है देश . २०१२ में निर्भया कांड में जो बर्बरता हुई तथा दण्ड व्यवस्था में खामियों के कारण दोषियों को सजा देने में जो बिलम्ब हुआ एवं तथाकथित विकृत मानसिकता वालों के समर्थन के कारण देश बलात्कारियों के देश के रूप में बदनाम हो चुका है.
देश भर के कोने-कोने की महिलाएं ही नहीं वरन विदेशी सैलानी महिलाएँ भारत में असुरक्षित हैं. देश की राजधानी दिल्ली में ही नाबालिगों से बलात्कार के ४५० मामले दर्ज हुए हैं. बुलंद शहर और बरेली की गैंग रेप ने सम्पूर्ण देश को झकझोर दिया. कनाट प्लेस में सैलानियों के साथ हुए दुष्कर्म ने अंतर्राष्ट्रीय कुख्याति उत्पन्न कर दी है. २०१२ में देश भर में लोग बलात्कारियों के लिए विविध प्रकार की सजा मुकर्रर करने की मांग करते हुए देखे गए. लेकिन २०१६ आते-आते लोग शिथिल होते गए और बलात्कारी प्रबल होते गए. यहाँ तक की शिक्षा की मंदिरों में भी बच्चियां असुरक्षित हो गयी. जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण ‘बुलढाणा ‘ के खामगांव स्थित निनाधि आश्रम स्कूल में १२ नाबालिग आदिवासी बालाओं से बलात्कार का है.
मात्र यू.पी. में इस साल दुष्कर्म के ९००० मामले दर्ज हो चुके है. आंकड़े तो इससे अधिक भी हो सकती है, क्योंकि बहुत सारा मामला तो उल्लेखित ही नहीं होती, भय के कारण लोग चुप रहना ही श्रेयस्कर मानते हैं.
क्या यही नारी सुरक्षा सरकार का नारा है? नारी कब सुरक्षित होगी? कब सम्मान मिलेगा? मात्र दहेज़ या बलात्कार का ही मामला नहीं है. नारी पर ही कमेंट करना,उसका मजाक बनाना , समाज के हर वर्ग चटखारे ले ले कर महिला की स्थितियों पर मजा लेना क्या नारी के सम्मान में गिरावट नहीं है? नारी गृहणी हो , वर्किंग हो या राजनेता हो , सभी का उपहास बनाया जाता है. सबसे बड़ी विडम्बना तो यह है कि नारी के चरित्र पर भी लांछन लगाया जाता है. विशेष कर राजनीति में जो महिलाये हैं उनका सबसे अधिक चारित्रिक हनन किया जाता है. किसी भी नेता के साथ चारित्रिक मजाक उड़ाना अत्यन्त ही लज्जाजनक है लेकिन लोग इसे गलत नहीं मानते बल्कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहते हैं. ऐसे लोग यह भी भूल जाते हैं कि उनकी माँ-बहन भी नारी ही हैं. ऐसे लोगों पर क्या कोई आपराधिक कारवाई नहीं होनी चाहिए? महिला का अपमान करना घृणास्पद , है निन्दनीय है.
सभी यह कहते थे कि महिलाओं को शिक्षित करोगे तो वह सक्षम होगी और अपराध कम होगा ! आज तो अनपढ़ क्या पढ़ीलिखी महिलाये सभी अपराध की शिकार हो रही हैं. शिक्षा और संस्कार दोनों अलग-अलग है. संस्कारविहीन लोग ही अपराध करते है और वे शिक्षित-अशिक्षित में भेद नहीं कर पाते है. शिक्षित और अशिक्षित दोनों तरह के लोग अपराधी होते हैं और शिक्षित तथा अशिक्षित दोनों तरह कि महिलाये पीड़ित भी होती हैं. अतः मेरा मानना है कि देश को अगर इस कुख्याति से बचाना है तो शिक्षा के साथ-साथ संस्कार का बीजारोपण भी हर नागरिक को प्रदान करने की व्यवस्था अनिवार्य हो .

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