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नगर स्‍तरीय सार्वजनिक यातायात व्‍यवस्‍था चुस्‍त दुरस्‍त हो ।

Posted On: 8 Dec, 2015 Others में

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rajeevsaxena21

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नगर स्‍तरीय सार्वजनिक यातायात व्‍यवस्‍था चुस्‍त दुरस्‍त हो।

आजकल शहरों में वायु प्रदूषण एक अहम समस्‍या उभर कर सामने आ रही है । वायु प्रदूषण जहॉं कल कारखानों से उत्‍सर्जित हो रहा है वहीं यातायात से भी अधिक मात्रा में हो रहा है । हमारे देश में कोई सार्वजनिक यातायात व्‍यवस्‍था प्रभावी रूप से मान्‍यता प्राप्‍त नहीं हो पाई है और जबकि विशेष रूप से नगरों की आंतरिक यातायात व्‍यवस्‍था की बात की जाए तो स्थिति और ज्‍यादा भयावाह हो जाती है ।

जहॉ तक नगरों की बात है तो बड़े शहरों में तो यातायात में दम घुटने लगा है इतना अधिक प्रदूषण हो गया है कि आम आदमी का जीवन त्रस्‍त हो गया है । यही कारण है कि हमारा वायुमंडल गर्म हो रहा है और ऋतुऍं परिवर्तनशील हो रही है । कभी भी वर्षा हो जाती है, कभी भी चटटानें खिसक जाती हैं तो कभी सूखा पड़ जाता है । अभी हाल ही में चैन्‍नई में अपार वर्षा ने मानव जीवन को भंग कर दिया । जिधर देखों उधर पानी ही पानी नजर आने लगा । चारों तरफ बाढ़ जैसी स्थिति हो गई । निश्चित ही यह खतरे की घंटी है । अगर समय रहते मानव ने इसका उपचार नहीं किया तो आने वाले दिनों में स्‍वच्‍छ वायु शोकेस की वस्‍तु बनकर रह जाएगी ।

इस समस्‍या से निपटने के लिए हम सभी को अपने अपने स्‍तर पर कुछ कारगर उपाय अवश्‍य ही करने होंगे तभी हम अच्‍छे कल की ओर अग्रसर हो सकेंगे तथा आने वाली पीढि़यों के लिए अच्‍छा भविष्‍य  दे सकेंगे । आइए हम विचारते हैं कि हम क्‍या कर सकते हैं :-

–        निजी वाहनों को अवकाश वाले दिन न चलाऍं । अगर आवश्‍यक हो तो सार्वजनिक वाहनों का ही उपयोग करें या पैदल चल कर कार्य करें जिससे आपका स्‍वास्‍थ्‍य ही अच्‍छा हो सकेगा तथा धन की बचेगा ।

–        मुख्‍य मार्गों को काफी चौड़ा किया जाए तथा मार्गों पर अतिक्रमण न किया जाए इस ओर विशेष ध्‍यान दिया जाए । प्राय: यह देखा गया है कि कुछ असामाजिक तत्‍व सड़कों के किनारे दुकानें, मकान तथा वाहनों खड़ा करके अतिक्रमण करते हैं । ऐसा करने से वाहनवाहकों को उचित जगह नहीं मिल पाती और दुर्घटनाऍं होने की संभावना ज्‍यादा बढ़ जाती है तथा यातायात प्रभावित होता है ।यातायात विभाग में सड़क निगरानी विभाग की स्‍थापना की जाए तथा समय समय पर नगर की प्रत्‍येक सड़क की निगरानी रखी जाए तथा उसे अतिक्रमणरहित रखा जाए ।

–        नगर निगमों व निजी सेक्‍टरों को सार्वजनिक यातायात प्रणाली को और असरदार बनाना होगा । नगर में मुख्‍य मुख्‍य स्‍थलों पर आने जाने के लिए बड़े बड़े यातायात वाहनों का आना जाना सुनिश्चित किया जाए तथा कार्यालयों व अन्‍य व्‍यवसाय स्‍थलों पर आने जाने के लिए समुचित मात्रा में वाहनों को सुनिश्चित किया जाए ताकि कर्मचारियों को कोई परेशानी न हो और इनका किराया भी कम रखा जाए। कर्मचारी यातायात के लिनए इन सार्वजनिक वाहनों का ही प्रयोग करें  ताकि निजी वाहन सड़कों पर ज्‍यादा संख्‍या में न निकलें और मार्गों पर वाहनों की भरमार न हो ।

–        नगर के मुख्‍य मुख्‍य मार्गों के दोनों तरफ एवं बीच डिवाइडरों पर हरे भरे पेड़ लगाकर सौंदर्यीकरण किया जाए इससे न केवल नगर की शोभा बढ़ेगी बल्कि वायु प्रदूषण को भी सीमित किया जा सकेगा तथा पथिकों को छाया भी मिलेगी । यह कार्य एक जन आंदोलन के रुप में किया जाए तथा लोगों को और अधिक जागरुक किया जाए ।

–        यातायात के क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाऍं हैं । नगर निगम अपने स्‍तर पर बसों की संख्‍या बढ़ाए एवं निजी सेक्‍टरों को भी इस ओर अनेक सुविधाऍं देकर उनका भी साथ ले सकते हैं। अगर सार्वजनिक यातायात व्‍यवस्‍था प्रभावी होगी तो निश्चित रुप से कुछ स्‍तर तक प्रदूषण को रोका जा सकता है तथा स्‍थानीय लोगों को भी रोजगार के असीम अवसर मिलेंगे ।

–        राज्‍य सरकारें इस ओर विशेष ध्‍यान देकर प्रदूषण को कम कर सकती हैं । एक प्रभावी नगर स्‍तरीय यातायात नीति बनाई जाए और नगर जनों को अधिक से अधिक सार्वजनिक यातायात व्‍यवस्‍था का ही प्रयोग करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाए । इससे व्‍यक्तिगत खर्च कम होगा और आमजन की क्रय शक्ति में वृद्धि होगी ।

आपको यह जानकर अत्‍यधिक ताज्‍जुब होगा कि विश्‍व के सबसे ज्‍यादा प्रदूषण करने वाले शहरों नई दिल्‍ली का नाम भी शामिल है । यही कारण है कि वहॉं की सरकार ने एक आम यातायात नीति बना कर उसे प्रभावी कर दिया है और सम व विषम नंबर वाले वाहनों के लिए दिन निश्चित किया गया है । परिणाम तो बाद में आएगा लेकिन एक बात स्‍पष्‍ट हैं कि अगर सरकार व जनता अभी नहीं चेती तो भविष्‍य में इसके परिणाम काफी घातक होंगे । आइए, हम सभी अपने अपने स्‍तर पर यातायात प्रदूषण को कम करने का प्रयास करें और जहॉं तक हो सके सार्वजनिक यातायात व्‍यवस्‍था का ही प्रयोग करें । साथ ही छुटटी वाले दिन निजी वाहनों का उपयोग न करें (केवल आकस्मिक स्थिति को छोड़कर)  आशा ही नहीं पूर्ण विश्‍वास है कि जब कोई अच्‍छा संकल्‍प किया जाए तो उसका परिणाम भी सदैव अच्‍छा ही होता है । हम सब बिना किसी भेदभाव एवं निज हित के एक मान्‍यताप्राप्‍त अच्‍छी नगरीय यातायात व्‍यवस्‍था का सूत्रपात कर पर्यावरण प्रदूषण से मुक्ति पा सकते हैं ।

–        राजीव सक्‍सेना

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