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सपनों में रिश्ते बुनते देखा

Posted On: 12 Oct, 2014 Others में

स्वयं शून्यUnspoken Words-The Way I Feel

राजीव उपाध्याय

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सपनों में रिश्ते बुनते देखा

जब आँख खुली तो

कुछ ना था;

आँखों को हाथों से

मलकर देखा

कुछ ना दिखा;

ख़्वाब था शायद ख़्वाब ही होगा।

सपनों में रिश्ते बुनते देखा॥

जब ना यकीं

हुआ आँखों को

धाव कुरेदा

ख़ूँ बहा कर देखा;

बहते ख़ूँ से

दिल पर

मरहम लगा कर देखा;

धाव था शायद धाव ही होगा।

सपनों में रिश्ते बुनते देखा
© राजीव उपाध्याय

स्वयं शून्य

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