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गर्मी

Posted On: 6 May, 2016 Others में

मेरी आवाज़ सुनोभारत माता के चरणों में समर्पित मेरी रचनाएँ

Rajesh Kumar Srivastav

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फागुन समाप्त ,
बढ़ने लगा ताप /
बौराने लगा सूरज /
बरसाने लगा आग का गोला /
चैत्र का प्रारम्भ /
तपने लगी धरती /
सूखने लगे जलाशय –
खोने लगा हरियाली /
बैसाख की शुरुआत /
ना घर में चैन ,
ना बाहर आराम /
झुलसने लगे चमड़े /
माह का मध्य /
लु के थपेड़े /
लेने लगे जान /
सब होने लगे परेशान /
ज्येष्ठ का आगाज़ /
बादल का कही नहीं नामो-निसान /
कही अगलगी , कही दावानल /
प्रकृति का कहर ,
ना जाने ले जाएगा-
किस डगर ?

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