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दूरियाँ

Posted On: 26 Apr, 2017 Others में

मेरी आवाज़ सुनोभारत माता के चरणों में समर्पित मेरी रचनाएँ

Rajesh Kumar Srivastav

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चलो दूरियां कुछ सिमटा लेते है /
एक दूजे को फिर अपना लेते है /
क्या ठीक, ये जिंदगी रहे ना रहे /
रिश्तों की गर्माहट बढ़ा लेते है /
ना तुम याद रखो, मै भूल जाऊ /
सारे गीले -सिकवे मिटा लेते है /
तुम मैं, और मैं तुम बन जाऊं /
रिश्तों को नया अंजाम देते है /
दूरियां बढ़ ना पाए फिर कभी /
इस बात का हरदम ध्यान देते है /

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