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प्रेम की परिभाषा

Posted On: 29 Sep, 2015 Others में

मेरी आवाज़ सुनोभारत माता के चरणों में समर्पित मेरी रचनाएँ

Rajesh Kumar Srivastav

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उसने
मेरे शब्दकोष के –
प्रेम की परिभाषा को –
बदल दिया /
सच कहुँ,
उसकी नई परिभाषा ने –
मुझ जैसे “पप्पू” को-
आधुनिक “रोमियो” –
बना दिया /
उसे अपनाना ,
गले से लगाना,
उसके जरुरतो और –
शौक पूर्ति के लिए –
खून पसीने बहाना /
सोते -जागते ,
उसी को याद करना /
चेहरा याद आते –
खुशियों से भर जाना /
उसके दुःख से दुखी /
उसके ख़ुशी से खुश /
अपनी पहचान खोकर ,
उसके रंगों में रंग जाना /
बकवास लगते थे उसे /
इसलिए उसने –
शब्दों को बदला /
पंक्तियों को छोटा किया /
और लिख दिया –
किसी को-
अपना बनाने के लिए –
“अपनो” को भूल जाना –
यही प्रेम है /
आधुनिक प्रेम है /
008

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