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मेरे दो अनमोल रत्न

Posted On: 1 May, 2015 Others में

मेरी आवाज़ सुनोभारत माता के चरणों में समर्पित मेरी रचनाएँ

Rajesh Kumar Srivastav

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कई महीनो से मंच पर सक्रीय नहीं रहने के लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ / आशा है आप मेरी मज़बूरी को समझियेगा और फिर मुझे पहले जैसा ही प्यार मिलता रहेगा /
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मेरे घर में जुड़वा बच्चों के किलकारियाँ सुनने का इंतजार समाप्त होने वाला था / हालाँकि नियमानुसार मेरे घर नए मेहमानो का आगमन मई महीने के प्रथम सप्ताह में होने वाला था लेकिन डॉक्टर ने मुझे समय से पहले ही तैयार रहने को कहा था क्योंकि मेरी पत्नी अपने गर्भ में दो-दो बच्चो को पाल रही थी / अधिकतर जुड़वा बच्चे समय से पहले पैदा हो जाते है / एक तो दो-दो बच्चे गर्भ में पालने से श्रीमती जी को साधारण से कही ज्यादा कष्ट सहना पड रहा था ऊपर से समय से पहले बच्चे पैदा होने पर होने वाले जटिलताओं की जानकारियां पाकर मैं तनाव में रह रहा था / परिवार और डॉक्टर के सलाह के अलावा मैं इंटरनेट से समस्त जानकारियां जुटाते रहा था / शारीरिक कष्ट और आशंकाओं ने श्रीमती जी को चिड़चिड़ा बना दिया था / मैं उनका हमेशा हौसला बढ़ाते रह रहा था / मैं खुद तनाव झेलकर श्रीमती जी को तनावमुक्त रखना चाहता था/ गर्भावस्था में तनावमुक्त रहना शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत जरुरी होता है / मेरे पत्नी का पिछले साल पांचवें महीने में गर्भपात हो चुका था इसलिए मैं कोई जोखिम नहीं ले सकता था /

अप्रेल महीने के तीसरे दिन मेरी पत्नी को बेचैनी महसूस होने लगी / उन्हें साँस लेने में भी कठिनाई हो रही थी / मैंने तुरंत दुर्गापुर स्थित मिशन हॉस्पिटल लेकर पहुंचा / डॉक्टरों ने जरुरी जाँच के बाद मुझे अगले ही दिन सीजर कराने की सलाह दी / लगभग पचास प्रतिशत जुड़वा बच्चे सीजर से ही पैदा होते है / इसके लिए हमलोग मानसिक रूप से पहले से ही तैयार थे / चौथे अप्रेल को चंद्रग्रहण होने वाला था / मैंने अपने शुभचिंतकों से सलाह ली / सभी ने मुझे ग्रहण के दिन सीजर ना कराने की सलाह दी / उसी दिन हनुमान जयंती और पूर्णिमा भी था / हनुमान जयंती मुझे पसंद था और पूर्णिमा मेरी पत्नी को / लेकिन चंद्रग्रहण किसी को नहीं / हमलोग दुबिधा में थे लेकिन मैंने पढ़ा था ” दृढ संकल्प से दुबिधा की बेड़िया कट जाती है” / मैंने भी संकल्प कर लिया यदि डॉक्टर जरुरी समझे तो कल सीजर करवा दिया जाएगा / मैंने अगले दिन सीजर कराने की सहमति डॉक्टर को दे दी लेकिन उनसे अनुरोध किया कि जितने देर तक चंद्रग्रहण हो उतने देर तक सीजर ना कि जाय तो ठीक / डॉक्टर ने सहमति प्रकट किया/ लेकिन नियति को कौन ताल सकता है / ठीक चार बजे शाम को पत्नी को बेचैनी होने लगी और डॉक्टरों ने तुरंत सीजर कराने को कहा / तैयारियां शुरू हो गयी / और ठीक शाम को साढ़े पांच बजे जब चन्द्रमा राहू के ग्रास से मुक्त होकर धीरे -धीरे बाहर निकल रहा था मेरे दोनों बच्चे, एक लक्ष्मी तो दूसरा गणेश इस दुनिया में आ चुके थे / मैं दो-दो बच्चों का पिता बन चुका था / दोनों बच्चे स्वस्थ और सकुशल थे / उनका वजन भी सामान्य था / मैंने जैसे ही अपने दोनों बच्चों को देखा मेरे ख़ुशी का ठिकाना ना था / एक साल पहले गर्भपात में जिस बच्चे को हमने खो दिया था वो फिर से मुझे मिल गया था और अपने साथ अपने एक और मेहमान को भी लाया था / मेरा परिवार पूरा हो चुका था / हनुमान जयंती के दिन मेरे घर इनका आना मेरे लिए सौभाग्य का बात था / चंद्रग्रहण को मैं भूल चूका था / मैंने अपने पत्नी को चूमा और मुझे इतनी बड़ी ख़ुशी देने के लिए धन्यवाद दिया / मैं वहाँ अपने पुरे परिवार विशेषकर माँ क़ी कमी को महसुस कर रहा था / मेरी ख़ुशी में शामिल होने के लिए वे लोग वहाँ दूर रहने के कारण उपस्थित ना हो पाये थे फिर भी मैंने सबसे पहले अपने माँ को फोन पर जानकारी दी उन्हें प्रणाम कर आशीर्वाद लिया / जब मैंने यह सुचना अपने छोटे भाई को दिया तो वह ख़ुशी से नाच उठा / फिर एक -एक कर मैंने पिताजी, बहन और सभी रिश्तेदारों को अपने पापा बनने क़ी जानकारी फोन पर दिया / सभी ने ख़ुशी जाहिर क़ी / इस घडी में मेरे सास -ससुर उपस्थित थे और अपना सहयोग दिया / मैं उनका सदैव आभारी रहूंगा /

आप से भी अनुरोध है कि आप मेरे दोनों बच्चों को आशीर्वाद दे ताकि वे बड़े होकर अपने परिवार, देश और समाज का नाम रौशन कर सके / मैं आपलोगों का सदैव आभारी रहूँगा /

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