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कुलभुषण मामले में वैश्विक जनमत की दरकार

Posted On: 13 Apr, 2017 Others में

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Rajiv Kumar Ojha

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भारतीय नेवी के रिटायर्ड अधिकारी कुलभूषण जाधव मामले में पकिस्तान ने मोदी सरकार को शिकस्त देने का काम किया है। संयुक्त राष्ट्र में पाक की स्थाई प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने बलूचिस्तान, फाटा और कराची में कथित भारतीय हस्तक्षेप से जुड़े ‘दस्तावेज़’ संयुक्त राष्ट्र महासचिव को सौंपे हैं। जबकि मोदी सरकार अब तक जुबानी तलबार ही भांज रही है। एक वर्ष हो गए कुलभुषण मामले में हमारी सरकार काउंसल एक्सेस के लिए बेनतीजा पत्रव्यवहार से आगे नहीं बढ़ सकी।हमारी तन्द्रा तब भंग हुई जब कुलभुषण जाधव को पाकिस्तान ने फांसी की सजा सुना दी । हमारे विदेश मंत्रालय की कार्य क्षमता का आलम यह है की कुलभुषण जाधव प्रकरण में उसके पास अभी तक कोई ठोस जानकारी तक नहीं है ,उसे यह तक नहीं पता की वह कहाँ कैद है ? किस स्थिति में है ? संसद में हमारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज खुद को संवेदनशील सिद्ध करती नजर आईं ।देश यह जानने को उत्सुक था की हमारी सरकार कुलभुषण जाधव की सही स्थिति के बाबत ,उसकी वापसी के बाबत सरकार क्या कर रही है ? बताएगी परन्तु विदेश मंत्री सुषमा स्वराज यह बताती नजर आईं की वह कुलभुषण जाधव के परिवार से कब और कितनी बार मिलीं ?
यह देश जानना चाहता है की हमारे प्रधान मंत्री को बिन बुलाये मेहमान की हैसियत से पाकिस्तान की गुपचुप यात्रा करने से गुरेज नहीं ,पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले की जांच के लिए उस आईएसआई से ही जांच कराने से गुरेज नहीं जिसे इस हमले का आरोपी बताया गया था तब इस देश के एक रिटायर्ड नेवी आफिसर के सन्दर्भ में पाक हुक्मरानों से बात करने से गुरेज क्यों है ?
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कुलभुषण प्रकरण में हमारी सरकार यह कह रही है की उसे ईरान से अगवा किया गया था ,यदि उसके पास इसके ठोस प्रमाण थे तब इस मामले में उन प्रमाणों के साथ पाकिस्तान की इस नापाक हरकत पर उसे वैश्विक स्तर पर नंगा क्यों नहीं किया गया ? हमारी सरकार ने ठोस प्रमाण के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा क्यों नहीं किया ? जबकि पाकिस्तान की तरफ से संयुक्त राष्ट्र में पाक की स्थाई प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने बलूचिस्तान, फाटा और कराची में कथित भारतीय हस्तक्षेप से जुड़े ‘दस्तावेज़’ संयुक्त राष्ट्र महासचिव को सौंपे हैं। हमारी सरकार न तो वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान के खिलाफ अपेक्षित दबाब बनाने ,संयुक्त राष्ट्र संघ में पकिस्तान को घेरने की जगह सिर्फ भाषण देकर पाकिस्तान को कथित कड़ा सन्देश देने के मुगालते में जी रही है।
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पाकिस्तान अनवरत सीज फायर का उल्लंघन कर रहा है ,हमारी सुरक्षा चौकियों को तबाह कर रहा है ,कश्मीर में आतंकी गतिविधियों से कश्मीर सुलग रहा है ,इतिहास में संभवतया यह पहला अवसर है जब आतंकी फरमान की वजह से तमाम सुरक्षा इंतजामों के वावजूद वहां हुए उपचुनाव में महज 7 प्रतिशत मतदान हो सका। कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों को पत्थरबाजों और पाक आतंकियों से जूझना पड़ रहा है। इन बदतर हालातों के वावजूद हमारी सरकार यह साहस दिखाने को तैयार नहीं की संसद में प्रस्ताव लाकर पाकिस्तान को आतंकी राष्ट्र घोषित करे,संसद में प्रस्ताव लाकर पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड कंट्री की सूची से भी बाहर करे । ऐसा करने के बाद हमारी सरकार आतंकवाद से जूझ रहे देशों से भी अपील करे की वह भी पाकिस्तान को आतंकी राष्ट्र घोषित करें। पाकिस्तान पर दबाब बनाने के लिए भारत से होकर पाकिस्तान जाकर उसके ज्यादातर भूभाग को सिंचित करने वाली सिंधु नदी के पानी को रोक देने के विकल्प पर भी विचार करने का यह सही वक्त हो सकता है।पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा है कि अब समय आ गया है जब हमें इस संधि पर फिर से विचार करना चाहिए ।यशवंत सिन्हा ने कहा, ‘भारत ने इस संधि की हर एक बात को माना है । लेकिन आप संधि के प्रावधानों को मित्र देश के साथ संधि के रूप में देख रहे हैं । दुश्मन राष्ट्र के रूप में नहीं ।भारत को दो काम करने चाहिए । एक तो सिंधु जल समझौते को खत्म कर देना चाहिए और दूसरा पाकिस्तान से सर्वाधिक तरजीह वाले राष्ट्र का दर्जा वापस ले लेना चाहिए ।’ दुर्भाग्यवश ऐसा कुछ भी होता नजर नहीं आ रहा। कुलभुषण जाधव प्रकरण में फ़ौरन से पेश्तर ठोस और प्रभावी कदम उठाये जाने चाहिए।

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