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"राजकमल शर्मा -कांग्रेसी"

Posted On: 4 Jul, 2012 Others में

RAJ KAMAL - कांतिलाल गोडबोले फ्राम किशनगंजसोचो ज़रा हट के

Rajkamal Sharma

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मेरे स्नेही दोस्तों और साथियों …… नमस्कारम + सादर अभिवादन और प्रणाम !

मेरे सभी दोस्त हमेशा ही मुझसे किसी धमाकेदार पोस्ट रूपी धमाके की उम्मीद करते रहे है और मैंने आप में से अधिकाँश की अपेक्षाओं को पूरा भी किया है ….. यहाँ पर बहुत सी  शेन वार्न रूपी ऐसी जनता जनार्दन भी है जिनके सपनो में सचिन तेंदुलकर की तरह से छक्के लगाकर मैंने उनकी रातों की नींद तथा दिन का चैन छीना है …. लेकिन आज मैं किसी और के बारे में नहीं बल्कि खुद के बारे में एक धमाकेदार रहस्योद्घाटन करने जा रहा हूँ की मैं एक जन्मजात कांग्रेसी हूँ और मरते दम तक रहूँगा भी ….

हमके सभी के प्रिय जागरण जंक्शन का जन्म कांग्रेस के शासनकाल में ही हुआ और बदकिस्मती से पिछले कुछेक सालो में  हद से ज्यादा महंगाई डायन विकराल रूप में बढ़ी और इसके साथ साथ बेहिसाब रकमों के एक से बढ़कर एक भारी भरकम घौटाले भी लगातार हुए तथा आम आदमी के जीवन की दुश्वारियां अचानक ही आशातीत रूप से कई गुणा बढ़ गई ….

एक अखबार और उसका समूह लोकतंत्र का चौथा सतम्भ होने के कारण हमेशा ही निष्पक्ष भूमिका निभाते हुए एक मजबूत विपक्ष समान भूमिका अदा करता है ….. जागरण की इसी निष्पक्षता के कारण उसको सरकार विरोधी समझने की भूल करते हुए यहाँ का माहौल कुछ इस तरह का बना दिया गया है की मेरी तरह हरेक कांग्रेसी को खुद के बारे में खुलासा करना फांसी पर चढ़ने के बराबर लगता है ….

मैंने इस मंच पर हरेक दिन अपनी परीक्षा दी है और अपने व्यवहार तथा  आचरण से इस बात को साबित किया है की एक कांग्रेसी सह्रदय + सबकी सुनने वाला + सबको आदर मान  देने वाला + खुली सोच वाला तथा सभी की साथ लेकर चलने वाला भी हो सकता है ….. वैसे तो मैंने हमेशा ही राजनीति पर लिखी हुई रचनाओं से खुद को दूर ही रखा है ….. लेकिन कुछेक ब्लागर ऐसे भी है जिनके लेखों पर अगर मैं आलोचनात्मक प्रतिकिर्या कर देता तो वोह उत्साहहीन होकर शायद आज इतनी प्रवीणता से नहीं लिख पाते ….. इसलिए मैंने अपने खुद के व्यक्तिगत विचारों और भावनाओं को प्रकट करने की बजाय दबाते हुए इस मंच के ऐसे लेखकों को  हर संभव सहयोग अपनी तरफ से देने की कोशिश की जोकि उनके विकास में तथा उनको और आगे बढ़ने में सहायक सिद्ध हो सकता था ….. क्योंकि उनमे से एकाध तो ऐसे भी है जोकि किसी और विषय पर लिख तो सकते है लेकिन लिखना ही नहीं चाहते ….

मैं आप सभी के बारे में जानता था इसलिए मेरा आपके साथ किया गया व्यवहार किसी कसौटी का मोहताज नहीं है , लेकिन अब जबकि आप मेरे बारे में जान गए है तो यह आपके लिए परीक्षा की घड़ी है …. मुझको आज ऐसा महसूस हो रहा है जैसे की मैं इस दुनिया का पहला व्यक्ति होऊं जिसने की आज धरती के सूर्य के गिर्ध घूमने की सच्चाई ब्यान की हो और वोह अपनी सजा का इंतज़ार और सामना दिदादिलेरी से करने जा रहा हो ….

सच्चाई के रास्ते पर चलने के लिए  मैंने तो अपना परिवार तक भी छोड़ दिया है …..  मेरे घर की घड़ियों में पकिस्तान के समयानुसार आधे घंटे का फर्क हमेशा ही बना रहता है ….. अब तो गली मोहल्ले वालों ने भी इस बाबत पूछना छोड़ दिया है ….. जब भी भारत+पाकिस्तान के बीच में क्रिकेट का मैच होता तो मैं उनको परखने के लिए “पाकिस्तानी मुसलमान …. वगैरह -२ ?” कहता ….. मेरी माँ और मेरे भाई तथा बहिन मुझसे केवल इसी बात के कारण कम से कम पन्द्रह –बीस दिनों तक बात नहीं करते ….. और अपनी आपसी बातचीत में यह सपष्ट इशारे किया करते की मुझको अपने इस गुनाह की माफ़ी मांग लेनी चाहिए अगर मुझको उस घर में उनके साथ रहना है तो …. बार्डर पर एक सैनिक देश के दुश्मनों से लड़ाई लड़ता है लेकिन मैंने तो अपने खुद के घर में अपने परिवार से जंग लड़ी है ….. इसलिए मैं खुद को एक क्रांतिकारी + देशभक्त और जाबांज सैनिक मानता हूँ …..

क्योंकि लेखन में मैं खुशवन्त सिंह को अपना गुरु मानता हूँ ….. लेकिन जब से उनके पिता जी के गददार वाले किरदार का पता चला है मुझसे अक्सर ही यह सवाल किया गया है की क्या अब भी मैं उनको अपना गुरु मानता हूँ ?….. ऐसे साथियों से मैं खुद पूछना चाहता हूँ की कल को अगर मेरा सगा भाई देश द्रोही बन जाए (वैसे कल को अगर वोह बन जाए तो मुझको कोई हैरानी नहीं होगी – बस उसको एक अवसर मिलने भर की देर है ) तो क्या आप मुझको भी एक देशद्रोही ही मानेंगे ?….. मैंने तो अपने उन पूज्य पिता जी तक पर वयंग्य किया था जिनके बारे में अगर असल बाते बयाँ करूँ तो आप सभी अपनी आँखे पोंछते रह जायेंगे , लेकिन खुशवन्त सिंह जी की अपने देशद्रोही पिता के बारे में चुप्पी वाकई में ही अखरती है ….

अन्त में यही कहना चाहूँगा की लोग  मेरे कांग्रेसी होने की इस कड़वी सच्चाई को जानने के बाद मुझसे अपना सम्बन्ध तोड़ना चाहते है + अपनी लिस्ट से निकलना चाहते है उनको मैं ह्रदय से अग्रिम धन्यवाद देना चाहूँगा ….. क्योंकि अब दूध का दूध और पानी का पानी हो ही जाना चाहिए ….. जो झूठे नाते है उनका परित्याग करके सिर्फ सच्चे दोस्तों की पहचान भी अब हो ही जानी चाहिए ….. मैं अपनी उस बहिन का दिल से आभारी हूँ जिसने सबसे पहले इस सच्चाई को जानने के बाद भी अपने व्यवहार में किसी तरह का परिवर्तन ना लाते हुए अपना स्नेह पूर्ववत की भांति ही दिया , जिनकी सलाह पर अमल करते हुए मैं इस लेख को लिखने का हौंसला कर सका …..

एक कांग्रेसी

राजकमल शर्मा

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