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एक पत्र-शहीद सैनिक की बेटी के नाम

Posted On: 2 Mar, 2017 Others में

चिंतन के क्षणFood for Mind and Soul (आध्यात्मिक प्रसाद)........

rajkukreja

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एक पत्र शहीद की बेटी के नाम
मैं नहीं जानती कि मेरा यह संदेश गुरमेहर तक पहुंच सकता है परन्तु आप इस संदेश को अधिक से अधिक शेयर करके जन सामान्य में जागृति अवश्य ला सकते हैं।
धन्यवाद।

प्यारी बेटी गुरमेहर,
सदा सुखी रहो।
शायद तुम यह जानना चाहोगी कि मैं तुम्हें यह पत्र किस संबंध से लिख रही हूँ? ऐसा कोई संबंध तो है जो मुझे तुम्हे पत्र लिखने के लिए प्रेरित कर रहा है।तुम्हारा मेरे साथ प्रत्यक्ष रूप में भले ही कोई संबंध नहीं है परन्तु परोक्ष रूप में हमारा तुम्हारे साथ जो संबंध है, उस अधिकार से लिखने का साहस जुटा पा रही हूँ । तुम एक शहीद की बेटी हो और देश शहीद की माँ होती है। माँ पर सभी देशवासियों का समान अधिकार होता है। हम एक ही पूर्वजों की संतान हैं । हमारे पूर्वज हैं, शहीद भगत सिंह,गुरुतेग बहादुर और गुरु गोबिन्दसिंह जी, जिन्होंने देश और धर्म रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी।इस संबंध के आधार पर तुम्हें सतर्क रहने का परामर्श देना अपना कर्तव्य समझा है।शहीद की बेटी हो,देशवासियों के लिए सम्मान की पात्र हो। तुम्हें घृणा की राजनीति शोभा नहीं देती।सोशल मीडिया पर पोस्टर “ABVP से नहीं डरती,सारा देश मेरे साथ है “तुम ने यह कैसे विश्वास कर लिया कि देश का सारा युवा वर्ग तुम्हारे साथ हैं? यह तुम्हारी मिथ्या धारणा है। देश प्रेमी युवा वर्ग देश द्रोहियों का साथ कदापि नहीं दे सकता है।तुम्हें गंदी राजनीति के चंगुल में फसाया जा रहा है। बेटी! तुम नहीं समझती कि विभिन्न संगठनों की राजनीति के चक्कर में देश के लिए अपने व्यक्तिगत सुख को त्याग कर शहादत स्वीकार करने वालों के बलिदान का उपयोग करना पूरी तरह से गलत है। उन बलिदानियों के बलिदान का सम्मान करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। आज देश गुरमेहर! तुम से कुछ सवाल पूछना चाहता है कि तुम्हारे पिता को पाकिस्तान ने यदि नहीं मारा तो फिर किस ने मारा है? देश का दुर्भाग्य है कि एक शहीद की बेटी अपने पिता की शहादत को अपमानित कर रही है। वह स्वतंत्रता और स्वछंदता के अंतर नहीं खोज पा रही है। व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अर्थ को नहीं समझ पा रही है, उसे शहादत का अर्थ ही नहीं समझ आ रहा है क्योंकि यदि उसे शहादत का दर्द पता होता तो उस दर्द को महसूस करती जो भारतीय सेना के जवानों को पत्थर खाते समय होता है। यहां हम किसी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करना चाहते परन्तु किसी ने कानून हाथ में लेने की कोशिश की है तो उसे सजा मिले, लेकिन इस के साथ प्रश्न यह भी उठता है कि जो देश को तोड़ने की बात करने वालों का समर्थन करते हैं, उनके लिए संवैधानिक मानवाधिकार की बात क्यों? आज भी असली खतरा पाक और चीन से नहीं बल्कि देश में बैठे देश द्रोही जो देश के अन्न जल से बढ़ रहे हैं परन्तु देश विरोधी नारे लगाते हैं। देश के खण्डन की बात करते हैं,उनसे है।
दिल्ली के रामजस कालेज में तथाकथित एबीवीपी /वामपंथी कार्यकर्ताओं ने जिस तरह हिंसक प्रदर्शन किया उसका समर्थन नहीं किया जा सकता लेकिन उन लोगों का पूरी जिम्मेदारी के साथ विरोध करना है जो कश्मीर को भारत का अवैध कब्जा बताने वालों का,देश विरोधी नारे लगाते वालों का,भारतीय सेना को रेपिस्ट कहने वालों का, अखंडता और अस्मिता पर प्रहार करने वालो का समर्थन करने वालों को मंच देने की बात करते हैं। जो लोग संवैधानिक व्यवस्था में विश्वास नहीं करते, संविधान में उल्लिखित मौलिक दायित्वों का पालन नहीं करते, उनका संविधान में दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार पर अधिकार कैसे हो सकता है।
गुरमेहर! अपने अन्त:करण से प्रश्न करो कि
क्या तुम्हारे पिता उन लोगों का समर्थन करते जो कहते हैं कि कश्मीर को,बस्तर को,पूर्वोत्तर के राज्यों को भारत से आजादी दे देनी चाहिए?
क्या तुम्हारे पिता बुरहान वानी जैसे आंतक वादियों को शहीद मानने वालों का समर्थन करते?
क्या तुम उन लोगों से सहमत हो जो कहते हैं कि भारतीय सेना के जवान बलात्कारी हैं?
क्या तुम्हारे पिता उन लोगों का समर्थन करते जो कहते हैं कि भारत ने कश्मीर में अवैध कब्जा किया हुआ है?
गुरमेहर! तुम एक समझदार लड़की हो। लेकिन थोड़ी भटक रही हो। तुम्हारी भलाई इस में है कि वोटों की गंदी राजनीति करने वाले राहुल गांधी, केजरीवाल और वामपंथी जो तुम्हें अपना मोहरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उन से दूरी बनाए रखने में है।
शुभ आशीष के साथ तुम्हारे शुभ चिंतक
भारत देश के हितैषी।
राज कुकरेजा / करनाल
Twitter @Rajkukreja 16

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