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स्वच्छ भारत

Posted On: 26 Nov, 2015 Others में

Raj KumarJust another weblog

Raj

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राहुल गाँधी के द्वारा बैँगलुरू के छात्र / छात्राओं से स्वच्छ भारत के सवाल पर मिले विपरीत जवाब इस बात का परिचायक है कि हमारे देश के उच्च संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र / छात्रा जो कि वास्तव में उच्च सामाजिक वर्ग से संबंध रखते हैं ; उनमें गरीबों के गलियों में झाँकने की क्षमता नहीं है । अगर वो निचले पायदान पर गुजर-बशर करने वालों की गलियों को देख लेते तो शायद उनके पाषाण हृदय को यह समझने में थोड़ी कम परेशानी होती कि हमारा देश कितना स्वच्छ हुआ है ।
वास्तव में ऐसे कुलीन संस्थानों में पढ़ने वाले कुलीन घरानों के बच्चों को स्वच्छता की तो पूरी जानकारी होती है । आखिर क्यों न हो । उनके माता-पिता उन संस्थानों को मोटी-मोटी रकम देते हैं । जिनके कारण वहाँ स्वच्छता का वातावरण होता है । किन्तु चंद अमीरोँ के गलियों को स्वच्छ कर देने से स्वच्छ भारत अभियान को सफल नहीं माना जा सकता है । अगर इसे सफल बनाना है तो उन स्थानों पर भी ध्यान देना होगा जहाँ देश के 70% आबादी निवास करते हैं ।
राहुल जी, अगर आप स्वच्छ भारत पर सकारात्मक उत्तर की अपेक्षा रखते हैं तो गरीबों की गलियों का चक्कर लगाएँ । आप के उपरोक्त सवाल का सकारात्मक जवाब AC में बैठे लोग नहीं दे सकेंगे ।

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