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पापा वापिस लौटा दे

Posted On: 6 Jul, 2019 Others में

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rajsarary

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…………….. कविता……………

बचपन मैं जिन्होंने ऊँगली पकड़ चलना सिखाया था

गिरने पर चींटी मर गयी कह के उठाया था

मेरा वो हुकम का इक्का मुझे वापिस दिला दे

चाहे मुझे यमराज से मिला दे

पर मेरे पापा वापिस लौटा दे…x2

एक बेटे की तरह पाल रहे थे

हमारे घर को वो ही तो संभाल रहे थे

पेरशान थी जब उन्हें करती

तो शादी का बोलकर

मुझे डराते थे

बात बात पर चिढ़ाते थे

मेरे लिए देखे उनके सपने, वापिस दिखा दे

चाहे मुझे यमराज से मिला दे

पर मेरे पापा वापिस लौटा दे…x2

आँख मैं आँसू कभी आने नहीं दिया

बुरे समय के पास जाने नहीं दिया

दो दो दिन बाद काम से वापिस आते थे

हम बातों बातों मैं अपना कल बनाते थे

उस कल को आज कर के दिखा दे

पर मेरे पापा वापिस लौटा दे…x2

आप के बिना पापा ज़िन्दगी तो चला लूगी

पर हर मोड़ पर आपकी याद आयेगी तो अपने आप को कैसे सँभालुगी

अपने आप को कैसे सँभालुगी……

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