blogid : 15855 postid : 848687

नाम तुम्हारा !! कविता !!

Posted On: 8 Feb, 2015 Others में

swarnvihaanकविताये // आमजन स्त्री विमर्श की !!! कहानियाँ //मार्मिक प्र वंचनाओं की !!! विचार // दमित आक्रोश असंगतियो के !!! , लेख // पुनर्जागरण के !!!

ranjanagupta

132 Posts

1382 Comments

छन्दों के गुरुकुल में आकर ,
गीतों का दल खो जाता है !
भूला-भूला सा नाम तुम्हारा ,
अधरों तक रुक जाता है !
~~~~~~~~~~~
उन अमलतास के गुच्छों से ,
क्या अब भी रंग बरसते है ?
फुलवारी के फूलों में क्या ,
अब भी बतरस रस भरते है ?
तितली के पँखों पर वर्षा जल,
निर्भय हो सो जाता है !
भूला-भूला सा नाम तुम्हारा ,
अधरों तक रुक जाता है !
~~~~~~~~~~~
अनुबंधों से नव रस के ,
यह इंद्र धनुष किसने खींचा ?
ये लग्न पत्रिका मौसम की ,
मुट्ठी में ले करके भींचा !
पर्वत सी पीड़ा को लेकर ,
यमुना जल बहता जाता है !
भूला-भूला सा नाम तुम्हारा ,
अधरों तक रुक जाता है !
~~~~~~~~~~~
कौतुक था समय बिताने का ,
अंजुरी में साँझ बिछलती थी !
आपाधापी थी आने की,
पर जाने की भी जल्दी थी !
भुजपाशों में मलयानिल के ,
अब नव दल सिहरा जाता है !
भूला-भूला सा नाम तुम्हारा,
अधरों तक रुक जाता है !
~~~~~~~~~~~
बंशी तट था पनघट भी थे ,
यौवन के लदे-फंदे दिन थे !
चुनरी की सतरंगी गाँठे ,
मन के बौराये अनबन थे !
ब्रज की गलियों में राधा का ,
अब बिरही। मन रम जाता है !
भूला-भूला सा नाम तुम्हारा ,
अधरों तक रुक जाता है !!

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग