blogid : 15855 postid : 1142775

फुरसत ...

Posted On: 1 Mar, 2016 Others में

swarnvihaanकविताये // आमजन स्त्री विमर्श की !!! कहानियाँ //मार्मिक प्र वंचनाओं की !!! विचार // दमित आक्रोश असंगतियो के !!! , लेख // पुनर्जागरण के !!!

ranjanagupta

132 Posts

1382 Comments

जिंदगी तुझसे कभी
फुरसत में मिलना है मुझे…..
दर्द के उठते बगूलों से
निकलना है मुझे …
हर तरफ रेत के
उठते हुए बवंडर है..
बन के पानी किसी
चिनाब का बहना है मुझे…
आग है या तपिश है
नफरतों के शोलों की..
ओस की बूँद सा दिन रात
पिघलना है मुझे…..
खरीदी बेच डाली
रोज ये दुनिया तुमने..
यकीन कर लो मगर
कुछ नही कहना है मुझे…
कभी तो चैन कही
ख्वाब में ही मिल जाये..
दुआ करो की अब
हालात बदलना है मुझे…
रेंगते है मेरी रगों में
जो गुजरे लम्हें ..
ये वही ताज महल है
जहाँ रहना है मुझे….

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग