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सर्वेश्वर ने जलाया मांटेसरी शिक्षा का दीप

Posted On: 11 Jan, 2015 Others में

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डॉ. मनोज रस्तोगी

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न कंधों पर बस्ते का भारी बोझ और ना ही होमवर्क की चिंता। न कोई टाइम टेबिल, ना ही कोर्स। स्कूल में बच्चों को सिखाने के लिए विभिन्न प्रकार के उपकरण और उनकी सहायता के लिए मौजूद शिक्षक। न बच्चों पर मानसिक दबाव और न शिक्षकों पर।…पढ़कर आप चौकेंगे कि आखिर यह कौन सा स्कूल है? आज के युग में भले ही यह संभव न हो, लेकिन कभी ऐसा ही स्वरूप था मांटेसरी शिक्षा पद्धति का। मुरादाबाद मंडल में बाल शिक्षा की इस पद्धति की विधिवत शुरुआत करने का श्रेय जाता है सर्वेश्वर सरन सर्वे को। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सन् 1940 में बाल शिक्षा की प्रणेता डॉ.मेरिया मांटेसरी ने इटली से आकर दक्षिण भारत में कोडाई केनाल स्थित अड्यार नामक स्थान पर मांटेसरी शिक्षा पद्धति के ट्रेनिंग कोर्स शुरू किए। सर्वेश्वर सरन सर्वे ने अपने साथी राधारमन पाठक के साथ वहां एक वर्ष रहकर इसका प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षित होकर राधारमन पिलानी (राजस्थान)चले गए और सर्वेश्वर सरन कलकत्ता। बाद में उनके सहपाठी साहू रमेश कुमार ने उन्हें मुरादाबाद बुला लिया और सन् 1946 में अपनी पत्नी शिवसुंदरी की स्मृति में बच्चों का स्कूल खोला। इस स्कूल के साथ ही सर्वेश्वर सरन ने मुरादाबाद में मांटेसरी शिक्षा का सूत्रपात किया। साहू रमेश कुमार के पुत्र सुशील साहू बताते हैं कि उस समय मंडल में मांटेसरी शिक्षा पद्धति का एकमात्र यह स्कूल खासा लोकप्रिय हो गया था। वर्ष 1947 में तत्कालीन शिक्षामंत्री डॉ. संपूर्णानंद के मुरादाबाद आगमन पर उनके सामने उपकरणों का प्रदर्शन कर उन्हें इस शिक्षा पद्धति से अवगत कराया गया। बाद में सर्वेश्वर सरन के निर्देशन में ही जुलाई 1963 में कैलाश चंद्र मांटेसरी स्कूल की स्थापना हुई।
एक जुलाई 1917 को जन्मे सर्वेश्वर सरन शिशु मनोविज्ञान के मर्मज्ञ होने के साथ-साथ साहित्यकार, चित्रकार, पत्रकार और रंगकर्मी भी थे। प्रकाशित कृतियों में तीन उपन्यास ‘दो रेखाएंÓ, ‘आध घंटे की चाबीÓ और ‘गार्ड साहबÓ प्रमुख हैं। अनेक कहानियां व कविताएं अरुण, साथी, चित्रपट, रंगीला मुसाफिर, गुलदस्ता, संगीत आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती थीं। पत्रकार के रूप में उन्होंने , नारद, कलामंच पत्रिकाओं का संपादन और अरुण मासिक का सह संपादन भी किया।
रंगमंच के क्षेत्र में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। साहित्यकार शिव अवतार सरस बताते हैं कि आलोक क्लब के मंच पर सर्वेश्वर सरन ने गार्ड साहब, भिखारी एवं आक् छी नाटकों का निर्देशन किया था। इससे प्रभावित होकर सिने सम्राट पृथ्वीराज कपूर ने उन्हें प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया था। फिल्म निर्माता नरोत्तम व्यास ने भी फिल्मों में काम करने लिए मुंबई भी बुलाया। चित्रकला में भी माहिर सर्वेश्वर की चांदनी नामक वुशवर्क की एक सीनरी उ.प्र.औद्योगिक प्रदर्शनी में पुरस्कृत हुई थी। मुहल्ला लोहागढ़ स्थित आवास पर 11 जनवरी 1985 को उनका निधन हो गया।
डॉ. मनोज रस्तोगी
8, जीलाल स्ट्रीट
मुरादाबाद-244001
उत्तर प्रदेश, भारत
मोबाइल फोन नं. 9456687822

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