blogid : 11532 postid : 607298

जिंदगी की धूप

Posted On: 21 Sep, 2013 Others में

AKSHARJust another weblog

Ravinder kumar

21 Posts

196 Comments

जिंदगी की धूप में
छांव ढूँढ़ते हैं
दो घूंट पानी और
एक ठाँव ढूँढ़ते हैं.
रात-दिन की दौड़-धूप में
मिले पल भर का विश्राम
ऐसा कोई नगर नहीं
एक गाँव ढूँढ़ते हैं.
कहने को तो हवा है
मेरे शहर में भी
मगर भर ले भीतर तक
वो सांस ढूँढ़ते हैं.
फूल तो बहुत हैं
मेरे घर के आस-पास
देख उन्हें अधरों पर फ़ैल जाए
वो मुस्कान ढूँढ़ते हैं.
कहने को तो
सालों से जिए जा रहा हूँ
मगर बस हो अपनी
वो सांझ ढूँढ़ते हैं.
जिंदगी की धूप में
छांव ढूँढ़ते हैं

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग