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सैनिक या देवदूत

Posted On: 9 Sep, 2014 Others में

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Ravinder kumar

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चाहे केदारनाथ की त्रासदी हो या कश्मीर में बाढ़ का कहर. भारतीय सेना अपने जी जान से लग जाती है हमें बचाने में. जहां प्रशासन और सरकारों के प्रबंध विफल हो जाते हैं वहाँ भारत की सेना ही मोर्चा संभालती है और हमारी रक्षा करती है. भारतीय सेना के इसी जज्बे को देख कर मन में कुछ विचार उभरे. जिन्हें मैंने यहाँ प्रस्तुत किया है. भारतीय सेना जिंदाबाद भारत जिंदाबाद.

तुम्हें पहले कभी न देखा
न जान न पहचान
न पूछा तुम्हारा नाम
तुम सैनिक थे या देवदूत
मैं रहा निरा अंजान

पर दिल से था तुम्हारा इन्तजार
नेत्र चमके तुम्हें निहार
मैं मिट्टी में धंसा था
पत्थर के नीचे फंसा था
यम का फंदा गले में कसा था

कि तुमने हाथ पकड़ा
जिंदगी को कुछ जकड़ा
जीवन-मृत्यु के बीच खड़े थे
अंगद के पाँव से अड़े थे

मुझे उठाया सहलाया
पानी पीला सहारा दे उठाया
तुम्हारे कन्धों का पा सहारा
घड़ी भर तुम्हें निहार
तुम धीरे से मुस्कुराए
बैठा सपनों के उड़नखटोले में
जीवन तक ले आये

तुम कौन थे नहीं जान पाया
जीवन अपना है नहीं मान पाया
याद आते ही तुम्हारा चेहरा
हो जाता हूँ कृतज्ञता से दोहरा
शीश स्वतः ही झुक जाता है
हाथ अपने आप बंध जाते हैं
तुम्हारे सम्मान में.

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