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"गुलाबी गुलाबी गुलाबी" एक कविता ही नहीं एक सत्य भी

Posted On: 22 Jan, 2014 Others में

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Ravindra K Kapoor

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“गुलाबी गुलाबी गुलाबी” मेरी अंग्रेजी कविता “Pink Pink पिंक” जिसने Poetry Soup पर अंग्रेजी के एक कांटेस्ट में प्रथम स्थान प्राप्त कविता है और जिसे पूरे विश्व मॅ अभी तक चार हज़ार से भी ज्यादा लोगों के द्वारा पढ़ा जा चुका है का हिन्दी रूपांतरण है. जागरण जंक्शन पर अपनी इस कविता का हिन्दी रूपांतरण प्रस्तुत करते समय मेरा यह हार्दिक अनुरोध है कि हिन्दी भाषा के प्रेमी और विशेषरूप से सभी महिलायें और पुरुष भी योग के द्वारा अपने जीवन से बहुत कुछ और भी प्राप्त कर सकते हैं, जो शायद आधुनकिता कि इस दौड़ हम अक्सर खो देते हैं. जो लोग इस कविता को इसके मूल रूप अंग्रेजी में पढ़ना चाहते हैं, उनके लिए मैनें Poetry Soup के अपने इस पेज का URL निचे दिया है :-

01.http://poetrysoup.com/poems_poets/poems_by_poet.aspx?ID=17041

02. Pink Pink Pink
http://poetrysoup.com/poems_poets/poem_detail.aspx?ID=436110

.
नोट: बहुत जल्द आप इस कविता को You Tube पर सुन और कुछ देख भी पाएगें.
. .
.
.
पर्वतों की भातिं
हर शिखर का
अपना एक आकर्षण होता है,
इसी कारण
स्त्री के वक्ष शिखर हमेशा से रहे हैं
उसकी अमूल्य गौरव संपत्ति. ०१
.
.
इन शिखरों का यह आकर्षक
किसी भी मदिरा से
कहीं अधिक प्रभावशाली होता है
क्यों की ये प्रगट करते है
स्त्री के इन बन्धनों की
नैसर्गिक सुंदरता . ०२
.
.
ये पर्वत शिखर
देते हैं
एक कलाकार के मन में
कल्पना और रंगों के पंख
और भर देते हैं
प्रेमी हृदयों के दिल और दिमाग में
एक जुनून. ०३
.
.
इन जादुई मनमोहक
सुन्दर शिखरों के
उत्थान और पतन ने ,
इतिहास के महानतम
साम्राज्यों को भी
हिला कर रख दिया है ,
और इन्हीं शिखरों की
सुखद शीतल छाया में
एक शिशु के
भविष्व के सपने
अपने आकार
ग्रहण करने लगते हैं . ०४
.
.
इन शिखरों की
सुखद शीतल छाया ने
जन्म दिया है
इस धरती की सबसे
पवित्र मानवीय आकृतियों को
और इनकी
सुखद ऊष्मा ने
स्वरुप और आकृति
प्रदान की है,
धरती के
महानतम शक्तिशाली
साम्राज्यों के स्वप्नों को . 05
.
.
ये हर नवजन्मे प्रकाश को
जीवन दायिनी
अमृत स्वरुप दुग्धरस का
उस समय
पान भी करते हैं
जब वो
नवजन्मा प्रकाश
अपनी
मुस्कान बिखेर
या अपने नयनों में
अश्रु लिए
इनकी ओर निहारता है. 06
.
पर स्त्री की ये गौरव सम्पत्ति
कवियों , लेखकों और कलाकारों का
ये उदात्त प्रेरणास्त्रोत
और ये जादुई आकर्षण
जो अक्सर किसी महिला के
मुख की सुन्दरता
से भी अधिक
लुभावना प्रतीत होता है
वर्त्तमान मैं
कर रहे हैं सामना ,
.
पूरे विश्व में
व्यापक रूप से फैले
एक ऐसे प्रदूषण का,
जो कि आधुनिक जीवन शैली का
एक अनचाहा उपहार है
और ये उपहार है
रहन सहन की
निम्नतम विकृत
आदतों का,

जिन्हें लगातार
अपनाती जाती हैं
आधुनिक जावन की
चकाचोंध से प्रभावित
और उनका शिकार बनती
प्रतिदिन
हज़ारों लाखों की संख्या में
महिलायें . 07.
.
पर ऐसी बहुत सी
अद्भुत महिलायें
जो इस प्रदूषण
के अभिशाप से ग्रसित हैं,
शायद ये नहीं जानती कि
इस पदूषण का
अधिकतर मुख्य कारण
उनकी अपनी
गलतियों और त्रुटियां
ही होती हैं . 08
.
इन अनेक पीड़ित महिलाओं को
अभी भी वास्तव मैं
इस अभिशाप से बहुत कुछ
छुटकारा मिल सकता है
अगर वो हिम्मत दिखा सकें
प्राकृतिक तरीके से
रहने और सांस लेने का,
जो कि सम्भव है
योग की वास्तविक
वरदान स्वरुप
छत्रछाया मैं. 09
.
इन गुलाबी गुलाबी बन्धनों
की वृकृतियों का
मुख्या कारण
इन पीड़ित महिलाओं
के स्वयं के द्वारा
उत्पन्न कारण ही हैं,
और ये परिणाम
कुछ ऐसे नहीं हैं,
जिनके लिए हर बार
नियति या ईश्वर
की इच्छा को
दोषी मान लिया जाय. 10
.
इन कुछ गम्भीर कारणों मैं से
मुख्य हैं –
महिलाओं द्वारा
अपने ही इस गौरव सम्पदा
की उचित देखभाल
न कर पाना
और शारीरिक व्यायायम
का अभाव .

अपने मन और विचारों
को शांत और स्थिर
न रख पाना,
बिना समय के
सुबह से शाम तक
खाते पिटे रहना,
वो सभी डिब्बा बंद
अति नुक्सानदेह
जंक फ़ूड और शराब . ११
.
समय की सभी सीमाओं
को तोड़ते हुए भी
काम करते जाना
चाहे फिर
मन और मस्तिष्क
कितने ही बोझ से
क्यों न दबते जाएँ . 12
.
दौड़ना और दौड़ते जाना
जिससे कि
तुम पकड़ सको
दूसरों को प्रतिस्पर्धा में
और इस दौड़ में तुम
कहीं पीछे न छूट जाओ .13
.
और पागलों कि तरह
रोना चिल्लाना
और अधिक धन के लिए
चाहे भले ही
तुम्हारे पास
अपने पुरे
जीवन भर के लिए
पर्याप्त धन
क्यों न हो . 14
.
यही वह मुख्य कारण हैं
जो कि आमंत्रित
करते हैं
प्रदूषण के (कैंसर रुपी)
बीज को
जमने के लिए
जो पनपता है
मनमोहक चोटियों
के मध्य स्थित
सुन्दर गुलाबी गुलाबी
घाटियों और वादियों में
इन घाटियों को
प्रदूषित और तहस नहस
करने के लिए . १५
.
इस प्रदूषण को
अभी भी
बहुत कुछ दूर
किया जा सकता है
थोड़े से योग के अभ्यास से
पर आधुनिकता के मोहजाल
मैं खोई हुईं
अधिकतर
आधुनिक महिलाओं
के द्वारा
यह ज्ञान
अछूता और अनकहा
ही रह जाता है . 16
.
अन्यथा
ऐसी सुन्दर और
सुरुचिपूर्ण महिलाएँ
नियमित रूप से
सामना करने लगती हैं
दुःख और परेशानियों का
और मन की अशांति के कारण
गहरी सुन्दर नींद का
पहले आंशिक
फिर पूर्ण अभाव का.
.
जो आगे चल कर
उनकी तमाम खुशियों और
मन की शांति को
समाप्त करने का
कारण
बन जाती है
जिसके फलस्वरूप
पदूषण के अनउगे बीज
अनुकूल वातावरण पा
अपना जहर फैलाने हेतु
तेजी से
फलने फूलने लगते हैं
इन सुन्दर वादियों को
तहस नहस कर
नस्ट करने के लिए . 17
.
अगर ऐसे प्रदूषण से त्रस्त
महिलायें
अपने रहन सहन को
बदल सकें
और बदल सकें,
अपने
अपने खाने पीने
की गलत आदतों को
और अपना सकें
प्राकतिक रहन सहन तथा
वरदान स्वरुप योग को
तो शायद
अभी भी बहुत देर
नहीं हुई है
इस प्रदूषण से
निकलने के लिए . 18
.
क्यों कि
योग का नियमित अभ्यास
हमारे जीवन की उम्र
को ही नहीं बढ़ाता
वरन जीवन को और अधिक
जीवन्त और
खुशहाल भी बनाता है . 19

रवीन्द्र के कपूर
हिंदी रूपांतरण २२ ०१ २०१४
कानपूर भारत (इंडिया)

.

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