blogid : 20465 postid : 1336507

योग से नहीं साहब, भोग से मिलेगी मन की शांति

Posted On: 22 Jun, 2017 Others में

एक सोंचJust another Jagranjunction Blogs weblog

ravisri

51 Posts

19 Comments

तीसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देश में विभिन्न शहरों में योग शिविर का आयोजन किया गया। सोशल मीडिया पर योग करते हुए फोटो भी डालीं गई। फेसबुक पर योग दिवस की बधाईयों की पोस्ट देखने को मिली।

जैसा की अक्सर होता है, जब भी कोई इस तरह का दिवस आता है , उस दिन लोगों का जुनून देखने लायक होता है। फिर दूसरे दिन उस बम की तरह जिसका पलीता जलता तो बहुत ही तेजी से है पर दगने के समय फुस्स हो जाता है।

वैसा ही कुछ हाल लोगों का हो जाता है। दूसरे दिन पूरी तरह से फुस्स हो जाते हैं। कहते है योग करोगे तो निरोग रहोगे। अरे साल में एक बार योग करने से निरोग हो जाएगें। योग दिवस पर जितने लोगों ने योग किया है उनमें से शायद 20 प्रतिशत लोग ही रोज योगा करते होगें या कर पाएगें।

हां इतना जरूर है कि अगर साल में एक बार योग करेगें तो आप की पसलिंया जरूर दर्द करेगीं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखनऊ के रमाबाई पार्क में आयोजित योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा योग से मन को स्थिर रखने की शक्ति मिलती है। प्रधानमंत्री जी आप की यह बात सत्य है, पर सब पर लागू नहीं होती। ये बात उनपर लागू होती है जिनके पेट भरें हो।

कभी उस गरीब से भी पूछिए, जिनकों दो वक़्त की रोटी नसीब नहीं होती। क्या मन को स्थिर रखने की शक्ति उनको योगा से मिलेगी?  कभी देश के उन नौजवानों से पूछिए जो बेचारे बेरोजगार घूम रहे हैं। रोजगार पाने के लिए दर-दर भटकते हैं। अंत में निराशा हाथ लगती है। अगर रोजगार मिल भी जाता है तो प्राइवेट कम्पनियों में उनको शोषण होता है। ज़रा उनसे पूछिए मन को कैसे स्थिर रखें योगा करके।

उन किसानों से पूछिए जो दिन रात खेत में मेहनत कर फसल उगाता है। मौसम की मार या कर्ज में डूबकर आत्महत्या करने तक मजबूर हो जाता है। वह योगा कर मन को स्थिर रखेगा। पेट में जब भूख की आग लगती है तो योगा से नहीं भोजन से मन तृप्त होता है। परिवार को पालने के लिए रोजगार जरूरी है। रोजगार होगा तो लोग भी खुश रहेगें। उनके भी मन को शांति मिलेगी। देश के अन्नदाता हमारे किसानों के लिए अगर अच्छी योजनाएं हो जिससे उनको फसल का मुनासिफ दाम मिल सके। फिर देखिए उनका मन कैसे स्थिर रहता है।  देश में बहुत सारी व्यापक समस्याएं हैं। जिनका निदान भी जरूरी है। योग को बढ़ावा देना जितना जरूरी है, ‘उससे कहीं ज्यादा जरूरी ये सब हैं’। देश का किसान परेशान है । युवा परेशान है। देश की रीढ़ जिनपर टिकी है, उनको मजबूत करने का समय है। अगर ये रीढ़ टूट गई तो योगा से भी नहीं जुड़ेगी।

आपने कहा कि लोगों को जीवन में योग को ठीक उसी तरह इस्तेमाल करना चाहिए जिस तरह नमक किया जाता है। ये बात भी आप की सही है। देश में फुटपाथ पर सोने वालों की संख्या बहुत है। जिनकों नमक तो शायद नसीब हो जाए पर रोटी का कुछ पता नहीं। जीवन गुजारने के लिए उनको नमक के साथ रोटी भी मिल जाए तब भी बहुत है उनके लिए। हम खुशनसीब मानते हैं कि आज हमारे देश का योग पूरे विश्व में  अंतराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

जिसमें बहुत सारे देश पूर्ण रूप से विकसित हैं। वहां के लोग भी रोजगार से संपन्न और गरीबी से कोसों दूर हैं। उनकों योग करने से मन की शांति मिल सकती है। योग दिवस को मनाने में कोई मलाल नहीं है। बस बात इतनी है साहब, ‘देश के गरीबों के लिए दो वक्त की रोटी, युवाओं को रोजगार, किसानों को फसल का पूरा लाभ मिले जिसे उनके मन को शांति मिल सके’।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग