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राजनीति की अनोखी दास्तां (कविता)

Posted On: 27 Jul, 2019 Others में

raxcy bhairaxcyworld

raxcy

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गौर करने वाली बात मैं बतलाता हूँ
एक बार नही सौ-सौ बार बतलाता हूँ
दिल और दिमाग़ दोनों का यूज़ कर
मैं इन अंजाम तक पंहुच पाया हूँ l
राजनीति के हर एक मुकाम से ,
नजरिया मिलाकर सच्चाई से,
वाकिफ हो राजनीती की गरिमा से
मुखरित हो आज राजनीतिक की..
इस बबण्डर को समझ अब पाया हूँ l
हवाओं से नई रुख को जन्म देना,
ओर उस रुख को बबण्डर मे तब्दील करना
सर्कस की जोकर जैसे समाज को,
अपने इशारे पर चलाने की
ये है परंपरा अखंड और पुरानी दास्तां ,
बस खाते जाते(खोखला)समझकर पास्ता l
तकलीफो का समुन्दर सा है ये संसार,
खुशी से झूमने के पल है सिर्फ दो-चार।
हर इक इंसान को जोकर बनाया गया यहाँ,
गरीबी, दरिद्रता,हीनता का बनता तमाशा सारेजहाँ l
संसार की कालचक्र मे पड़ना होता समाज को ही आता-जाता इनका कोई न सुनता,
जो भी आता एक बार बजा के जाता l
फायदा कुछ होता पर न बजाए,
तो शायद इन्हे चैन ना आता l
बस अपना-अपना रौब दिखा जाता ll
कालचक्र मे समाज समय-असमय होता बेहाल
और राजनीती समय-असमय मालामाल l
राजनीती का है इसमें,
बड़ा ही लम्बा और चौड़ा जाल
जिसमें फसते अक्सर समाज,
और होते समाज का ये बुरा हाल l
नए-नए कारनामो से बुझाते अपने आग,
होता रास्ता साफ ओर सब कुछ माफ ll
भ्रम और राजनीती की,
पास है इनके कई कुंजी…
कई हथकंडो से उपजाते है अपनी पूंजी
राजनीती मे हिन्दू धर्म की जज़्बातो से,
हिंदुत्व को राह भटकाने की कड़ी,
राजनेताओं को फिर लगी हाथ मे तरकीब है l
भगवान राम को राजनीती मे…
घसीटने का काम अब रूपए-पैसों से भी
जोर धाम से चल रहा समाज मे होता प्रतीत है l
हिंदुत्व की ईमान से ,
उनके दिल की जज़्बातो से,
आपसी तनाव बढ़ाने की उम्मीद से
छल-कपट से,
हिंदुत्व की भावनाओ से,
मान-गौरव पर प्रहार कर बस
“जय श्री राम ” नारा को बना चुका एक कुंजी है
अपने पार्टी के नेताओं की सपोर्ट से,
अपने फ़ायदो के बलबूते से,
समाज को भ्रम मे डालने की..
खोजी एक नई तरकीब है,
ओर बनाया समाज को फिर ‘मामू’ होता प्रतीत है

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