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”गुड मार्निंग टीचर'' [टीचर्स डे पर ]पूर्व प्रकाशित रचना

Posted On: 5 Sep, 2016 Others में

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”गुड मार्निंग टीचर” [टीचर्स डे पर ]पूर्व प्रकाशित रचना

सुबह हर रोज़ की तरह भाग दौड़ से ही शुरुआत हुई ,पिंकी के लिए नाश्ता बनाया ,इतने में ही सात बज गये ,जल्दी से पिंकी को नहला धुला कर भारती ने उसे स्कूल के लिए तैयार किया और उसके भारीभरकम बैग को काँधे पर लाद कर उसे स्कूल बस पर चढ़ाने घर से निकल पड़ी ,इतने में एक सुंदर महिला ,सलीके से साड़ी में लिपटी हुई पल्लू को काँधे पर अच्छे से टक किया हुआ ,सामने से आती हुई दिखाई पड़ी |उसे देखते ही ,बस का इंतज़ार करते हुए बच्चों ने ,”गुड मार्निंग ,टीचर ”कह कर उसका अभिवादन किया और उसने भी एक खिली हुई मुस्कुराहट के साथ बोला ,”गुड मार्निंग चिल्ड्रेन ”|इतने में बस आगई,और सब स्कूल के लिए निकल पड़े |

पिंकी को बस में चढ़ाने के बाद ,भारती घर की ओर चल पड़ी ,रास्ते भर ,वह ताने बाने बुनती रही ,सदियों से चली आ रही गुरुकुल प्रणाली हमारे समाज का एक विभिन्न अंग रही है और गुरु को हमारी संस्कृति में सर्वोच्च स्थान दिया गया है ,यहाँ तक कि राजे महाराजे भी गुरु के आगे सदैव शीश झुकाते रहें है | गुरु भी ऐसे थे जो निस्वार्थ भाव से अपने शिष्यों को विद्या का दान देते थे |शांत वनों के वातावरण में ऋषियों की देख रेख में ,बालक अपनी शिक्षा ग्रहण किया करते थे |गुरु द्रोणाचार्य ,चाणक्य जैसे गुरुओं का बस एक ही उदेश्य हुआ करता था अपने शिष्यों का भविष्य ,उन्हें पूर्ण रूप से प्रशिक्षित करना |समय के साथ शिक्षा का स्वरूप बदला, ,गुरु बदले और शिष्य भी बदले |

आज सरकारी स्कूलों में पढाई को ले कर अनगिनत सवाल है ,क्या सरकारी स्कूलों के अध्यापक पूर्ण निष्ठां से पढाते है? शर्म की बात है कि कई स्कूलों में बच्चों से कई टीचर अपने निजी कार्य करवाते है और पढाने के नाम पर सिर्फ खानापूरी करते है |कई बार तो बच्चों की भावनाओं को ताक पर रख कर उन्हें कठोर से कठोर दंड देने में भी नहीं हिचकचाते |अभी हाल ही में भारती की मुलाक़ात एक छोटी सी बच्ची की माँ से हुई जो एक टीचर के व्यवहार से बहुत परेशान थी ,कक्षा में उस छोटी सी बच्ची को बार बार डांटना और मारना ,उस नन्ही सी बच्ची पर अनावश्यक दबाव ने उसे इतना भयभीत कर दिया था कि वह स्कूल जाने से कतराने लगी,अब ऐसी शिक्षिका के बारे में क्या कहा जाए? सोचते सोचते कब घर आगया पता ही नहीं चला ,आते ही भारती काम में जुट गई ,दूसरे कमरे से टी वी की आवाज़ कानो में पड़ रही थी ,”एक नौवीं कक्षा की छात्रा दूवारा आत्महत्या ,सन्न रह गई भारती , क्या इसके लिए शिक्षक उतरदायी नहीं है ?

अगली सुबह फिर वही दिनचर्या ,पिंकी की ऊँगली पकड़ उसे बस में चढाने निकल पड़ी ,बस का इंतज़ार कर रहे बच्चे अपनी शिक्षिका के साथ खड़े थे ,तभी एक नन्ही , प्यारी सी बच्ची ,हाथ में गुलाब का फूल अपनी टीचर को देती हुई बोली ,”गुड मार्निंग टीचर ” |मै एक बार फिर सोच में पड़ गई,क्या यह सच में इस प्यारी सी गुड मार्निंग के योग्य है ??

रेखा जोशी

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