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महाभारत में धर्मराज युधिष्ठिर ने एक नहीं बल्कि कहे थे 15 असत्य

Posted On: 30 Mar, 2016 Spiritual में

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महाभारत में ऐसे कई पात्र है जिनके जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है. इसी तरह पांडव भाईयों में युधिष्ठिर के जीवन से धर्म और सत्य मार्ग की प्रेरणा मिलती है. धर्मराज युधिष्ठिर पूर्वजन्म में यमराज थे. लेकिन एक श्राप के कारण उन्हें पृथ्वीलोक में जन्म लेना पड़ा. महाभारत में युधिष्ठिर द्वारा एक असत्य के बारे में तो हर कोई जानता है. वास्तव में अश्वत्थामा के विषय में बोले गए एक असत्य को आधे सत्य और आधे असत्य के रूप में माना जाता है. जिसमें गुरू द्रोण का वध करने के लिए श्रीकृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर ने अश्वत्थामा नामक हाथी के मरने की खबर गुरू द्रोण को दी थी.



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जिसे सुनकर गुरू द्रोण को लगा कि उनके पुत्र अश्वत्थामा की मृत्यु हुई है. जिसके कारण शोकवश वो भूमि पर गिर पड़े और इसी दौरान उनका वध कर दिया गया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि धर्मराज युधिष्ठिर ने इस आधे असत्य के अलावा पूरे 15 असत्य बोले थे. वास्तव में अज्ञातवश के दौरान पाडंवों ने अपनी वास्तविकता छुपाकर विराट में निवास किया था. इस दौरान जब विराट के राजा ने युधिष्ठिर से उनका परिचय बताने को कहा तो युधिष्ठिर ने कुल 7 असत्य बोले. अपना परिचय देते हुए युधिष्ठिर ने कहा

‘मेरा नाम कनक है. मैं एक ब्राह्मण हूं. वैयघरा नाम के ब्राह्मण परिवार से सम्बधित हूं. मैं युधिष्ठिर का मित्र हूं. मैं पाशे खेलने में बहुत कुशल हूं. मैं सुदूर एक नगर (काल्पनिक नाम) से आया हूं’ . साथ ही उन्होंने अपने परिवार के बारे में भी असत्य बोला.


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इसके अलावा अपने भाईयों का परिचय देते हुए युधिष्ठिर ने चारों भाईयों और पत्नी का नाम असत्य बताया. इस तरह युधिष्ठिर ने 5 असत्य और बोले. साथ ही धर्मराज ने कहा कि मेरा इन लोगों से कोई नजदीकी रिश्ता नहीं है और ये केवल मेरे परिचित है. इस प्रकार धर्मराज ने 2 असत्य और बोल दिए. अंतिम असत्य बोलते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें कई राजाओं के दरबार में काम करने का अनुभव है. महाभारत में विराटपर्व में विराट सम्राट और युधिष्ठिर के बीच हुई वार्तालाप का प्रमाण मिलता है. जिसमें पाडंवों के अज्ञातवास से जुड़ी हुई घटनाएं मिलती हैं.


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हांलाकि, धर्मराज युधिष्ठिर के द्वारा कहे गए इन असत्यों के बारे में सभी लोगों का अपना-अपना तर्क है. लेकिन ऐसा माना जाता है कि यदि धर्म की रक्षा के लिए ऐसा असत्य बोला जाए जिससे किसी की हानि न हो तो उसे असत्य की श्रेणी में नहीं रखा जाता. वास्तव में एक व्यक्ति का धर्म किसी अन्य के लिए अधर्म हो सकता है. ये सब परिस्थितियों पर निर्भर करता है…Next



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