blogid : 19157 postid : 847354

हर साल शिवरात्रि को इस मंदिर में पूजा करने आता है भगवान का यह अवतार

Posted On: 6 Feb, 2015 Spiritual में

religious blogJust another Jagranjunction Blogs weblog

religious

653 Posts

132 Comments

भगवान शिव के विभिन्न अवतारों के बारें में पुराणों में ढेरों कथाएं वर्णित हैं. कभी शांत, कभी फलदायी तो कभी रौद्र अवतार में भगवान शिव ने अपने भक्तों को अपने विभिन्न रूप दिखाए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिव जी का एक अवतार आज भी पृथ्वी पर उपस्थित है. यह अवतार हर वर्ष महाशिवरात्रि पर मध्य प्रदेश में स्थित एक मंदिर में स्वयं पूजा करने आता है, लेकिन कौन हैं ये आईये जानते हैं.


Asirgarh_Fort1


मध्य प्रदेश का है मंदिर


भारत में मध्यप्रदेश राज्य के बुरहानपुर शहर के पास असीरगढ़ नाम का एक किला स्थित है. यह किला अब भगवान शिव के प्राचीन मंदिर के रूप में भी जाना जाता है. लोगों की मान्यता है कि इस किले में एक गुप्तेश्वर महादेव हैं जो मंदिर में हर अमावस्या तथा पूर्णिमा की तिथियों पर अश्वत्थामा जो की शिव के ही रूद्र रूप हैं शिव की पूजा-उपासना करते हैं. लेकिन आजतक यह बात साबित नहीं हो पाई है कि यहां सचमुच अश्वत्थामा आते हैं फिर भी विभिन्न तथ्यों के आधार पर यह मान्यता बेहद प्रचलित है. ये तथ्य कई सवाल उठाते हैं और सबसे बड़ा सवाल यह है कि…


Read: शिव को ब्रह्मा का नाम क्यों चाहिए था ? जानिए अद्भुत अध्यात्मिक सच्चाई


आखिर कौन करता है यहां पूजा


स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान शिव का रूप अश्वत्थामा, जिन्हें हिंदू मान्यताओं के अनुसार अमर माना गया है, वही इस किले में स्थित मंदिर में पूजा करने आते हैं. उन्हें आजतक किसी ने नहीं देखा तो नहीं लेकिन काफी लोगों का मानना है कि वे अश्वत्थामा ही हैं जो मंदिर में हर महाशिवरात्रि को पूजा करते हैं.

shivling


Read: शिव के आंसुओं से रुद्राक्ष की उत्पत्ति का क्या संबंध है, जानिए पुराणों में वर्णित एक अध्यात्मिक सच्चाई


काफी रोचक है यह मंदिर


मध्य प्रदेश का या मंदिर काफी प्रसिद्ध है. चारों ओर से खूबसूरत पर्वतों से घिरा यह मंदिर बेहद आकर्षक दिखता है. इस क्षेत्र में ताप्ती और नर्मदा नदी का संगम होता है. कहते हैं जो भी इस मंदिर के दर्शन करने आता है उसके मन में अध्यात्म के साथ रोमांच का भी अनुभव पैदा होता है. इस मंदिर तक पहुंचने के लिए पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है.

प्राचीन मान्यताओं वाला यह मंदिर चारों ओर से खाई व सुरंगो से घिरा है. लोगों का मानना है कि इन्हीं सुरंगों से अश्वत्थामा मंदिर में आते-जाते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं. आजतक किसी ने उन्हें मंदिर में प्रवेश करते या मंदिर से बाहर निकलते हुए नहीं देखा है लेकिन सुबह मंदिर के पूजा स्थान पर गुलाब के फूल और कुमकुम का दिखना यह दर्शाता है कि अश्वत्थामा यहां आए थे.

shiv mandir


मंदिर के पुजारियों का कहना है कि अश्वत्थामा पूजा करने के लिए जिस सामग्री का इस्तेमाल करते हैं उसमें गुलाब के फूल तथा कुमकुम शामिल रहता है. इतना ही नहीं, लोगों की यह भी  मानना है कि मंदिर के पास जो तालाब है वहां अश्वत्थामा स्नान करते हैं. इस तालाब को भी काफी पवित्र माना जाता है. इस तालाब में स्नान करने के बाद ही वे पूजा करने जाते हैं.

Read: बेलपत्र से ही खुश हो जाते हैं भोले


लेकिन यदि वह दिख जाए तो….


यह काफी आश्चर्यजनक बात है कि यदि वर्षों से शिव का रूप अश्वत्थामा इस मंदिर में शिव की अराधना करने पहुंचते हैं, तो वे आखिर आजतक किसी को दिखाई क्यों नहीं दिए? दरअसल इस बात को लेकर लोगों में एक भय प्रचलित है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि किसी को भी शिव का रूप अश्वत्थामा दिखाई दे जाए तो तो उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है.

इन मान्यताओं को लेकर लोगों के जेहन में एक डर है पर फिर भी इस मंदिर में बड़ी तादाद में भक्त आते हैं. हर शिवरात्री को यहां खास आयोजन किये जाते हैं. देश के कोने-कोने से लोग यहां पवित्र शिवलिंग के दर्शन को आते हैं.


Read more:

विष्णु के पुत्रों को क्यों मार डाला था भगवान शिव ने, जानिए एक पौराणिक रहस्य


कैसे जन्मीं भगवान शंकर की बहन और उनसे क्यों परेशान हुईं मां पार्वती


सावन का पहला सोमवार: जल चढ़ाओ और जो चाहे मांग ले जाओ


Next….












Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग