blogid : 19157 postid : 794474

हनुमान ने नहीं, देवी के इस श्राप ने किया था लंका को भस्म

Posted On: 16 Oct, 2014 Spiritual में

religious blogJust another Jagranjunction Blogs weblog

religious

653 Posts

132 Comments

लंका स्वर्ण से बनी नगरी थी. इस बनाने का आदेश भगवान शिव ने विश्वकर्मा को दिया था. लेकिन ऐसा क्या हुआ था जिससे भगवान शिव को लंका नगरी बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा था.


एक बार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी भ्रमण के लिए कैलाश पर्वत पहुँचे. दोनों को आता देख भगवान शिव विह्वल हो उठे. उन्होंने अपने कमर पर लिपटे गजचर्म को अपने सर्प से कौपीन (कमरबंद) की भाँति लपेट लिया. नजदीक आते ही भगवान शिव ने विष्णु को गले से लगा लिया. परंतु गरूड़ को देखकर शिव-सर्प संकुचित हो गया जिससे उनकी कौपीन खिसक कर गिर गई.



hanuman



भगवान शिव को नग्न अवस्था में देख लक्ष्मी और पार्वती बड़ी लज्जित हुई और सिर झुकाकर खड़ी हो गई. स्थिति सामान्य होते ही शिव विष्णु से और लक्ष्मी पार्वती से बातें करने लगी. उस दौरान लक्ष्मी शीत से ठिठुर रही थी. जब उनसे न रहा गया तो उन्होंने पार्वती से कहा कि आप राजकुमारी होते हुए भी इस हिम-पर्वत पर इतने ठंड में कैसे रह रहीं हैं?



Read:  हनुमान जी की शादी नहीं हुई, फिर कैसे हुआ बेटा? जानिए पुराणों मे छिपी एक आलौकिक घटना


कुछ दिन बीतने के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के निमंत्रण पर  भगवान शिव और पार्वती बैकुण्ठ गए. वहाँ मोतियों की माला और अन्य वैभव देख पार्वती चकित हुए बिना न रह सकी. बातचीत के दौरान लक्ष्मी जी ने कैलाश पर शीत से ठिठुरने वाली घटना का ज़िक्र कर दिया.



shiva-parvati-DM88_l



लक्ष्मी की बात को व्यंग्य समझ माता पार्वती आहत हो गई और भगवान शिव से अपने लिए भी घर बनाने की ज़िद करने लगी. उसके पश्चात शिव ने विश्वकर्मा को सुवर्ण जड़ित दिव्य भवन निर्मित करने को कहा. विश्वकर्मा ने शीघ्र ही लंका नगर की रचना की जो शुद्ध सोने से बनी थी. पार्वती के निवेदन पर उस नगर का प्रतिष्ठा महोत्सव मनाया गया जिसमें समस्त देवी देवताओं को बुलाया गया.



Read:  कैसे जन्मीं भगवान शंकर की बहन और उनसे क्यों परेशान हुईं मां पार्वती



विश्रवा नामक महर्षि ने उस नगर की वास्तुप्रतिष्ठा की. पार्वती ने लक्ष्मी को अपना भवन विशेष चाव से दिखाया. लेकिन जब भगवान शिव ने महर्षि विश्रवा से दक्षिणा माँगने को कहा तो उन्होंने वो नगरी ही माँग ली. शिव ने तत्काल ही स्वर्णनगरी उन्हें दक्षिणा में दे दी. इससे पार्वती बड़ी क्रोधित हुई और उन्होंने विश्रवा को श्राप देते हुए कहा कि तेरी यह नगरी भस्म हो जाए. पार्वती के श्राप के कारण ही रावण द्वारा रक्षित वह लंका हनुमान ने फूँक डाली थी.




Read more:

स्त्रियों से दूर रहने वाले हनुमान को इस मंदिर में स्त्री रूप में पूजा जाता है, जानिए कहां है यह मंदिर और क्या है इसका रहस्य

शिव-पार्वती के प्रेम को समर्पित हरितालिका तीज की व्रत कथा और पूजन विधि

क्या माता सीता को प्रभु राम के प्रति हनुमान की भक्ति पर शक था? जानिए रामायण की इस अनसुनी घटना को

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग