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संतान को सफल और धनवान बनाने के लिए करें देवी देवसेना की आराधना, 4 दिन तक चलती है विशेष पूजा

Posted On: 29 Oct, 2019 Spiritual में

Rizwan Noor Khan

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संतान के सुख और सुरक्षा के लिए प्रत्‍येक माता पिता हर संभव कोशिश करता है। बावजूद, उनके बच्‍चों को बीमारियों, दुश्‍मनों और दुर्घटनाओं से बचाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्‍चे का बाल भी बांका न हो तो माता देवसेना की पूजा करनी चाहिए। माता देवसेना ही छठ मैया का दूसरा स्‍वरूप हैं। इनकी पूजा से संतान के लिए आने वाले सभी दुखों और दुर्घटनाओं का नाश हो जाता है। इस बार छठ मैया की पूजा का मुहूर्त 31 अक्‍टूबर से शुरू होकर 2 नवंबर तक चलने वाला है, जबकि 3 नवंबर को सूर्योदय के बाद पारण से यह पूजा पूरी होती है। मान्‍यता है कि छठ मैया की पूजा से निसंतान दंपतियों की गोद भर जाती है।

 

 

 

 

 

 

माता देवसेना करती हैं बच्‍चों की सुरक्षा
ज्‍योतिषाचार्य पंडित गणेश प्रसाद मिश्र के अनुसार बृह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि सृष्टि की अधिष्‍ठात्री प्रकृति देव के छठे अंश को देवसेना माना गया है। देवी का छठा अंश होने के चलते इन्‍हें छठ मैया के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से सप्तमी तिथि के सूर्योदय तक छठ पूजा का का विधान है। इस दिन सूर्य और छठ मैया की पूजा की जाती है। छठ मैया की पूजा से संतान की प्राप्ति, संतान की रक्षा और दुर्घटना का नाश हो जाता है।

 

 

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सूर्य देव की बहन हैं छठ मैया
ऐसी मान्‍यता है कि छठ मैया भगवान सूर्य देव की बहन हैं। चूंकि सूर्य देव तेजस्‍वी और महाज्ञानी हैं इसलिए छठ मैया की पूजा से निसंतान दंपतियों को तेजस्‍वी संतान की प्राप्ति होती है। इसके अलावा बच्‍चों की बुद्धि का विकास तीव्र गति से होता है। माना जाता है कि छठ मैया की पूजा से सूर्य देव प्रसन्‍न होते हैं और वह पूजा करने वाली महिलाओं को आशीर्वाद देकर उनके बच्‍चों के दुखों का नाश कर देते हैं।

 

 

 

 

नहाय खाय से व्रत शुरू और पारण से समापन
चार दिन तक चलने वाले छठ महापर्व को मुख्‍य रूप से चार हिस्‍सों में बांटा गया है। इस पर्व के पहले दिन नहाय खाय विधि की जाती है। यह विधि कार्तिक माह की शुक्‍ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को संपन्‍न किया जाता है। दूसरे दिन खरना और लोहंडा विधि को पूर्ण किया जाता है। जोकि इस बार 1 नवंबर को पूर्ण की जाएगी। तीसरे दिन सायंकाल को माताएं सूर्य देव को अर्घ्‍य दिया जाता है। इसी दिन को छठ पूजा का मुख्य दिन भी कहा जाता है। चौथे दिन ऊषा अर्घ्‍य और पारण के साथ इस पर्व का समापन होता है।

 

 

 

 

निसंतान महिलाओं के लिए वरदान है व्रत
छठ पूजा के दौरान महिलाएं छठ मैया को प्रसन्‍न करने के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन पुरुषों के व्रत रखने पर मनाही नहीं है, लेकिन व्रत के कठिन नियमों के चलते वह बाध्‍य नहीं हैं। ऐसी मान्‍यता है कि छठ पूजा पूर्ण करने पर छठ मैया व्रत रखने वाली महिला को आशीर्वाद देती हैं कि उसकी संतान को कष्‍टों से मुक्ति मिल जाएगी। इसके अलावा उसे दीर्घायु होने का वरदान भी मिल जाता है। यह व्रत निसंतान महिलाओं के बहुत महत्‍वपूर्ण बताया गया है।…Next

 

 

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