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जानिए : धनतेरस पर क्‍यों करते हैं ब्रह्मांड के पहले सर्जन की पूजा, लक्ष्‍मी और विष्‍णु से क्‍या है संबंध

Posted On: 23 Oct, 2019 Spiritual में

Rizwan Noor Khan

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हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार धनतेरस पर्व कार्तिक कृष्‍ण त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस दिन ब्रह्मांड के पहले चिकित्‍सक भगवान धनवंतरि की पूजा और आराधना की जाती है। भगवान धनवंतरि ने धरती पर आयुर्वेद चिकित्‍सा और शल्‍य चिकित्‍सा का आरंभ किया। धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि धरती पर प्रकट हुए इसलिए इस दिन को उनके जन्‍मदिन के तौर भी मनाया जाता है। भगवान धनवंतरि की उपासना से बीमारियों और दुखों का नाश होता है। धनवंतरि का कुबेर और माता लक्ष्‍मी से गहरा संबंध बताया गया है और तीनों की एक साथ पूजा करने का विधान है।

 

 

 

धनवंतरि का जन्‍मदिन है धनतेरस
भगवान धनवंतरि को विष्‍णु का अवतार माना जाता है। मान्‍यताओं के अनुसार धनवंतरि का अवतरण समुद्र मंथन के दौरान हुआ था। समुद्र मंथन की शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय और त्रयोदशी को भगवान धनवंतरि का अमृत कलश लिए अवतरण हुआ था। धनवंतरि की चार भुजाएं हैं। ऊपर की दोंनों भुजाओं में शंख और चक्र धारण किये हुये हैं। जबकि दो अन्य भुजाओं मे से एक में जलूका और औषध तथा दूसरे मे अमृत कलश लिये हुये हैं। कार्तिक कृष्‍ण त्रयोदशी को धनवंतरि के अवतरण के कारण इस दिन इनका जन्‍मदिन धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। धनवंतरि स्‍वास्‍थ्‍य लाभ और खुशहाली के देवता भी हैं।

 

 

 

 

भगवान विष्‍णु के अभिन्‍न अंग
भगवान धनवं‍तरि और माता लक्ष्‍मी का अवतरण समुद्र मंथन से हुआ था। इसलिए इन दोनों का गहरा रिश्‍ता है। मान्‍यता है कि यह दोनों भगवान विष्‍णु से सीधे जुड़े हुए हैं। भगवान विष्‍णु ने अमृत कलश को असुरों से बचाने के लिए समुद्र मंथन से धनवंतरि के रूप में जन्‍म लिया और कलश लेकर स्‍वर्ग लोक चले गए। बाद में देवताओं को अमृत पान कराया। इस तरह धनवंतरि भगवान विष्‍णु के ही स्‍वरूप हैं जबकि देवी लक्ष्‍मी विष्‍णु की पत्‍नी हैं।

 

 

 

 

संपत्ति के मालिक कुबेर और स्‍वास्‍थ्‍य के धनवंतरि
कुबेर से भी धनवंतरि का संबंध बताया गया है। कुबेर महर्षि विश्रवा के पुत्र थे। ब्रह्मा ने कुबेर को पूरी सृष्टि की संपत्ति का कार्यभार सौंप दिया था। इस तरह कुबेर सृष्टि में मौजूद हर तरह की संपत्ति के मालिक बने। माता लक्ष्‍मी और धनवंतरि की उत्‍पत्ति समुद्र मंथन से हुई और सृष्टि की संपत्तियों के मालिक होने के नाते कुबेर की धनतेरस के दिन धनवंतरि और देवी लक्ष्‍मी के साथ पूजा का विधान है। यह तीनों देव स्‍वरूप संपत्ति, धन और स्‍वास्‍थ्‍य के मालिक हैं और यह सब पाने के लिए प्रथ्‍वी पर लोग तीनों की एक साथ पूजा करते हैं।…Next

 

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