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अपना काम करवाने के लिए इस तरह आजमाएं चाणक्य की साम, दाम, दंड और भेद की नीति

Posted On: 24 Oct, 2015 Spiritual में

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आप कितने शक्तिशाली हैं इसका पैमाना यह है कि आप अपने मनचाहे काम को किसी और से कितनी आसानी से करा लेते हैं. चाहे कोई राष्ट्र हो या कोई व्यक्ति, शक्ति के मापने का पैमाना यही है. सवाल यह है कि कोई किसी से अपना मनचाहा काम कैसे करा सकता है? राजनीति शास्त्र के महान ज्ञाता आचर्य चाणक्य ने किसी को अपने नियंत्रण में रखने के 4 उपाय बताए हैं. ये हैं साम, दाम, दंड और भेद. अब सवाल ये है कि इन उपायों को आप कब और कैसे अपने जीवन में इस्तेमाल कर सकते हैं.


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सबसे पहले जानते हैं कि साम, दाम, दंड, भेद का अर्थ क्या होता है?  साम यानी सुक्षाव देना या किसी कार्य को करने के लिए कहना, दाम यानी कार्य के बदले मूल्य चुकाने की पेशकश करना, दंड यानी सजा देकर कार्य करने के लिए मजबूर करना और भेद यानी संबंधित व्यक्ति के गुप्त रहस्योंं का इस्तेमाल करके या उसके हितैषियों के साथ उसका बैर कराकर अपने कार्य के लिए मजबूर करना.


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सैद्धान्तिक रूप में ये चारों उपाय बेहद क्रूर प्रतित होते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि हर एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने मनमाफिक कार्य करवाने की कोशिश में लगा रहता है और इसके लिए वह जाने अनजाने इन चार उपायों को भी आजमाता है. लेकिन अगर वह इन उपायों को इस्तेमाल करने का सही तरीका जान जाए तो इन्हें और भी कारगर तरीके से प्रयोग कर सकता है.


अपना कोई भी काम करवाने के लिए आप जो पहला उपाय आजमाते हैं वह है साम. आप संबंधित व्यक्ति को किसी कार्य को करने के लिए सुझाव देते हैं या निवेदन करते हैं. इस उपाय के तहत आप उसे इस कार्य के फायदे बताएंगे और उसे अपनी बात समझाने की कोशिश करेंगे.

उदाहरण: माता-पिता द्वारा अपने बच्चों को खाने से पहले हाथ धोने के लिए समझाना


अगर इस उपाय द्वारा आप संबंधित व्यक्ति से अपना कार्य सिद्ध नहीं करा पाते हैं तो फिर दाम की नीति अपनाइए. दाम की नीति का अर्थ सिर्फ पैसे देकर काम करवाना नहीं है. अपना काम कराने के लिए संबंधित व्यक्ति को हर तरह से लालच और जरूरतों को अपने हित में भुनाना है.

उदाहरण: खाने से पहले हाथ धोने के लिए प्रेरित करने की खातिर माता-पिता बच्चे को मिठाई देने का वादा कर सकते हैं.

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अगर यह नीति भी कारगर नहीं सिद्ध होती तो आप दंड की नीति अपनाते हैं. इसके संबंधित व्यक्ति को सजा देकर आप अपना कार्य करने के लिए मजबूर कर सकते हैं. ऐसा जरूरी नहीं कि यह सजा शारीरिक हो.

उदाहरण: मां बच्चे को तबतक खाना देने से इंकार कर सकती है जबतक की वह हाथ नहीं धो लेता.


अधिकतर मामलों में इस नीति से काम सिद्ध हो जाता है लेकिन अगर दंड की नीति भी असफल रहती है तो अंत में भेद की नीति अपनाई जाती है. माना जाता है कि यह शक्ति के इस्तेमाल का अचूक हथियार है. हर व्यक्ति के अपने कुछ गुप्त रहस्य होते हैं. अगर इन रहस्यों को आप अपने हित में भुना सकें तो किसी भी व्यक्ति से अपनी बात मनवा सकते हैं.

उदाहरण: बच्चे द्वारा किसी कार्य को करने से मना करने पर मां उसकी शिकायत पिता से कर सकती है.


भेद के नीति का एक अर्थ यह भी है कि आप संबंधित व्यक्ति के हितैषियों के बीच में वैमनस्य पैदा करके उस व्यक्ति को सामाजिक रूप से कमजोर कर दें. मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. अपने  सामाजिक स्थिति के कमजोर होने की स्थिति में वह सहारा खोजता है. ऐसी स्थिति में आप वह सहारा बनकर उस व्यक्ति से अपना काम सिद्ध करवा सकते हैं. Next…


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