blogid : 19157 postid : 770038

कौन है जिसने सृष्टिकर्ता ब्रह्मा का सिर काटने का साहस किया, जानिए पुराणों में विख्यात एक हैरतअंगेज रहस्य

Posted On: 4 Aug, 2014 Others में

religious blogJust another Jagranjunction Blogs weblog

religious

820 Posts

132 Comments

हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक भगवान शिव की माया सारे जगत में प्रचलित है और इसी माया के जरिए शिव ने अपने अनेक अवतारों को जन्म दिया है लेकिन इसमें से कुछ अवतारों का ही खासतौर पर विवरण किया जाता है. वेदों के अनुसार शिव को रुद्र कहा गया है और इसका असर शिव के अवतारों में भी देखने को मिलता है.

brahma-hindu-god



Read: कैसे जन्मीं भगवान शंकर की बहन और उनसे क्यों परेशान हुईं मां पार्वती


शिव के इस अवतार से लगता है भय

शिव के सभी रुद्र अवतारों में से एक है काल भैरव अवतार, जिनका नाम सुनते ही लोगों के भीतर डर और भय की भावना उत्पन्न होती है. कोलतार से भी गहरा काला रंग, भयानक व क्रोधित नयन, गले में रूद्राक्ष की कण्ठमाला और हाथों में लोहे का भयानक दण्ड लिए भैरव काले कुत्ते की सवारी करते हैं.


Bhairava Brahma


काल भैरव भगवान शंकर के ऐसे अवतार हैं जिनमें अत्यंत क्रोध व तामसिक गुण है और यह मदिरा का सेवन भी करते हैं. शिव के इस अवतार को भयंकर कहा जाता है जिस फलस्वरूप लोग इनसे बहुत डरते हैं व इनके प्रकोप से बचने के लिए अखंड भवन व पूजा-पाठ करते हैं. भय से भरपूर यह अवतार मनुष्य जीवन के लिए प्रेरणा का सोत है और हमें इस अवतार से बहुत शिक्षा प्राप्त होती है.


काल भैरव अवतार का मूल उद्देश्य ही मनुष्य जीवन के सभी अवगुणों को दूर करना है. भैरव अवतार आपको अत्यंत शिक्षा प्रदान करता है, साथ ही जीवन को सही रूप से आगे बढ़ाने का ज्ञान देता है।


क्यों हैं भैरव महा-क्रोधित?

पुराणों में प्रचलित कथाओं के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को मध्यान्ह में भैरव शिव के क्रोध से ही उत्पन्न हुए थे. वैसे तो भैरव के उत्पन्न होने के पीछे इतिहास में कई कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से एक है जब अंधकासुर नामक दैत्य अपने घमंड में आकर सृष्टि का नाश करने को उतारू हो गया था और यहां तक कि उसने भगवान शंकर पर भी प्रहार करने का साहस किया, तब शिव के रुधिर से भैरव की उत्पत्ति हुई जिसने उस दैत्य का नाश किया.


पुराणों के अनुसार भैरव के जन्म के संदर्भ में सृष्टिकर्ता ब्रह्मा का भी नाम लिया गया है. कहा जाता है कि एक बार ब्रह्मा जी ने भगवान शंकर की वेशभूषा व उनके गणों की रूपसज्जा को देख उनका अपमान किया व उन्हें तिरस्कारयुक्त शब्द कहे. ब्रह्मा के मुख से ऐसे अपशब्द सुन भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे और उसी क्षण उनके क्रोध से वहां एक तेज-पुंज प्रकट हुआ और जिसमें एक पुरुष की छवि दिखाई दी. वह स्वंय काल भैरव की ही छवि थी.


Read: अपनी बेटी के प्रति क्यों आकर्षित हुए ब्रह्मा?


Kala Bhairav



भैरव ने काटा था ब्रह्मा का सिर

काल भैरव की उस छवि के प्रकट होते ही भगवान शिव ने कहा, “काल की भांति शोभित होने के कारण तुम साक्षात कालराज हो, तुम्हारे तेज से काल भी भयभीत रहेगा, अत: तुम काल भैरव भी हो. तुम स्वयं मुक्तिपुरी काशी के पापियों के शासक कहलाओगे.


भगवान शंकर के शरीर से उत्पन्न उस काया का क्रोध बढ़ता गया और वो ब्रह्मा का संहार करने के लिए आगे बढ़ आयी और उसने अपनी उंगली के नाखून से ब्रह्मा का एक सिर काट दिया.


Read more:

शिव को ब्रह्मा का नाम क्यों चाहिए था ? जानिए अद्भुत अध्यात्मिक सच्चाई

शिव के आंसुओं से रुद्राक्ष की उत्पत्ति का क्या संबंध है, जानिए पुराणों में वर्णित एक अध्यात्मिक सच्चाई

ऐसा क्या हुआ था कि विष्णु को अपना नेत्र ही भगवान शिव को अर्पित करना पड़ा

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग