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ऐसे चुने जाते हैं शंकराचार्य, जानें देश में किन जगहों पर हैं सिद्ध पीठ

Posted On: 1 Mar, 2018 Spiritual में

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कांची कामकोटि पीठ के प्रमुख शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को उनके गुरु के बगल में महासमाधि दी गई। महासमाधि से पहले परंपरागत तरीके से पूजा-पाठ और सभी जरूरी संस्कार किए गए। उनके अंतिम संस्कार में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई. पलानीसामी, केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा समेत दक्षिण भारत की कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं। बुधवार को शंकराचार्य के निधन के बाद करीब 1 लाख से अधिक लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए। शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की उम्र 82 वर्ष थी और वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। देश में शंकराचार्य की परंपरा सनातन धर्म के महान प्रचारक आदि शंकराचार्य ने शुरू की थी। आइये आपको बताते हैं कि देश में कितने शंकराचार्य मठ हैं और कैसे शंकराचार्य का चुनाव होता है।


shankaracharya


आदि शंकराचार्य ने की चार मठों की स्‍थापना


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प्राचीन काल में सनातन परंपरा और हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार में सबसे बड़ी भूमिका आदि शंकराचार्य की मानी जाती है। माना जाता है कि यही वजह है कि उन्‍होंने देश के चारों कोने में चार शंकराचार्य मठ स्‍थापित किए। ये मठ पूर्व में गोवर्धन, जगन्नाथपुरी (उड़ीसा), पश्चिम में शारदामठ (गुजरात), उत्तर में ज्योतिर्मठ, बद्रीधाम (उत्तराखंड) और दक्षिण में शृंगेरी मठ, रामेश्वर (तमिलनाडु) में है। बताया जाता है कि ईसा से पूर्व आठवीं शताब्दी में ये चारों मठ स्थापित किए गए थे। आज भी इन्हें चार शंकराचार्यों के नेतृत्व में चलाया जाता है।


मठों में गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन


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इन चारों मठों में गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन होता है। पूरे भारत के संन्यासी अलग-अलग मठ से जुड़े होते हैं। यहां उन्हें संन्यास की दीक्षा दी जाती है। सबसे खास बात यह है कि संन्यास लेने के बाद दीक्षा लेने वालों के नाम के साथ दीक्षित विशेषण भी लगाने की परंपरा है। माना जाता है कि यह विशेषण लगाने से यह संकेत मिलता है कि संन्यासी किस मठ से है और वेद की किस परंपरा का निर्वहन करता है।


सबसे योग्य शिष्य बनता है उत्तराधिकारी


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आदि शंकराचार्य ने इन चारों मठों में सबसे योग्य शिष्यों को मठाधीश बनाने की परंपरा शुरू की थी, जो आज भी प्रचलित है। जो भी इन मठों का मठाधीश बनता है वह शंकराचार्य कहलाता है और अपने जीवनकाल में ही अपने सबसे योग्य शिष्य को उत्तराधिकारी बना देता है। इसके बाद उत्‍तराधिकारी नया शंकराचार्य बनता है। मठ की स्‍थापना के समय से ही शंकराचार्य के चयन की यह परंपरा चल रही है। इसी परंपरा के तहत अब जयेंद्र सरस्वती के शिष्य विजयेंद्र सरस्वती कांची पीठ के नए शंकराचार्य होंगे…Next


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