blogid : 19157 postid : 856760

अपनी मृत्यु से पहले भगवान श्रीकृष्ण यहां रहते थे!

Posted On: 26 Feb, 2015 Others में

religious blogJust another Jagranjunction Blogs weblog

religious

653 Posts

132 Comments

प्रभु श्रीकृष्ण ने जब मथुरा नगरी छोड़ी थी तो उन्होंने द्वारका को अपना निवास स्थान बनाया था. आज से हजारों वर्ष पूर्व भगवान श्रीकॄष्ण ने इसे बसाया और यही असत्य पर सत्य का विजय कराई. द्वारका भारत के पश्चिम में समुद्र के किनारे बसी है. श्रीकृष्ण मथुरा में उत्पन्न हुए, गोकुल में पले, पर राज उन्होंने द्वारका में किया. यहीं बैठकर उन्होंने सारे देश की बागडोर अपने हाथ में संभाली. पांड़वों को सहारा दिया, धर्म और अधर्म की लड़ाई में धर्म की जीत कराई. इस स्थान का धार्मिक महत्व तो है ही रहस्य भी कम नहीं है. आइए जानते हैं इस महान द्वारका नगरी की कुछ महत्वपूर्ण बातें:-


Krishna14


भगवान श्रीकृष्ण का यह मंदिर एक परकोटे से घिरा है. मंदिर के चारों ओर दरवाजा है. मंदिर के उत्तर में स्थित मोक्ष द्वार है तो दक्षिण में स्थित स्वर्ग प्रमुख है. सात मंज़िले मंदिर का शिखर 235 मीटर ऊंचा है. देखने में यह मंदिर भव्य और आकर्षक है.



Dwarka

Read: वेद व्यास से मिला वरदान द्रौपदी के जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप बन गया, जानिए क्या थीं पांडवों और द्रौपदी की शादी की शर्तें!!


हिन्दुओं का सबसे भव्य और महान द्वारकाधीश मंदिर के दक्षिण में गोमती धारा पर चक्रतीर्थ घाट है. उससे कुछ ही दूरी पर अरब सागर है, वहीं पर समुद्रनारायण मंदिर स्थित है इसके समीप ही पंचतीर्थ है. वहां पांच कुओं के जल से स्नान करने की परपंरा है. बहुत से भक्त मंदिर दर्शन से पहले गोमती में स्नान करते हैं. यहां से 56 सीढ़ियां चढ़कर स्वर्ग द्वार से मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं. मंदिर के पूर्व दिशा में शंकराचार्य द्वार स्थापित शारदा पीठ स्थित है.



49-640x360



आज भी द्वारका की महिमा है। यह चारों धाम में एक है. सात पुरियों में एक पुरी है. इसकी सुन्दरता बखान नहीं की जा सकती. समुद्र की बड़ी-बड़ी लहरें उठती है और इसके किनारों को इस तरह धोती है, जैसे इसके पैर पसार रही हो. द्वारका एक छोटा-सा-कस्बा है. कस्बे के एक हिस्से के चारों ओर चारदीवार खिंची है इसके भीतर ही सारे बड़े-बड़े मंदिर है.


Read: गांधारी के शाप के बाद जानें कैसे हुई भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु


कहा जाता है कि श्रीकृष्ण की मृत्यु के साथ उनकी बसाई हुई यह नगरी समुद्र में डूब गई. आज भी यहां उस नगरी के अवशेष मौजूद हैं. लेकिन प्रमाण आज तक नहीं मिल सका कि यह क्या है. विज्ञान इसे महाभारतकालीन निर्माण नहीं मानता. काफी समय से जाने-माने शोधकर्ताओं ने यहां पुराणों में वर्णित द्वारिका के रहस्य का पता लगाने का प्रयास किया, लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित कोई भी अध्ययन कार्य अभी तक पूरा नहीं किया गया है. समुद्र की गहराई में कटे-छटे पत्थर मिले और यहां से लगभग 200 अन्य नमूने भी एकत्र किए, लेकिन आज तक यह तय नहीं हो पाया कि यह वही नगरी है अथवा नहीं जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने बसाया था. Next…

Read more:

रामायण के जामवंत और महाभारत के कृष्ण के बीच क्यों हुआ युद्ध

रावण के ससुर ने युधिष्ठिर को ऐसा क्या दिया जिससे दुर्योधन पांडवों से ईर्षा करने लगे

क्यों नहीं करनी चाहिए इंद्रदेव की पूजा, भगवान श्रीकृष्ण के तर्कों में है इसका जवाब


Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग