blogid : 19157 postid : 1388373

महाभारत में ये 7 बातें बनीं कर्ण की मृत्यु की वजह, श्रीकृष्ण को पहले से पता था यह रहस्य

Posted On: 6 Sep, 2019 Spiritual में

Pratima Jaiswal

religious blogJust another Jagranjunction Blogs weblog

religious

781 Posts

132 Comments

दुनिया में किसी इंसान की मुख्य रूप से दो छवि होती है. अच्छा या बुरा, लेकिन इस भौतिक परिभाषा से परे कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो अच्छे और बुरी छवि से ऊपर होते हैं। वो सही-गलत से ज्यादा अपने दिल की सुनते हैं। महाभारत की इस रणभूमि में एक योद्धा ऐसा ही था, जो ना पूरी तरह नायक बन सका और ना खलनायक। उसके जीवन की परिस्थितियों ने उसे सदैव दुविधा में खड़ा कर दिया। वो योद्धा था दानवीर कर्ण, कहा जाता है कर्ण में अर्जुन से अधिक सामर्थ्य था किंतु अपने जीवन की 7 गलतियों की वजह से वो अर्जुन हाथों पराजित हो गया।

 

cover

परशुराम ने दिया था श्राप

गुरू परशुराम जी ने कर्ण को श्राप दे द‌िया क‌ि तुम मेरी दी हुई श‌िक्षा उस समय भूल जाओगे, जब तुम्हें इसकी सबसे ज्यादा जरुरत होगी। श्राप का कारण था क‌ि कर्ण ने साहस का परिचय द‌िया था, ज‌िससे गुरु परशुराम क्रोध‌ित हो गए क्योंक‌ि उन्होंने क्षत्र‌ियों को ज्ञान न देने की प्रत‌िज्ञा ली था।

 

एक ब्राह्मण का श्राप

एक बार कर्ण रथ पर सवार होकर कहीं जा रहे थे, कि उनके पहिए से एक गाय का बछड़ा दबकर मर गया। एक ब्राह्मण ने ये सब देखकर क्रोधवश कर्ण को श्राप दे दिया की यही रथ तुम्हारी मृत्यु का कारण बनेगा।

 

vidur

 

द‌िव्यास्‍त्र का घटोत्कच पर प्रयोग

कर्ण को देवराज इंद्र से द‌िव्यास्‍त्र प्राप्त हुआ था, जिसे कर्ण ने अर्जुन को मारने के लिख रखा था लेकिन श्रीकृष्ण की युक्ति की वजह से घटोत्कच को कौरव सेना पर आक्रमण के लिए भेजा गया, उसके आतंक से परेशान होकर कर्ण को घटोत्कच पर द‌िव्यास्‍त्र का प्रयोग करना पड़ा।

 

श्रीकृष्ण ने दिया था अर्जुन का साथ

जिसके साथ स्वंय श्रीकृष्ण होते हैं, उसे भला कौन हरा सकता है। दुर्योधन ने युद्ध के लिए श्रीकृष्ण की नारायणी सेना मांग ली थी, जबकि अर्जुन ने श्रीकृष्ण को मांग लिया।

 

arjun

कुंती को कर्ण द्वारा दिया वचन

जैसे-जैसे महाभारत युद्ध के दिन बीतते जा रहे थे, वैसे-वैसे कुंती को आभास होता जा रहा था कि पांडव पक्ष कमजोर होता जा रहा है। ऐसे में कुंती ने कर्ण से भेंट करके ये वचन लिया कि वो उनके पुत्रों को हानि नहीं पहुचाएगा।

 

भूमि माता का दिया श्राप

एक बार किसी नेत्रहीन व्यक्ति को प्यास लगी। कर्ण ने उस व्यक्ति को पानी पिलाने के लिए भूमि में तीर मारकर जल की धारा निकाल ली। अत्यधिक नुकीले तीर से भूमि माता को बहुत कष्ट हुआ और उन्होंने कर्ण को श्राप दिया कि तुम्हें भी एक दिन बाण से कष्ट सहना होगा।

 

karnajanam

 

अन्याय का सहयोग

कहा जाता है कि जब कोई व्यक्ति अपना अधिकार पाने और शोषण के विरुद्ध युद्ध लड़ता है तो उस युद्ध को न्याययुद्ध के नाम से जाना जाता है। अन्याय कभी भी जीत नहीं सकता। कर्ण ने कौरवों का साथ दिया जो उसका सबसे बड़ा अपराध बन गया और कर्ण को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा …Next

 

 

Read More :

केवल इस योद्धा के विनाश के लिए महाभारत युद्ध में श्री कृष्ण ने उठाया सुदर्शन चक्र

श्री कृष्ण के संग नहीं देखी होगी रुक्मिणी की मूरत, पर यहाँ विराजमान है उनके इस अवतार के साथ

मरने से पहले कर्ण ने मांगे थे श्रीकृष्ण से ये तीन वरदान, जिसे सुनकर दुविधा में पड़ गए थे श्रीकृष्ण

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग