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हिंदू पंचांग के सबसे फलदायी पर्व और व्रत इसी माह, जानिए- अगहन में क्‍या करें और क्‍या नहीं

Posted On: 13 Nov, 2019 Spiritual में

Rizwan Noor Khan

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हिंदू कैलेंडर का सबसे महत्‍वपूर्ण महीन मार्गशीष 13 नवंबर से शुरू हो चुका है। हिंदू पंचांग के तहत इस माह कई ऐसे पर्व और व्रत पड़ रहे हैं जो दुनियाभर का हर सुख देने का माद्दा रखते हैं। इस माह 7 से भी ज्‍यादा ऐसे पर्व और व्रतों का मुहूर्त है जिनके पालन से मनुष्‍य हर झंझट और परेशानी से मुक्ति पाकर खुशहाली और धनसंपदा हासिल कर सकता है। इसी वजह से कार्तिक मास के बाद आने वाले मार्गशीर्ष मास को भगवान श्रीकृष्‍ण ने स्‍वयं का स्‍वरूप बताया है। इस माह नदियों में स्‍नान करने से हर दुख से मुक्ति मिल जाती है।

 

 

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लगातार 3 दिन तक व्रत योग
13 नवंबर से शुरू हुए मार्गशीष माह का पहला व्रत 14 नवंबर यानी दूसरे दिन ही है। गुरुवार को पड़ने वाले इस व्रत को रोहिणी व्रत के नाम से जाना जाता है। इसके बाद शुक्रवार 15 नवंबर को संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी पर्व और व्रत का योग है। 17 नवंबर रविवार को वृश्चिक संक्रांति और 19 नवंबर मंगलवार को काल भैरव जयंती है। मान्‍यता है कि इस दिन इस दिन काल भैरव की पूजा की जाती है। पूरे दिन उपवास के बाद भैरव पूजन करना और भी अधिक पुन्य फल देता है।

 

 

 

 

उत्‍पन्‍ना एकादशी और अमवस्‍या
इस महीने उत्‍पन्‍ना एकादशी व्रत का योग 22 नवंबर को बन रहा है। ऐसी मान्‍यता है कि इस व्रत के पालन से अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस व्रत के दौरान भगवान श्रीकृष्‍ण की पूजा का विधान बताया गया है। व्रत रखने वाले व्‍यक्ति को रात में भोजन ग्रहण करने की सख्‍त मनाही होती है। इसके अलावा 26 नवंबर को मार्गशीष अमावस्‍या का योग बन रहा है। इस दिन देवी लक्ष्‍मी का पूजन किया जाता है। इससे वह प्रसन्‍न होकर धनसंपदा से भर देती हैं। इसे पूर्वजों के लिए भी खास माना गया है।

 

 

 

 

पंचक और मोक्षदा एकादशी
हिंदू धर्म के जानकारों के मुताबिक मार्गशीष माह के पंचक 2 दिसंबर से शुरू होकर 7 दिसंबर तक चलेंगे। इस दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इसके अलावा गृह प्रवेश समेत अन्‍य नए कार्यों को करना भी वर्जित बताया गया है। इसके अलावा 8 दिसंबर को शुक्‍ल पक्ष की एकादशी का योग है। इसे मोक्षदा एकादशी के रूप में जाना जाता है। इसका व्रत पालन करने से मोक्ष हासिल होता है। व्रत के दौरान भगवान विष्‍णु की पूजा और विष्‍णु पुराण का पाठ करना होता है।

 

 

 

 

त्रयोदशी और गणेश चतुर्थी
हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार त्रयोदशी व्रत करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्‍न होते हैं। इस व्रत का पालन करने वाले को अनंत फलों का लाभ हासिल होता है। इस माह की शुक्‍ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश पूजन करने से हर बिगड़े काम बन जाते हैं। ऐसी मान्‍यता है कि गणेश चतुर्थी व्रत के पालन से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होजी हैं। इस दौरान गणेश पूजा के साथ सिद्धविनायक का पाठ करने का भी विधान है।…Next

 

 

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