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नवरात्रि में भैरव बाबा का क्‍यों है सबसे ज्‍यादा महत्‍व, जानिए मां दुर्गा से जुड़ी ये कहानी और पूजा विधि

Posted On: 6 Oct, 2019 Spiritual में

Rizwan Noor Khan

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नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्‍वरूपों की पूजा कर उनसे अपनी मनोकामना पूरी कराने के लिए साधक को चाहिए कि वह भैरव बाबा की भी पूजा करे। हिंदू मान्‍यताओं और कथाओं के अुनसार नवरात्रि के दिनों में भैरव बाबा की आराधना के लिए विधि और दिन का वर्णन भी किया गया है। बताया जाता है कि भगवान भैरव को प्रसन्‍न किए बिना आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी नहीं हो सकती हैं। ऐसे में नवरात्रि में इनकी पूजा अति महत्‍वपूर्ण हो जाती है।

 

 

 

भोलेनाथ से जन्‍मे भैरव
मान्‍यताओं के अनुसार भैरव की उत्‍पत्ति भगवान भोलेनाथ के क्रोध से हुई है। इसको लेकर शिवमहापुराण में भी विस्‍तार से वर्णन मिलता है। भैरवनाथ को शिव गण के रूप में भी पहचाना जाता है। इसमें भैरव के आठ रूपों का जिक्र है जो आठों दिशाओं का नेतृत्‍व करते हैं एक तरह से इन दिशाओं के मालिक भी हैं। मान्‍यता है कि इन आठ भैरव के बाद सभी के आठ आठ भैरव हैं। ऐसे में कुल 64 भैरव का जिक्र मिलता है। तांत्रिक और अन्‍य तरह विशेष सिद्धियां हासिल करने वाले लोग इनकी पूजा करते हैं।

 

 

 

नवरात्रि में भैरव बाबा का महत्‍व
शास्‍त्रों में वर्णन है कि नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्‍वरूपों की आराधना के बाद कन्‍या भोज अनिवार्य है। विशेषकर कलश स्थापना करने वालों और नौ दिन का वृत रखने वालों को लिए इसे बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह भोज अष्‍टमी और नवमी को कराना चाहिए। इस दौरान भोज से पहले सभी नौ कन्‍याओं का पूजन भी अनिवार्य बताया गया है। सभी कन्‍याओं के साथ एक बालक को भी भोज कराया जाता है। इस बालक को भैरव बाबा का प्रतीक माना जाता है। मान्‍यता है कि मां दुर्गा के वरदान को हासिल करने के लिए भैरव बाबा की पूजा आवश्‍यक है। ऐसा नहीं करने पर आपकी मनोकामनाएं पूरी नहीं होंगी।

 

 

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भैरव बाबा की पूजा कैसे करें
नवरात्रि के दौरान भैरव बाबा की आराधना करने के लिए अष्‍टमी और नवमी के दिन को महत्‍वपूर्ण बताया गया है। इस दिन साधक को प्रातः काल स्नान करके प्रसाद में खीर, पूरी, और हलवा आदि तैयार करना चाहिए। कन्‍या भोज के लिए बुलाई कन्याओं के पांव शुद्ध जल से धोने चाहिए। इसके बाद भैरव बाबा के प्रतीक बालक की पांव भी साधक को धोने चाहिए। इसके बाद पंक्ति में कन्‍या के बाद सबसे अंत में बालक को साफ आसन पर बैठाना चाहिए।

 

 

 

पहले मां दुर्गा को भोग फिर भैरव को
मान्‍यता है कि कई पुराणों में कन्या पूजन के वर्णन का जिक्र मिलता है। इस वर्णन के अनुसार नवरात्रि का पर्व कन्या भोज और भैरव बाब को भोज कराए बिना अधूरा है। भैरव बाबा को भोग लगाने से पहले मां दुर्गा को भोग लगाना जरूरी है। कन्याओं को विदा करते वक्त अनाज, रुपया या वस्त्र भेंट करें और उनके पैर छूकर आशिर्वाद प्राप्त करें। यह प्रक्रिया भैरव बाबा के प्रतीक स्‍वरूप भोज में शामिल बालक के साथ भी करनी होगी।

 

 

 

 

भैरव के भोग में ये वस्‍तुएं अनिवार्य
हिंदू मान्‍यताओं के अुनसार नवरात्रि के दौरान भैरव नाथ को प्रसन्‍न करने के लिए उन्‍हें मां दुर्गा के नौ स्‍वरूपों का प्रतीक कन्‍याओं को भोज कराना अनिवार्य है। इस दौरान भैरव बाबा का भी भोग अनिवार्य है। भैरव बाबा के भोग में चने और चिरौंजी, काली उड़द की दाल और इससे बनी मिठाई, इमरती का शामिल होना अनिवार्य बताया गया है। इसके अलावा भैरव बाबा के भोग में दही बड़े, दूध और मेवा का होना भी जरूरी बताया गया है। अगर साधक इन सभी प्रक्रियाओं को सफलता पूर्वक कर लेते हैं तो उनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।…Next

 

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