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काशी विश्वनाथ से जगन्नाथ मंदिर तक, इन धार्मिक स्थलों पर नहीं जा सकते गैर हिन्दू!

Posted On: 1 Dec, 2017 Others में

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पूरे भारत में ऐसे कई धार्मिक स्थल है जहां पर दूसरे धर्म के लोग नहीं जा सकते हैं, लेकिन आज हम आपको हिन्दू मंदिरों के बारे में बताएंगे जहां पर गैर-हिन्दुओं को जाने की मनाही है। इनमें से ज्यादातर मंदिर भारत के दक्षिणी छोर पर ही स्थित हैं। तो आइए जानते हैं उन मंदिरों के बारे में आखिर क्यों वहां चाहकर भी कोई गैर-हिन्दू कदम नहीं रख सकता है और ऐसा क्यों, इसके विभिन्न कारण हैं।


cover


1. जगन्नाथ मंदिर

श्रीजगन्नाथ मंदिर के दरवाज़े के निकट एक दिशा पट्टी लगी हुई है जिस पर लिखा है, ‘यहां केवल कट्टरपंथी हिन्दुओं को भीतर जाने की अनुमति है’। हिन्दू धर्म के चार उच्च धामों में से एक माने जाने वाले श्रीजगन्नाथ पुरी मंदिर में आज भी गैर-हिन्दुओं को जाने की इजाजत नहीं है।



Jagannath




2. काशी का विश्वनाथ मंदिर

भगवान शंकर की नगरी काशी में गंगा तट पर स्थित शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर में भी गैर-हिंदुओं को जाने से रोका जाता है। लेकिन इस मंदिर में कट्टरपंथ कुछ मायनों में कम देखा गया है। ऐसा माना जाता है कि कई बार गैर-हिंदुओं को मंदिर में दर्शन करने की अनुमति प्रदान कर दी जाती है।


Kashi Vishwanath



3. गुरूवायूर मंदिर

केरल राज्य के अति प्राचीन एवं अत्यधिक प्रसिद्ध ‘गुरवायूर मंदिर’ में भी किसी गैर-हिन्दू को जाने की अनुमति नहीं है। यह पवित्र स्थल भगवान कृष्ण को समर्पित है तथा यहां हिन्दुओं को भी दर्शन करने के लिए खास प्रकार के वस्त्र धारण करने पड़ते हैं।


Guruvayur Temple



4. लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर

भुवनेश्वर शहर की सुंदरता ही उसमें समाए इस लिंगराज मंदिर से बनती है। रोज़ाना दूर-दूर से भक्त इस मंदिर के दर्शन करने के उद्देश्य से ही भुवनेश्वर आते हैं लेकिन इसी बीच सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि केवल हिन्दू धर्म के लोग ही मंदिर के भीतर जा सकते हैं। माना जाता है कि यहां पर हुई कछ घटनाओं के बाद से यहां पर गैर हिन्दू को जाने की अनुमति नहीं है।



Lingaraj




5. पशुपतिनाथ मंदिर



Pashupatinath



नेपाल देश की राजधानी काठमांडू में बागमती नदी पर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर यहां के प्राचीन मंदिरों में से एक है। इस खास मंदिर में यदि आप अंदर जाना चाहते हैं तो इसकी कुछ अहम मर्यादाएं हैं, जिनका पालन करना बेहद आवश्यक है। केवल हिन्दू एवं बौद्ध मूल के लोग ही इस मंदिर के भीतर जाकर प्रार्थना कर सकते हैं। इसके अलावा विदेशी या फिर अन्य गैर-हिन्दू धर्म के लोग केवल नदी के दूसरे छोर से मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर हमेशा ही सुरक्षा व्यवस्थाओं से पूरित रहता है।…Next



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