blogid : 19157 postid : 1389067

अमावस्‍या के साथ 2 विशेष योग, 3 काम मिटाएंगे जीवन का हर दुख

Posted On: 23 Feb, 2020 Spiritual में

Rizwan Noor Khan

religious blogJust another Jagranjunction Blogs weblog

religious

846 Posts

132 Comments

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक फाल्‍गुन माह मौसम में बदलाव के साथ जीवन में आनंद का संचार करने वाला बताया गया है। इस माह में कई ऐसे पर्व और तिथियों का आगमन होता है जो देह त्‍याग चुके पितरों को मोक्ष दिलाने, जीवन में आने वाले संकटों से मुक्ति पाने और कामयाबी का रास्‍ता दिखाते हैं। इन्‍हीं पर्व और तिथियों में एक यानी फाल्‍गुन अमावस्‍या का शुभ मुहूर्त आज है।

 

 

 

 

3 विशेष योग और महत्‍व
फरवरी की 23 तारीख बेहद शुभ बताई गई है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इस दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं। पहला इस दिन अमावस्‍या, दर्श अमावस्‍या और अन्‍वाधान का योग है। शास्‍त्रों के अनुसार इस संयोग में पूजा अर्चना के बाद मांगी गई कामना कभी खाली नहीं जाती है। मान्‍यताओं के अनुसार यह दिन विशेष रूप से जीवन के कष्‍टों को दूर करने का मुख्‍य स्रोत भी बताया गया है।

 

 

 

 

फाल्‍गुन अमावस्‍या और अकाल मृत्‍यु
हिंदू पंचांग के तहत फाल्‍गुन माह के कृष्‍ण पक्ष की अमावस्‍या का विशेष महत्‍व बताया गया है। इस अमावस्‍या को फाल्‍गुन अमावस्‍या के नाम से भी जाना जाता है। इसके बारे में शास्‍त्रों में विस्‍तार से वर्णन मिलता है। मान्‍यताओं के अनुसार फाल्‍गुन अमावस्‍या पितरों को तर्पण करने और मोक्ष दिलाने का सबसे उपयुक्‍त माध्‍यम है। इस दिन अकाल मृत्‍यु का शिकार हुए लोगों को मुक्ति हासिल होती है।

 

 

 

 

संगम स्‍नान और मोक्ष
गरुण पुराण के अनुसार फाल्‍गुन अमावस्‍या के दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। इसीलिए इस दिन पूरे देश के धार्मिक तीर्थों और नदियों पर विशेष आयोजन किए जाते हैं। इस दिन संगम में स्‍नान करने की विशेष परंपरा भी है। मान्‍यताओं के अनुसार जिस व्‍यक्ति की मृत्‍यु की तिथि नहीं पता हो उसे मोक्ष दिलाने के लिए फाल्‍गुन अमावस्‍या के दिन नदी स्‍नान कर श्राद्ध प्रकिया का पालन करना होता है।

 

 

 

 

दर्श अमावस्‍या और अन्‍वाधान योग
फाल्‍गुन अमावस्‍या के अलावा 23 फरवरी को दर्श अमावस्‍या और अन्‍वाधान के योग भी हैं। फाल्‍गुन अमावस्‍या का योग पूरे दिन रहने के बाद रात 9 बजे के करीब खत्‍म हो जाएगा और इसके बाद दर्श अमावस्‍या का मुहूर्त शुरू होगा। परंपरा के अनुसार दर्श अमावस्‍या को चंद्र दर्शन किए जाते हैं। इस विधि से पितरों को किए गए तर्पण का फल मिल जाता है। वहीं, इस दौरान अन्‍वाधान योग भी रहेगा। इस योग में यज्ञ करने का विधान है। मान्‍यता है कि यज्ञ से किसी भी तरह के कष्‍ट से मुक्ति मिल जाती है।…Next

 

 

 

Read More:

जया एकादशी पर खत्‍म हुआ गंधर्व युगल का श्राप, इंद्र क्रोध और विष्‍णु रक्षा की कथा

इन तारीखों पर विवाह का शुभ मुहूर्त, आज से ही शुरू करिए दांपत्‍य जीवन की तैयारी

निसंतान राजा सुकेतुमान के पिता बनने की दिलचस्‍प कहानी, जंगल में मिला संतान पाने का मंत्र

श्रीकृष्‍ण की मौत के बाद उनकी 16000 रानियों का क्‍या हुआ, जानिए किसने किया कृष्‍ण का अंतिम संस्‍कार

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग