blogid : 19157 postid : 840961

एक ऐसे ऋषि की कहानी जिन्होंने कभी किसी स्त्री को नहीं देखा था और जब देखा....

Posted On: 23 Jan, 2015 Spiritual में

religious blogJust another Jagranjunction Blogs weblog

religious

743 Posts

132 Comments

भारतीय इतिहास कितनी गौरवशाली है यदि इसका अंदाजा भी कोई लगाए तो शायद उसके शब्दों की सीमा ही समाप्त हो जाए. ना केवल शास्त्र बल्कि पुराणों में उल्लेखनीय विभिन्न ऐतिहासिक तथ्य किसी इंसान को अचंभित करने के लिए काफी है.


rishi with father vibhandak


आज हम आपको एक ऐसी पौराणिक कथा के बारे में बताएंगे जो आपको हैरान करने के लिए काफी है. ऋष्यश्रृंग, यह एक ऐसे ऋषि की जिंदगी की दास्तां है जिसने अपने समस्त जीवन में कभी किसी स्त्री को नहीं देखा था और जब देखा तो वह पल पुराणों के ऐतिहासिक पन्नों पर दर्ज हो गया.


हिंदू पुराणों में महान ऋषि कश्यप के पौत्र और विभांडक ऋषि के पुत्र, ऋष्यश्रृंग के जन्म की कहानी भी हैरान करने वाली है. यह तब की बात है जब विभांडक ऋषि अपनी तपस्या में लीन थे. उनकी घोर तपस्या और बढ़ती हुई शक्ति को देख स्वर्ग में देवता काफी परेशानी में आ गए थे, जिसके फलस्वरूप उन्होंने निर्णय किया के वे विभांडक ऋषि की तपस्या को भंग करेंगे.


vibhandkar


विभांडक ऋषि के तप को भंग करने के लिए देवताओं ने स्वर्ग से एक उर्वशी नाम की अप्सरा को उनके पास भेजा. वह अप्सरा अत्यंत खूबसूरत थी. उसकी आकर्षण से विभांडक ऋषि का तप भंग हुआ और दोनों में संभोग हुआ जिसके फलस्वरूप एक पुत्र का जन्म हुआ. ऋष्यश्रृंग ही वह पुत्र थे.


Read: किसने दी महाबली भीम के अहंकार को इतनी बड़ी चुनौती… जिसके उत्तर में भीम कुछ ना कर सके


पुत्र को जन्म देते ही उस अप्सरा का कार्य वहां समाप्त हुआ और वो वहां से स्वर्ग की ओर चली गई. छल और कपट की भावना से भरपूर विभांडक ऋषि ने क्रोध में आकर पूरे संसार की स्त्रियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया. इसके बाद वे अपने पुत्र को लेकर एक जंगल की ओर चले गए. अपने साथ हुए इस छल के कारण उन्होंने प्रण किया के जीवन भर वे अपने पुत्र पर किसी स्त्री की छाया तक नहीं पड़ने देंगे, यही कारण था कि ऋष्यश्रृंग ने कभी किसी स्त्री को नहीं देखा था.


daasiyan


कहते हैं क्रोधित होकर विभांडक ऋषि जिस जंगल की ओर गए थे उसके पास एक नगर था. उनका क्रोध उस जंगल में जाने के बाद और बढ़ने लगा जिसका असर उस नगर पर पड़ने लगा. वहां आकाल से मातम छाने लगा जिससे परेशान होकर नगर के राजा रोमपाद ने अपने मंत्रियों, ऋषि-मुनियों को बुलाया.


इस दुविधा का समाधान ऋषियों ने ऋष्यश्रृंग का विवाह बताया. उनके अनुसार यदि ऋष्यश्रृंग विवाह कर लें तो विभांडक ऋषि को मजबूर होकर अपना क्रोध त्यागना पड़ेगा और सारी समस्या का हल निकल जाएगा. राजा रोमपाद ने ऋषियों के इस प्रस्ताव को स्वीकारा और जंगल की ओर कुछ खूबसूरत दासियों को भेजा.


daasiyan 2


राजा रोमपाद को लगा था कि ऋष्यश्रृंग पहली बार में ही दासियों को देख मोहित हो जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ऋष्यश्रृंग जिसने आजतक किसी स्त्री को देखा नहीं था, वे कैसे समझते कि यह नारी जाति पुरुष जाति से भिन्न होती है. यही कारण है कि दासियों को ऋष्यश्रृंग को अपनी ओर आकर्षित करने में काफी समय लगा.


Read: बजरंगबली को अपना स्वरूप ज्ञात करवाने के लिए माता सीता ने क्या उपाय निकाला, पढ़िए पुराणों में छिपी एक आलौकिक घटना


लेकिन एक दिन दासियों ने ऋष्यश्रृंग को अपनी ओर मोहित करने में कुछ सफलता हासिल की. अब ऋष्यश्रृंग उन दासियों के साथ उनके नगर जाने के लिए भी तैयार हो गए. जब विभांडक ऋषि को इस बारे में पता चला तो वे अपने पुत्र को ढूंढते हुए राजा के महल जा पहुंचे जहां उनका क्रोध शांत करने के लिए राजा ने अपनी पुत्री का विवाह ऋष्यश्रृंग से कर दिया.


rama-birth


पुराणों में उल्लेख की गई एक कथा के अनुसार जब राजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति नहीं हो रही थी तो उन्होंने एक महान यज्ञ कराया था. उस यज्ञ का नाम अश्वमेध यज्ञ था. इसी अश्वमेध यज्ञ की मदद से उन्हें पुत्र के रूप में भगवान राम की प्राप्ति हुई थी.


अश्वमेध यज्ञ के दौरान राजा दशरथ को महर्षि विभांडक के पुत्र ऋष्यश्रृंग की कहानी ही सुनाई थी. इस यज्ञ से सम्बन्धित एक बात और प्रचलित है कि इसकी भविष्यवाणी बहुत पहले ही कर दी गई थी. इतना ही नहीं, यह भी कहा जाता है कि राजा रोमपाद ने ऋष्यश्रृंग से अपनी जिस दत्तक पुत्री का विवाह किया था, वह कोई और नहीं बल्कि अयोध्या के महाराज दशरथ की पुत्री और श्रीराम की बहन ही थी. Next….


Read more:

स्त्रियों से दूर रहने वाले हनुमान को इस मंदिर में स्त्री रूप में पूजा जाता है, जानिए कहां है यह मंदिर और क्या है इसका रहस्य


सभी ग्रह भयभीत होते हैं हनुमान से…जानिए पवनपुत्र की महिमा से जुड़े कुछ राज


शिव को ब्रह्मा का नाम क्यों चाहिए था ? जानिए अद्भुत अध्यात्मिक सच्चाई

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 3.25 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग