blogid : 19157 postid : 1342384

द्रौपदी के पांच पतियों का कारण पिता का श्राप भी था, महाभारत की इस घटना से चलता है पता

Posted On: 26 Jul, 2017 Spiritual में

religious blogJust another Jagranjunction Blogs weblog

religious

653 Posts

132 Comments

महाभारत में सभी पात्र रहस्यों से भरे हुए हैं. सभी चरित्रों की एक अपनी कहानी है. अधिकतर पात्रों का जीवन उनके पूर्वजन्मों पर आधारित था. इसी तरह महाभारत की एक पात्र द्रौपदी की कहानी भी रहस्यों से भरी हुई है. पांच पतियों की संगिनी होने पर भी उन्हें पवित्र समझा जाता है लेकिन कई बार मन में ये प्रश्न उठता है कि आखिर उनके पांच पति क्यों थे, क्या ये गलत निर्णयों का नतीजा था या फिर इससे भी कोई कहानी जुड़ी हुई है. महाभारत के अनुसार द्रौपदी के पांच पति मुख्य कारणों में से एक कारण उनके पिता का क्रोध भी था.


drupadi


राजा द्रुपद ने अपनी अपनी पुत्री के लिए मांगी थी आजीवन पीड़ा

द्रौपदी का जन्म अग्निकुंड से हुआ था. राजा द्रुपद कौरवों और गुरू द्रोण के कुल के विनाश के लिए एक पुत्र की प्राप्ति करना चाहते थे, इसके लिए उन्होंने एक हवन का आयोजन किया था. महान ऋषियों ने हवन करना शुरू किया. राजा द्रुपद ने उनके बताए नियमों का पालन करते हुए यज्ञ में आहूति देनी शुरू कर दी. अग्निकुंड से एक पुत्र उत्पन्न हुआ जिसका नाम धृष्टद्युम्न रखा गया. इसके बाद राजा द्रुपद हवन कुंड से उठकर जाने लगे. वहां उपस्थित ऋषियों ने उन्हें रोककर हवनकुंड में और आहूति देने को कहा जिससे कि उन्हें एक पुत्री की प्राप्ति हो सके, जो पूरे इतिहास के लिए एक उदाहरण हो.


queen 2


राजा द्रुपद नहीं चाहते थे पुत्री

राजा द्रुपद ने पुत्री प्राप्त करने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें अपना सम्मान बढ़ाने के लिए पुत्र मिल चुका है जबकि पुत्री केवल अपमान का कारण बनती है. ऋषि-मुनियों ने राजा द्रुपद को रोकने का बहुत प्रयास किया, लेकिन वो पुत्री के लिए आहूति देने के लिए तैयार नहीं थे. राजा के अपमान के कारण अग्नि देवता कुपित हो गए और हवन कुंड से अग्नि की ज्वाला निकलकर राजा द्रुपद को रोकने लगी. इस पर वो पुत्री के लिए आहूति देने के लिए बाध्य हो गए.


queen3


क्रोध में अपनी पुत्री के लिए मांगी पीड़ा

कुपित होकर अग्निदेव से राजा द्रुपद ने मांगा ‘मुझे ऐसी पुत्री चाहिए जो उम्र भर पीड़ा सहे लेकिन कभी न टूटे, जिसके साथ जीवन भर अन्याय हो लेकिन वो न्याय की मिसाल पेश करे. वो पवित्र हो और लेकिन दुनिया की नजरों में अपवित्र बना दी जाए. उसे पांच पुरुषों का संग प्राप्त हो लेकिन फिर भी पतिव्रता समझी जाए. क्या आप ऐसी पुत्री दे सकते हैं मुझे’. राजा द्रुपद ने सोचा इतनी कठिन चारित्रिक विशेषताओं वाली कन्या मिलना बहुत मुश्किल है लेकिन तभी अग्निकुंड से एक कन्या अवतरित हुई, जिसका वर्ण श्याम होने के कारण उसका नाम कृष्णा रखा गया. आगे चलकर इस कन्या का नाम द्रौपदी रखा गया. इस प्रकार राजा द्रुपद के द्वारा मांगा गया वर भी न केवल द्रौपदी के दुखों का कारण बना बल्कि उसे पांच पतियों का संग भी प्राप्त हुआ…Next


Read More :

महाभारत युद्ध का यहां है सबसे बड़ा सबूत, दिया गया है ये नाम

अर्जुन से नहीं कर्ण से करना चाहती थी द्रौपदी विवाह, पढ़िए महाभारत की अनोखी प्रेम कहानी

द्रौपदी के ठुकराए जाने के बाद ‘कर्ण’ ने क्यों की थी दो शादी

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग