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महाभारत की वो कहानी जो बहुत कम लोग जानते हैं

Posted On: 16 Jun, 2016 Spiritual में

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जीवन का सार्वभौमिक सत्य ये है कि व्यक्ति को कभी किसी का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि अपमानित हुए व्यक्ति में प्रतिशोध की भावना रहती है. बल्कि कुछ लोग तो ऐसे होते हैं जो लम्बे समय तक अपने अपमान को भुला नहीं पाते और एक दिन अपने अपमान का प्रतिशोध लेते हुए कई लोगों को विनाश की ओर धकेल देते हैं. महाभारत में भी एक ऐसी ही कहानी मिलती है, जिसमें शकुनि ने अपने और अपने परिवार के अपमान का प्रतिशोध इस प्रकार लिया कि महाभारत का युद्ध आज हजारों साल गुजर जाने बाद संसार के रक्तरंजित युद्धों में से एक माना जाता है. आइए हम आपको बताते हैं महाभारत में वर्णित एक कहानी.


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शकुनि सहित गांधारी के थे 100 भाई

महाभारत में शकुनि की भूमिका के बारे में तो हर कोई जानता है. शकुनि ने दुर्योधन को पांडवों के विरुद्ध एक अस्त्र की तरह प्रयोग किया. ऐसा करने के पीछे शकुनि का सालों पुराना प्रतिशोध था. वास्तव में ऐसा कहा जाता है कि हस्तिनापुर राजवंश ने अपनी शक्तियों का विस्तार करने के लिए गांधार (कन्धार, अफगानिस्तान) पर आक्रमण कर दिया था. इस दौरान भीष्म, पांडु और शांतनु ने गांधार पर विजय पाते हुए गांधार नरेश अचला सुवाला की हत्या कर दी थी.


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कहा जाता है कि हस्तिनापुर राजवंश ने सारी सीमाएं पार करते हुए शकुनि और उसके 100 भाईयों को बंदी बना लिया था (कई पौराणिक कहानियों में ये भी कहा जाता है कि वो शकुनि के परिवार के 100 सदस्य थे). राजवंश के सिपाहियों शकुनि पर और उसके परिवार पर बहुत अत्याचार किए. उन्होंने खाने के लिए सभी सदस्यों को मुट्ठी भर चावल दिए. जो कि मात्रा में इतने कम थे कि उससे किसी का पेट नहीं भरता था. सभी भाईयों में हस्तिनापुर राजवंश के प्रति प्रतिशोध की प्रबल भावना थी. इसलिए सभी ने प्रतिदिन अपने हिस्से का भोजन शकुनि को देने का निर्णय किया. जिससे कि कुटिल शकुनि जीवित रह सके और भविष्य में हस्तिनापुर राजवंश से प्रतिशोध ले सके.


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शकुनि के पास थे मायावी पासे

शकुनि ने अपनी बहन गांधारी के विवाह के पहले से ही प्रतिशोध लेने की तैयारी कर ली थी. उसके पास अपने पिता की हड्डियों से बने हुए पासे थे जो केवल शकुनि के अनुसार चलते थे. महाभारत में पांडवों को इन्ही पासों के कारण हार का मुंह देखकर वनवास जाना पड़ा था.


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गांधारी का विवाह एक नेत्रहीन से करवाने से क्रोधित था शकुनि

अपनी प्रिय बहन गांधारी का विवाह नेत्रहीन धृतराष्ट्र से करवाने के कारण भी शकुनि बहुत क्रोधित था. वर्षों पहले उसके मन में छुपी प्रतिशोध की भावना फिर से प्रबल हो उठी थी और आगे चलकर शकुनि महाभारत का सबसे बड़ा खलनायक साबित हुआ…Next


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