blogid : 19157 postid : 1388264

महाभारत में अर्जुन ही नहीं, इन योद्धाओं ने भी सुना था श्रीकृष्ण के मुख से भागवत गीता का ज्ञान

Posted On: 5 Aug, 2019 Spiritual में

Pratima Jaiswal

religious blogJust another Jagranjunction Blogs weblog

religious

718 Posts

132 Comments

भारत में ग्रंथों की पूजा सदियों से होती चली आ रही है, इनमें से एक है भागवत गीता। इस ग्रंथ में न केवल सही राह पर चलने का मार्ग प्रदर्शित किया गया है बल्कि उस युग से जुड़ी ऐसी बातों का वर्णन भी किया गया है जिससे कलयुग का मानव वंचित है लेकिन इस महान ग्रंथ के नाम और इसमें बसी कथाओं के अलावा इस ग्रंथ से जुड़ी ऐसी कई बातें हैं जिनकी सार्थकता आज भी बनी हुई है,  कहा जाता है भगवान श्री कृष्ण ने एक बार दुर्योधन को भी स्वयं गीता ज्ञान के उपदेश देने की बात कही थी।

 

krishna

 

कहते हैं श्री कृष्ण एक बार दुर्योधन को स्वयं भागवत गीता का पाठ पढ़ाने की कोशिश की थी लेकिन अहंकारी दुर्योधन ने यह कहकर श्री कृष्ण को रोक दिया कि वे सब जानते हैं, यदि उस समय दुर्योधन श्री कृष्ण के मुख से भागवत गीता के कुछ बोल सुन लेते, तो आज महाभारत के युद्ध का इतिहास ही कुछ और होता।

 

duryodhana

 

 

यह बात शायद ही कोई जानता है कि जब श्री कृष्ण ने पहली बार अर्जुन को भागवत गीता सुनाई थी, तब वहां अर्जुन अकेले नहीं थे बल्कि उनके साथ हनुमान जी, संजय एवं बर्बरीक भी मौजूद थे। हनुमान उस समय अर्जुन के रथ के ऊपर सवार थे। दूसरी ओर संजय को श्री वेद व्यास द्वारा वैद दृष्टि का वरदान प्राप्त था जिस कारण वे कुरुक्षेत्र में चल रही हर हलचल को महल में बैठकर भी देख सकते थे और सुन सकते थे, जबकि बर्बरीक, जो घटोत्कच के पुत्र हैं, वे उस समय श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच चल रही उस बात को दूर पहाड़ी की चोटी से सुन रहे थे।

 

arjuna

 

 

कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के दौरान श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच हुई वह बातचीत ऐतिहासिक है, क्योंकि आज मनुष्य में महाभारत के उस युग को अनुभव करने की क्षमता व दैविक शक्तियां प्राप्त नहीं है, जो ऋषि-मुनि अपने तप से वह शक्तियां प्राप्त कर लेते हैं। वे बंद आंखों से अपने सामने महाभारत युग में हुए एक-एक अध्याय को देख सकते हैं।

 

krishnaa

 

 

इस महान वैज्ञानिक ने की थी गीता की तारीफ

भागवत गीता की रचनाओं को ना केवल भारत के विभिन्न धर्मों की मान्यता हासिल है बल्कि एक समय में दुनिया के जाने-माने वैज्ञानिक रहे अल्बर्ट आइंस्टीन ने भी इस महान ग्रंथ की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि   भागवत गीता को उन्होंने अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव में पढ़ा, यदि  इसे अपनी जिंदगी की शुरुआती पड़ाव में पढ़ा होता, तो ब्रह्मांड और इससे जुड़े तथ्यों को जानना उनके लिए काफी आसान हो जाता। यह देवों द्वारा रचा गया ऐसा ग्रंथ है, जिसमें ब्रह्मांड से भूतल तक की सारी जानकारी समाई है…Next

Read More:

इस कारण से दुर्योधन के इन दो भाईयों ने किया था उसके दुष्कर्मों का विरोध

महाभारत में शकुनि के अलावा थे एक और मामा, दुर्योधन को दिया था ये वरदान

आज भी मृत्यु के लिए भटक रहा है महाभारत का एक योद्धा

इस कारण से दुर्योधन के इन दो भाईयों ने किया था उसके दुष्कर्मों का विरोध
महाभारत में शकुनि के अलावा थे एक और मामा, दुर्योधन को दिया था ये वरदान
आज भी मृत्यु के लिए भटक रहा है महाभारत का एक योद्धा

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग