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शास्त्रों में इन कारणों से एक ही गौत्र में विवाह की है मनाही, संतान पर पड़ता है असर

Posted On: 2 Dec, 2016 Spiritual में

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विवाह भारतीय समाज का एक अहम हिस्सा है. हिंदुओं में विवाह पद्धति के संबंध में कई प्राचीन परंपराएं मौजूद हैं. इनमें से एक है अपने गौत्र में शादी न करना. इसके अलावा मां, नानी और दादी का गौत्र भी टाला जाता है. ऐसा क्यों होता है इसका उल्लेख  पुराणों में किया गया है. अक्सर आपने सुना होगा लोग एक गौत्र में शादी नहीं करते शास्त्रों में भी ऐसे विवाह को गलत माना गया है.


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कितने हैं गौत्र

आठ ऋषियों के नाम पर मूल आठ गौत्र ऋषि माने जाते हैं, जिनके वंश के पुरुषों के नाम पर अन्य गौत्र बनाए गए. अंगिरा, कश्यप, वशिष्ठ और भृगु, जबकि जैन ग्रंथों में भी 7 गौत्रों का उल्लेख है- कश्यप, गौतम, वत्स्य, कुत्स, कौशिक, मंडव्य और वशिष्ठ.


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अलग-अलग हैं नियम

विभिन्न समुदायों में गौत्र की संख्या अलग-अलग है. गौत्र को लेकर भी कई मान्यताएं हैं. कहीं 4 गौत्र टाले जाते हैं तो किसी वंश में 3 गौत्र टालने का भी नियम है. तीन गौत्र को छोड़कर ही विवाह किया जाता है एक स्वयं का गौत्र, दूसरा मांं का गौत्र और तीसरा दादी का गौत्र. कहीं कहीं नानी के गौत्र को भी माना जाता है और उस गौत्र में भी विवाह नहीं होता.


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मनुस्मृति में लिखा है

मनुस्मृति में लिखा है कि एक ही गौत्र में शादी नहीं करनी चाहिए अगर कोई ऐसा करता है तो उसका प्रभाव नकरात्मक होता है. साथ ही कई तरह की बीमारियां भी घर कर जाती हैं. एक ही गौत्र में विवाह करने से संतान में अनेक दोष पैदा होते हैं.


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ये भी है एक कारण

हिन्दू संस्कृति में एक ही गोत्र में विवाह ना करने की एक और बड़ी वजह है एक ही गौत्र से होने के कारण लड़का और लड़की भाई-बहन होते हैं क्योंकि उनके पूर्वज एक ही वंश के होते हैं. ऐसे में एक ही गौत्र में विवाह वर्जित है.


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गौत्र में विवाह का विज्ञान

हमारी धार्मिक मान्यता के अनुसार एक ही गौत्र या एक ही कुल में विवाह करना पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है. यह प्रतिबंध इसलिए लगाया गया क्योंकि एक ही गौत्र या कुल में विवाह होने पर दंपत्ति की संतान अनुवांशिक दोष के साथ उत्पन्न होती है. विज्ञान द्वारा भी इस संबंध में यही बात कही गई है कि सगौत्र शादी करने पर अधिकांश ऐसे दंपत्ति की संतानों में अनुवांशिक दोष अर्थात् मानसिक विकलांगता, अपंगता, गंभीर रोग आदि जन्मजात ही पाए जाते हैं…Next


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