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प्रिये तुम तो प्राण समान हो

Posted On: 7 Feb, 2014 Others में

दास्ताँने दिलये दुनिया है दिलवालों की

अरुन शर्मा 'अनन्त'

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अंतस मन में विद्यमान हो,

तुम भविष्य हो वर्तमान हो,

मधुरिम प्रातः संध्या बेला,

प्रिये तुम तो प्राण समान हो….

अधर खिली मुस्कान तुम्हीं हो,

खुशियों का खलिहान तुम्हीं हो,

तुम ही ऋतु हो, तुम्हीं पर्व हो,

सरस सहज आसान तुम्हीं हो.

तुम्हीं समस्या का निदान हो,

प्रिये तुम तो प्राण समान हो….

पीड़ाहारी प्रेम बाम हो,

तुम्हीं चैन हो तुम आराम हो,

शब्दकोष तुम तुम्हीं व्याकरण,

तुम संज्ञा हो सर्वनाम हो.

तुम पूजा हो तुम्हीं ध्यान हो,

प्रिये तुम तो प्राण समान हो….

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